People created ruckus in Sai Overseas of Jalandhar After a long time, the owner of Immigrave agreed to all the conditions Baljinder Sehgal
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PTB Big Breaking न्यूज़ जालंधर (एडिटर-इन-चीफ) राणा हिमाचल : आए दिन जिला जालंधर में विदेश भेजने के नाम पर किये जाने वाले लाखों के सौदे इमीग्रेशन का काम करने वालों पर उस समय भारी पढ़ जाते हैं जब कंपनी द्वारा किये जाने वाले सौदे में अचानक बदलाव कर अपने ग्राहकों से ज्यादा पैसों की मांग की जाती है और वह भी तब जब किसी का वीज़ा लग जाता है, खास बात तो यह है की इमीग्रेशन कंपनियों के मालिक इस मामले में तब तक सामने नहीं आते जब तक की कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारी के साथ फाइनल डील ना हो जाये, आखिर क्यों?
.खेर मामला उस समय गंभीर हो गया जब धार्मिक नाम से अपना कारोबार चलाने वाली S Overseas ने पहले तो अपने ग्राहक जोकि ऑस्ट्रेलिया में स्टडी वीज़ा पर जाना चाहता था को अपने जाल में इस तरह से फंसाया की वह फंसता ही चला गया और कंपनी के 14 महीने के लारों के बाद युवक का स्टडी वीज़ा लग गया / इससे पहले जब युवक ने अपने परिजनों के साथ S Overseas जोकि बस स्टैंड के पास स्थित है से फंड को लेकर बात की तो कंपनी ने फंड की व्यवस्था करवाने के बदले लाखों की डिमांड कर डाली /
.सुनने और समझने वाली बात तो यह है कि दिशा-निर्देशों के हिसाब से कोई भी इमीग्रेशन कंपनी फंड की व्यवस्था नहीं करवा सकती जोकि दंडनीय अपराध है, लेकिन कंपनी ने किसी तरह से अपने ग्राहक को जाल में उलझाते हुए फंड की व्यवस्था करवाने के बदले में लाखों की डील फ़ाइनल कर ली और 14 महीने के सफल प्रयास के बाद युवक का ऑस्ट्रेलिया वीज़ा लगवा दिया, लेकिन बात यहां तक होती तो ठीक था, मामला तब और उलझ गया जब ऑस्ट्रेलिया पहुंचते ही युवक को यह पता लगा की उसकी इंशोरेंस जोकि कंपनी ने वादे के मुताबिक करके देनी थी ने एक महीने की ही इंशोरेंस करवाकर दी है, जिसकी वैधता अवधि अब समाप्त हो गई है /
.जबकि परिवारिक सदस्यों का कहना है कि हमारे बेटे का ऑस्ट्रेलिया स्टडी वीज़ा 2022 तक का है और हमारी कंपनी से जब बात हुई थी, तो उन्होंने हमें इंशोरेंस 2022 तक करवाने की बात कही थी जिसके बदले में कंपनी ने उनसे लाखों रूपये भी अलग से लिए थे, लेकिन यह स्पष्ट करना जरूरी हो जाता है की ऑस्ट्रेलिया स्टडी वीज़ा इंशोरेंस के बदले लाखों रूपये कैसे एक कंपनी ले सकती है / क्योंकि एक समेस्टर के हिसाब से देखा जाये तो जिस कंपनी के द्वारा छात्रों की इंशोरेंस करवाई जाती है उसमें एक समेस्टर की फ़ीस 500$ के आसपास बनती है, जिसका भारत के हिसाब से खर्च सिर्फ हजारों में ही है /
.मतलब साफ था की S Overseas के यहां पहुंचे लोग सच में दुखी थे तभी तो उन्होंने अपने बच्चे के वीज़ा लगने के बाद भी कंपनी के ऑफिस में हंगामा किया, जबकि ज्यादातर केसों में वीज़ा ना लगने और कंपनियों के धोखा देने के शिकार हुए लोग ही हंगामा करते हैं / जब कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर से मिलने की इच्छा इन लोगों ने जाहिर की तो कंपनी में काम करने वाले लोगों ने पहले तो इस संबंध में उनसे मिलवाने से साफ मना कर दिया, लेकिन जब बात बिगड़ने लगी तो उन्होंने अपने मैनेजिंग डायरेक्टर की पत्नी जोकि खुद भी ग्राहकों को डील करती हैं से बात करवा दी, लेकिन परिजनों द्वारा किये गए हंगामें को देखते हुए जब बात नहीं बनी तो कहीं जाकर कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर से सुबह से दोपहर हो जाने के बाद मिलवाया /
.अंत में यह मामला यह निकला की कंपनी ने माना की हमने जान बुझ कर ऐसा किया था क्योंकि जो डील हमारी फंड को लेकर आपसे हुई थी उसमें कुछ और पैसे आपको देने होंगे तब जाकर हम इंशोरेंस करवाएंगे, पहले तो कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर इस बात पर अड़े रहे की हमें 90 हजार और देना होगा, लेकिन जब बात कोर्ट, पुलिस और सरपंच तक पहुंच गई तो उन्होंने कहा कि चलो 30 हजार और दे देना बात को यहीं खत्म कर दो /
इस दौरान पीटीबी न्यूज़ से बात करते हुए और कैमरे के सामने ना आने की बात करते हुए छात्र के परिजनों ने बताया की हमसे कंपनी ने बहुत बड़ा धोखा किया है, हमसे GIC जिसे हम आम भाषा में फंड कहते हैं, के बदले भी लाखों रूपये ऐंठ लिए और इंशोरेंस के बदले भी लाखों, आखिर क्यों? यही नहीं इसमें फाइल चार्जिग अलग से, मेडिकल फीस अलग से, कॉलेज फीस तो लगनी ही थी /
.अब सोचने वाली बात यह है की मजबूर इंसान को यह इमीग्रेशन वाले आखिर क्यों उनके खून पसीने की कमाई पर लंबा हाथ मारकर आमिर बनने की कोशिश कर रहे हैं / आखरी कब इन लोगों के ऊपर जिला पुलिस, जिलाधीश अपना शिकंजा कसेंगे और कब ICCRC और अन्य लाइसेंस होने का दावा करने वाली ऐसी कंपनियां लाइसेंस के नाम पर लोगों को अपने जाल में फंसाने का काम जारी रखेंगे / ऐसी ही एक और मुद्दे को जल्द ही उजागर करने की पीटीबी न्यूज़ करेगा बेखौफ पहल,
.इस मामले में जब पीटीबी न्यूज़ ने S Overseas के मालिक से संपर्क करने की कोशिश की तो उन्होंने हमारे द्वारा कई बार फ़ोन करने के बाद भी हमारा फ़ोन नहीं उठाया /
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