PTB Big न्यूज़ अमृतसर : पंजाब के जिला अमृतसर के पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर का पंजाब सरकार द्वारा ट्रांसफर किए जाने और उन्हें नई पोस्टिंग ना दिए जाने को लेकर पंजाब में सियासी विवाद बढ़ गया है. पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री और बीजेपी नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने भुल्लर के तबादले के सवाल उठाए हैं. रवनीत बिट्टू ने इस पूरे मामले को लेकर आम आदमी पार्टी पर भी निशाना साधा है और आरोप लगाया कि दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और
.केंद्र सरकार को बदनाम करने के लिए आम आदमी पार्टी इस तरह से पेट्रोल बम फेंकवाने की साजिश रच रही थी, जिसका अमृतसर पुलिस कमिश्नर ने खुलासा कर दिया. इसी वजह से उनका ट्रांसफर किया गया है. रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा कि आम आदमी पार्टी की कोशिश ये थी कि दिल्ली के जंतर मंतर पर छात्रों पर पेट्रोल बम से हमला हो और उसके बाद यह नैरेटिव बनाया जाए कि
. .केंद्र सरकार के अधीन आने वाली दिल्ली पुलिस और दिल्ली की कानून-व्यवस्था के क्या हालात हैं. उन्होंने पूछा है कि क्या भुल्लर द्वारा जंतर-मंतर से जुड़ी कथित साजिश को लेकर किए गए खुलासों के बाद उनका तबादला किया गया है? रवनीत सिंह बिट्टू ने पंजाब सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि क्या भुल्लर का तबादला उस विवाद के बाद किया गया है, जिसमें उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर कथित
.आतंकी साजिश के मामले में गिरफ्तार आरोपियों को लेकर बयान दिया था. बिट्टू ने कहा कि तबादले का समय कई सवाल खड़े करता है और सरकार को इसकी वजह स्पष्ट करनी चाहिए. दरअसल, इस विवाद की शुरुआत 4 अगस्त को हुई थी, जब पंजाब पुलिस ने आईएसआई समर्थित दो कथित सीमा पार आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करने और चार नाबालिगों सहित 9 लोगों की गिरफ्तारी की घोषणा की थी.
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.पुलिस ने कहा था कि आरोपी कथित तौर पर पाकिस्तान स्थित संचालकों के इशारे पर स्थानीय युवाओं की भर्ती करने, अवैध हथियार प्राप्त करने और सार्वजनिक शांति भंग करने के उद्देश्य से गतिविधियों को अंजाम देने का काम कर रहे थे. प्रेस ब्रीफिंग के दौरान भुल्लर ने कहा था कि कथित मॉड्यूल में से एक दिल्ली के जंतर-मंतर गया था, वहां की रेकी की थी और
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पाकिस्तान स्थित उसके संचालकों ने उसे पेट्रोल बमों का इस्तेमाल करके शांति भंग करने का काम सौंपा था. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि आरोपी जंतर-मंतर पर हो रहे विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं थे. उनकी इन टिप्पणियों ने ही एक राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया, क्योंकि कई बीजेपी नेताओं ने विरोध स्थल पर कथित तौर पर राष्ट्रविरोधी तत्वों की मौजूदगी पर सवाल उठाए थे.






























