PTB News

Latest news
Asian Games 2026 में नीरू का लगा सटीक निशाना, भारत की झोली में डाला 5वां गोल्ड इनोसेंट हार्ट्स ग्रुप द्वारा श्री गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में 'बेगमपुरा डायलॉग्स-... 20वें एशियाई खेलों कें पदक विजेताओं को दी जाएगी 5.33 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशिः मुख्यमंत्री एलपीयू ने अपने छात्रों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, यूनिवर्सिटी ने अपने छात्र समुदाय की तारीफ़ ... शहीद भगत सिंह जी को श्रद्धांजलि देने खटकड़ कलां पहुंचे सेंट सोल्जर ग्रुप के विद्यार्थी, रायत बहरा इंटरनेशनल स्कूल होशियारपुर के छात्र महेश ने सीबीएसई नॉर्थ ज़ोन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में जीत... आर्य समाज (किला), विक्रमपुरा, जालंधर में वेद कथा के विशेष प्रोग्राम का समापन, सरकारी अस्पताल में जन्म लेने वाले नवजात को मिलेगी सोने की अंगूठी, सरकार ने शुरू की योजना LPU में पैदा हुई तनावपूर्ण माहौल के बाद DGP गौरव यादव का सख्त आदेश Chitkara University विवाद को लेकर महिला आयोग सख्त, गायब छात्राओं को लेकर मांगा जवाब

पंजाब के जाति उमरा गांव से लाहौर जाकर बस चुके शरीफ परिवार के शाहबाज बनें अब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री,

nawaz sharif family had migrated indian punjab jati umra village people pray for shabaz Punjab Pakistan PTB News

PTB Big न्यूज़ तरनतारन : गांव भारत के पंजाब का है लेकिन यहां के लोग यह दुआ कर रहे हैं कि शाहबाज शरीफ (Shahbaz Sharif) पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनें। पाकिस्तान में इमरान खान की सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद नए प्रधानमंत्री के चयन के लिए संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार के रूप में शहबाज शरीफ का नाम आया है। इससे शरीफ परिवार के पैतृक गांव जाति उमरा में ग्रामीणों में खुशी छा गई है। उनके पैतृक गांव में लोग उनके पाकिस्तान बनने की अरदास कर रहे हैं।

विधानसभा हलका बाबा बकाला में आता गांव जाति उमरा पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ व पाकिस्तानी पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री शहबाज शरीफ के पुरखों का है। गांव के सरपंच रछपाल सिंह, पूर्व सरपंच दिलबाग सिंह व जसपाल सिंह ने दैनिक जागरण को बताया कि रविवार को गांव के उस गुरुद्वारा साहिब में शरीफ परिवार की चढ़दी कला के लिए अरदास की गई, जो इस परिवार की पुरखों की हवेली होता था।

बकौल बुजुर्ग ज्ञान सिंह, मैं नवाज शरीफ से नहीं मिला, परंतु उनके परिवार की गांव के साथ लगाव से अच्छी तरह वाकिफ हूं। 1932 में यह परिवार लाहौर चला गया था। 1947 में देश के बंटवारे के दौरान दोनों देशों के बीच लकीर खींची गई, परंतु शरीफ परिवार पर जब भी कोई संकट आया तो इस गांव के गुरुद्वारा साहिब में परिवार की चढ़दी कला के लिए अरदास की गई।

गुरुद्वारा साहिब के ग्रंथी कुलदीप सिंह, ग्रामीण लक्खा सिंह, निरवैल सिंह, बचन सिंह व केवल सिंह ने बताया कि 1932 में शरीफ परिवार जब लाहौर गया तो वहां पर कारखाना लगाया। देश के बंटवारे से पहले उनके कारखाने में गांव के लोग काम करते थे।

शरीफ परिवार को अपने पैतृक गांव जाति उमरा से इतना प्यार है कि उन्होंने पाकिस्तान में लाहौर के पास बाकायदा जाति उमरा को 175 एकड़ में बसाया है। शरीफ परिवार ने लाहौर के पास अपना जो आशियाना बनाया है, उसे पैतृक गांव की याद में जाति उमरा नाम ही दिया है। यहां उनके बने आवास काे रायविंड पैलेस के नाम से जाना जाता है।