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उज्जैन में खड़े हनुमान देखने पहुंचे 4 दिन में 8 हजार श्रद्धालु

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PTB News “धार्मिक” : उज्जैन के सती गेट के पास स्थित खड़े हनुमान के दर्शन करने बीते चार दिन से 8 हजार लोग पहुंच चुके हैं। इनमें मध्य प्रदेश के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के श्रद्धालु भी शामिल हैं। असल में खड़े हनुमान मंदिर को हटाने से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। प्रतिमा के नहीं हटने की चमत्कारिक कहानियां भी सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही हैं। प्रतिमा को लेकर प्रशासन की ओर से सावधानी बरती जा रही है।

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करीब एक हफ्ते से मंदिर के आसपास का ज्यादातर हिस्सा तोड़ा जा चुका है, जबकि हनुमानजी की प्रतिमा फिलहाल टेंट में विराजमान है। भीड़ को देखते हुए मंदिर के आसपास बैरिकेडिंग कर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया है। वहीं प्रतिमा को हटाने के प्रयासों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच IIT इंदौर की टीम सोमवार को मंदिर पहुंची थी। टीम ने मंदिर में जांच की थी। अब टीम गुरुवार को एक बार फिर खड़े हनुमान मंदिर पहुंचकर जांच करेगी।

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सती गेट के आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि पिछले कई वर्षों में उन्होंने मंदिर में इतनी भीड़ नहीं देखी। अब लोग लंबी कतारों में लगकर दर्शन कर रहे हैं। प्रतिमा को विस्थापित किए जाने की चर्चा के बीच अलग-अलग राज्यों से श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं। नासिक से आए अनिल ने बताया कि उन्होंने इंस्टाग्राम पर खड़े हनुमान की रील देखी थी। इसके बाद वे दर्शन करने आए हैं और यहां से रील बनाकर ले जाएंगे। नागपुर से आए महेश टिचकुले ने कहा कि 

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वे दो दिन से सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों पर हनुमानजी से जुड़ी खबरें देख रहे थे। इसके बाद उन्होंने उज्जैन आने का फैसला किया। राजस्थान के अजमेर से आए सुशील खंडेलवाल ने बताया कि वे महाकाल दर्शन के लिए उज्जैन आए थे। घर पर रील देखते समय खड़े हनुमान मंदिर के बारे में पता चला तो यहां दर्शन करने पहुंच गए। करीब एक सप्ताह से सोशल मीडिया पर चल रही खबरों के बाद बुधवार को जिला प्रशासन ने प्रेस नोट जारी किया।

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इसमें कहा गया कि प्रशासन की ओर से अब तक हनुमानजी की प्रतिमा को हटाने का एक भी प्रयास नहीं किया गया है। प्रशासन ने कहा कि खड़े हनुमानजी की प्रतिमा से जुड़ा विषय उज्जैनवासियों और श्रद्धालुओं की आस्था से संबंधित है। श्रद्धालुओं की भावनाओं, प्रतिमा की सुरक्षा और उज्जैन की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को प्रशासन सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। प्रेस नोट में कहा गया कि सोशल मीडिया पर यह भ्रामक खबर प्रसारित की जा रही है कि

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प्रशासन द्वारा श्री खड़े हनुमानजी की प्रतिमा को विस्थापित करने के कई प्रयास किए जा चुके हैं। प्रशासन के मुताबिक अभी तक प्रतिमा को विस्थापित या हटाने संबंधी कोई प्रयास मशीन अथवा मानवीय तरीके से नहीं किया गया है। प्रशासन के प्रेस नोट के बाद कुछ भक्तों ने इसका विरोध किया। उनका कहना है कि प्रतिमा को हटाने के प्रयास से जुड़े वीडियो उनके पास मौजूद हैं और अधिकारी चाहें तो वे उन्हें दिखाने के लिए तैयार हैं। मंदिर से जुड़े शैलू यादव ने कहा कि

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प्रशासन को जनभावना का आदर करते हुए हनुमानजी को यहीं रहने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन कह रहा है कि प्रतिमा को हटाने का कोई प्रयास नहीं किया गया, तो वे इसके सबूत दिखाने को तैयार हैं। उन्होंने दावा किया कि नगर निगम अधिकारी हिमांशु तिवारी के सामने गड्ढा खोदा गया था। इसके बाद पुरातत्व विभाग की टीम भी आई थी। रात में कटर मशीन भी लाई गई थी। उनके मुताबिक इन सभी घटनाओं के वीडियो उनके पास मौजूद हैं।

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सोशल मीडिया पर खड़े हनुमान की रील वायरल होने और मंदिर में भक्तों की भीड़ बढ़ने के बाद बुधवार को कई संत भी मंदिर पहुंचे। कांग्रेस विधायक महेश परमार और विधायक दिनेश जैन बोस समेत कई कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता भी यहां पहुंचे। उन्होंने मंदिर में हनुमान चालीसा का पाठ किया और प्रतिमा को लेकर चल रही कार्रवाई का विरोध किया। वर्तमान में खड़े हनुमानजी की प्रतिमा का मुख दक्षिण दिशा की ओर है।

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प्रशासन ने टंकी चौराहे पर मंदिर के लिए जो स्थान तय किया है, वहां प्रतिमा स्थापित होने पर उनका मुख उत्तर दिशा की ओर हो जाएगा। श्रद्धालुओं का कहना है कि दिशा में यह बदलाव मंदिर की धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं को प्रभावित कर सकता है। प्रतिमा को तीन बार स्थानांतरित करने की कोशिश विफल होने के बाद अब भक्त इसे भगवान की इच्छा मान रहे हैं और मंदिर हटाने की कार्रवाई रोकने की मांग कर रहे हैं।