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पीठ दर्द और कमजोर पाचन से परेशान लोग करें रोजाना उष्ट्रासन का अभ्यास,

troubled by back pain and poor digestion-practice ustrasana daily

PTB News “हेल्थ” : मौसम में बदलाव के कारण कई तरह की बीमारियां जकड़ लेती हैं। ऐसे में योग और संतुलित आहार अपनाना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है। इसी कड़ी में ‘उष्ट्रासन’ एक ऐसा योगासन है, जिसके नियमित तौर पर करने से शरीर में कई तरह के बदलाव आएंगे। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने उष्ट्रासन को शरीर को हर तरह से लाभ पहुंचाने वाला योगासन बताया है।

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उनके अनुसार, इसके नियमित अभ्यास करने से न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है बल्कि मानसिक स्वास्थ्य में भी बदलाव आते हैं। यह योगासन आंखों की रोशनी बढ़ाने, पीठ और गर्दन के दर्द से राहत देने के साथ-साथ पेट की चर्बी कम करने और पाचन तंत्र को मजबूत करने में मददगार है। उष्ट्रासन रीढ़ को लचीला बनाता है और हृदय-श्वसन स्वास्थ्य को बेहतर करता है।

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उष्ट्रासन शरीर के कई हिस्सों को लाभ पहुंचाता है। यह रीढ़ को खींचता है, जिससे पीठ और गर्दन का दर्द कम होता है। इसके अलावा, यह फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है, जिससे श्वसन और हृदय स्वास्थ्य में सुधार होता है। यह तनाव और थकान को कम करने में भी सहायक है। उष्ट्रासन करने से पहले वार्म-अप कर लेना चाहिए। इसके लिए वज्रासन, मार्जरी आसन,

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हल्का पीछे झुकाव, कंधों और कमर की स्ट्रेचिंग की जाती है। इससे रीढ़ की हड्डी लचीली बनती है, छाती खुलती है और शरीर उष्ट्रासन के लिए तैयार हो जाता है। इसको करना बेहद आसान है। उष्ट्रासन करने के लिए सबसे पहले योग मैट पर वज्रासन की मुद्रा में बैठें या घुटनों पर खड़े हों, पैरों को कूल्हों की चौड़ाई के बराबर रखें। धीरे-धीरे पीछे की ओर झुकें और अपने हाथों से एड़ियों को पकड़ें।

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सिर को पीछे की ओर झुकाएं और छाती को ऊपर की ओर लाएं। अब अपनी क्षमता अनुसार, कुछ समय तक इस स्थिति में बैठे रहें और धीरे-धीरे शुरुआती स्थिति में वापस आएं और विश्राम करें। इस आसन को करने से लाभ मिल सकते हैं। अगर आप शरीर में किसी भी तरह की गंभीर चोट या फिर बीमारी से जूझ रहे हैं, तो योगासन को करने से बचें या फिर किसी योग विशेषज्ञ की सलाह पर ही करें।

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