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पंजाब के मुख्यमंत्री ने लिखा प्रधानमंत्री को पत्र, कहा किसानों और कृषि श्रमिकों के कर्ज़े की मुकम्मल माफी के लिए तलाशे जाएं रास्ते,

lets mutually evolve mechanism for complete waiver of farmers and farm labourers cm punjab charanjit singh channi writes to pm modi india

PTB Big Political चंडीगढ़ : पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को किसानों और कृषि मज़दूरों के कर्ज़े को मुकम्मल तौर पर माफ करने के प्रस्ताव को स्वीकार करने की अपील की है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार, भारत सरकार के साथ मिल कर अपने हिस्से का बनता बोझ सहन करने के लिए तैयार है।

प्रधानमंत्री को लिखे बहुत ही भावुक पत्र में मुख्यमंत्री चन्नी ने कहा कि इस मसले के साथ निपटने और हमारे किसानों और कृषि श्रमिकों का कर्ज़ हमेशा के लिए ख़त्म करने के लिए एक उचित अनुपात वाली केंद्र और राज्य की सांझा योजना समयबद्ध और ज़रूरतों के मुताबिक बनायी जानी चाहिए। मुख्यमंत्री चन्नी ने कहा, ’’राज्य सरकार के पहले से दबाव के नीचे राजस्व के बावजूद कोई भी बलिदान इतना बड़ी नहीं, जितना बड़ा कि किसान भाईचारे के प्रति हमारी नैतिक ज़िम्मेदारी है।’’

प्रधानमंत्री से अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज वह दिन है, आज ही वह मौका है और आओ, आज ही हम एक नयी शुरुआत करें और देश में और विशेषतः पंजाब में कृषि का समूचा ढांचा संवारने की दिशा में काम करें। हम एक हिस्सेदार होने के नाते सभी अन्य सम्बन्धित भाईवालों की तरफ से आपसी सहमति से बनाऐ किसी भी नये प्रबंध के प्रति समर्पित होने के लिए वचनबद्ध हैं।

मुख्यमंत्री चन्नी ने कहा कि मैं जानता हूँ कि कुछ लोग वित्तीय दस्तावेज़ हाथों में लेकर सवाल करेंगे परन्तु श्रीमान जी, आप यह याद रखना कि कल न तो मैं और न ही आपने यहाँ होना है, हमारे फ़ैसले का निचोड़ तब निकाला जायेगा। यह लेखा-जोखा ज़रूर होगा। चाहे हम अपना-आप विचारें या हमारे अंतर्मन से यह आवाज़ आए या फिर यह आवाज़ तब आए जब हमारी आने वाली पीढ़ियां यह कठिन सवाल खड़ा करेंगी कि हमें भूख मिटाने के लिए रोज़ी देने वालों और आज़ाद भारत का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक संघर्ष लड़ने वालों के लिए हम क्या कर रहे थे। इतिहास हमें हमारे कर्मों से जाने और जब भी हिसाब-किताब के पल आएं तो हम भय से कांपे न बल्कि लहरों के उल्ट छाती तान कर खड़े हों।

मोदी की तरफ से तीनों ही कृषि कानून रद्द कर देने के ऐलान से किसान और सरकार कुछ बड़े लम्बित मसले हल करने के एक कदम नज़दीक आ गए हैं जो इन कानूनों की वापसी की माँग से यह लम्बित मुद्दे भी मुख्य तौर पर उभरे हैं। इनमें से प्रमुख तौर पर कृषि कर्ज़ का मुद्दा है। वहीं मुख्यमंत्री चन्नी ने आगे कहा कि हाल ही में किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने अपनी माँगों को लेकर चण्डीगढ़ में मेरे साथ मुलाकात की थी और इनमें से एक बड़ा मसला जो मेरे स्तर पर लटका हुआ रह गया, वह कृषि कर्ज़े के हल का था। हालाँकि, भारत सरकार के बदले रुख के बाद उम्मीद की किरण जागी है।

मुख्यमंत्री चन्नी ने आगे कहा कि यह पंजाब के किसान ही हैं जिन्होंने देश की खाद्य सुरक्षा को यकीनी बनाने की चुनौती को प्रसन्नता से कबूला और हरित क्रांति के अग्रणी बने। अनाज से लबालब गोदाम किसानों की अथक मेहनत के साक्ष्य हैं। पी.एल. 480 (जहाज़ से मुँह तक) के कमी वाले दिन से लेकर देश के नागरिकों के लिए भोजन के अधिकार तक का लम्बा सफ़र हमारे किसानों और कृषि श्रमिकों की मेहनत का प्रत्यक्ष प्रमाण है। हालाँकि, खाद्य सुरक्षा को यकीनी बनाने के लिए हमारे स्वाभिमान वाले किसानों ने अपने आपको कर्ज़े के बोझ के नीचे दबा लिया।

मुख्यमंत्री चन्नी ने भावुक होते कहा, ‘‘जब किसान कृषि करते हैं तो उस समय उनके बहादुर पुत्र अपनी जानें न्योछावर करके देश की संवेदनशील सरहदों की रक्षा कर रहे होते हैं। आज भारत मिट्टी के सच्चे सपूतों का दिल से ऋणी है। मेरा यह दृढ़ विचार है कि यह महान देश जिसकी किसानों ने दशकों तक सेवा की, का अब नैतिक फ़र्ज़ बनता है कि वह इनका बोझ सहन करे और कृषि कर्ज़े को मुकम्मल तौर पर निपटारा कर दें। किसी भी बैंकिंग या ग़ैर-बैंकिंग संस्था को कृषि कर्ज़े की वसूली के लिए हमारे किसानों या कृषि श्रमिकों का दर नहीं खटखटाना चाहिए क्योंकि यह कर्ज़े ही किसानों और कृषि श्रमिकों की आत्म-हत्याओं का मूल कारण हैं और इसी कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी दबाव में है।