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पुलिस सिपाही परीक्षा क्लेयर कर बना तहसीलदार, परिजनों में ख़ुशी की लहर,

Jeevan Lal from Mandi district clears HAS exam, becomes Tehsildar

PTB Big न्यूज़ मंडी : कहते हैं कि अगर कोई ठान ले तो वह किसी भी मुकाम तक पहुंच सकता है कोई भी पद छोटा बड़ा नहीं होता। इस ही कुछ कर दिखाया है हिमाचल प्रदेश के ज़िला मंडी से संबंध रखने वाले जीवन लाल ने जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से HAS की परीक्षा उत्तीर्ण कर तहसीलदार पद को हासिल किया है।आपको यह भी बता दें कि जीवन लाल हिमाचल पुलिस के कांस्टेबल से तहसीलदार पर अपनी क़ाबलियत से पहुंचे हैं।

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मिली जानकारी के अनुसार हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला के कोटली गांव निवासी पुलिस कांस्टेबल जीवन लाल ने हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवाओं की परीक्षा में 23वां रैंक हासिल कर तहसीलदार बनने का गौरव प्राप्त किया है। इस उपलब्धि के साथ जीवन लाल ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो ड्यूटी की जिम्मेदारियों के बीच भी बड़े सपने साकार किए जा सकते हैं। जीवनलाल वर्तमान में विजिलेंस मुख्यालय शिमला में प्रोटेक्शन गार्ड के रूप में तैनात हैं।

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उन्होंने वर्ष 2022 में हिमाचल प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल के पद पर नियुक्ति पाई थी। इसके बाद उन्होंने नौकरी के साथ-साथ अपनी पढ़ाई जारी रखी और महज़ 26 वर्ष की उम्र में, पहले ही प्रयास में HPAS परीक्षा उत्तीर्ण कर तहसीलदार बनने का मुकाम हासिल किया। जीवन लाल के पिता बिरी सिंह पेशे से किसान हैं, जबकि माता विमला देवी एक कुशल गृहिणी हैं। साधारण किसान परिवार से निकलकर प्रशासनिक सेवा तक पहुंचने का उनका यह सफर

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युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है। जीवन लाल ने गांव के स्कूल से अपनी प्रारंभिक पढ़ाई पूरी की। इसके बाद पीजी कॉलेज मंडी से स्नातक की डिग्री शैल की और धर्मशाला कॉलेज से केमिस्ट्री विषय में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की है। 23 साल की उम्र में वह हिमाचल पुलिस में भर्ती हो गए थे। करीब 3 वर्षों तक पुलिस सेवा में कार्य करने के बाद अब वे तहसीलदार के रूप में जनता की सेवा करेंगे। अपनी सफलता पर प्रतिक्रिया देते हुए जीवन लाल ने कहा कि

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उनका अंतिम लक्ष्य अभी हासिल नहीं हुआ है और वे आगे भी उच्च प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी जारी रखेंगे। जीवन लाल की इस सफलता पर खुद हिमाचल प्रदेश पुलिस महानिदेशक (DGP) Ashok Tiwari IAS ने भी उन्हें इस कामयाबी के लिए बधाई दी है। पुलिस विभाग ने इसे अपनी सशक्त और प्रोत्साहन देने वाली कार्यसंस्कृति का परिणाम बताया है, जहां कर्तव्य निर्वहन के साथ-साथ कर्मियों को व्यक्तिगत विकास के लिए भी प्रेरित किया जाता है।