PTB News

Latest news
जालंधर में दिनदिहाड़े फिर चली गोलियां, पुलिस जांच में जुटी Iran-America में समझौते की खबरों से चढ़ी शेयर मार्केट, निवेशकों ने ली राहत की सांस एचएमवी की छात्राओं ने यूनिवर्सिटी में सबसे ज़्यादा एसजीपीए हासिल किए, ਲਾਇਲਪੁਰ ਖ਼ਾਲਸਾ ਕਾਲਜ ਦੇ ਐਮ.ਐਸ.ਸੀ. ਆਈ.ਟੀ. ਸਮੈਸਟਰ ਤੀਜਾ ਦਾ ਨਤੀਜਾ ਰਿਹਾ ਸ਼ਾਨਦਾਰ, अब सरकार ने शुरू की बेसहारा बच्चों के लिए Bal Sangopan Yojana, मिलेंगे 2500 रूपये महीना अमेरिकी हमले में मृत आदित्य के शव का परिवार व गांव वाले कर रहे इंतजार, फूट-फूट कर मीडिया के सामने रो... निशानेबाजी के 'गोल्डन बॉय' जसपाल राणा ने दुनिया को कहा अलविदा, खेल जगत में शोक गोल्डन टेंपल परिसर में बेअदबी की युवक ने की कोशिश, SGPC अध्यक्ष ने लिया संज्ञान पेपर लीक और परीक्षा विवाद पर कॉकरोच पर ने किया बड़े आंदोलन का ऐलान Iran US War, Oman के निकट अमेरिकी मिसाइल हमले में हिमाचल प्रदेश के युवक की हुई मौत, क्षेत्र में शोक ...

पंजाब, हाईकोर्ट ने एक बार फिर पंजाब सरकार को नोटिस भेज मांगा जवाब, जाने किस लिए और क्यों?

issued-notice-to-punjab-government-and-sought-reply-punjab-and-haryana-high-court-hearing-to-loudspeaker-case

.

.

PTB Big न्यूज़ चंडीगढ़ : पंजाब में धार्मिक स्थानों पर लगने वाले लाउड स्पीकर से जुड़ा मामला पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में पहुंचा है। इसमें दलील दी गई है कि ऐसे स्पीकर चलने से वहां के रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोगों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में इस संबंधी उचित कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि लोगों को दिक्कत न उठानी पड़े। हाई कोर्ट ने इस मामले में पंजाब सरकार को नोटिस कर जवाब मांगा गया है।

.

.

साथ ही कहा कि 2019 में जारी इस संबंधी आदेश को लागू करने के लिए क्या कदम उठाए गए । इस मामले की अगली सुनवाई 24 अप्रैल तय की है। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में इस संबंधी पहुंची याचिका में कहा गया है कि रिहायशी क्षेत्रों में स्थित धार्मिक स्थानों पर बहुत तेज आवाज से लाउडस्पीकर चलते हैं। इससे लोगों को दिक्कत उठानी पड़ती है। लोगों के रोजाना के कार्य प्रभावित होते हैं।

.

.

वहीं, ऐसे में मामलों में उचित कार्रवाई तक नहीं होती है। ऐसे में इस मामले की सुनवाई गंभीर है। धार्मिक स्थलों के नजदीक रहने वाले लोगों की अकसर शिकायत रहती है कि लाउडस्पीकर के चलने से दिक्कत आती है। कई बार इन स्थानों के प्रमुखों को समझाने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होती है। जबकि इससे मानसिक परेशानी से गुजरना पड़ता है। इससे कई बार तो युवाओं को एग्जाम आदि देने में भी दिक्कत आती है।

.

.

.