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नाबालिग ने अगर चलाई कार तो माता-पिता जाएंगे जेल? सजा के साथ लगेगा भारी जुर्माना, जाने पूरा सच

Can parents go to jail if a minor is caught driving? Know the truth about the 3-year jail provision, ₹25,000 fine and RC cancellation under Indian traffic laws

PTB Big न्यूज़ नई दिल्ली : भारत में बढ़ते सड़क हादसों के पीछे एक चौंकाने वाली सच्चाई सामने आ रही है बिना लाइसेंस और ट्रेनिंग के गाड़ी चलाने वाले नाबालिग। कानून साफ कहता है कि 18 साल से कम उम्र का व्यक्ति ड्राइविंग के लिए पात्र नहीं है। ऐसे में अगर कोई नाबालिग कार चलाते पकड़ा जाता है या उससे एक्सीडेंट हो जाता है, तो जिम्मेदारी सीधे माता-पिता या वाहन मालिक पर आती है।

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मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 199A के तहत इसे अभिभावकों की लापरवाही माना जाता है। अगर आपका नाबालिग बच्चा गाड़ी चलाते हुए हादसे में शामिल होता है, तो कानून अभिभावक या वाहन मालिक को दोषी मानता है। सजा के तौर पर 3 साल तक की जेल और ₹25,000 का जुर्माना लगाया जा सकता है। कानून की धारणा यह है कि आपकी अनुमति के बिना बच्चा वाहन तक पहुंच ही नहीं सकता।

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हालांकि, यदि आप यह साबित कर दें कि बच्चे ने चोरी-छिपे चाबी ली थी और आपको जानकारी नहीं थी, तो कुछ राहत संभव है लेकिन ऐसे मामलों में राहत मिलना बेहद मुश्किल होता है। सजा केवल जेल और जुर्माने तक सीमित नहीं रहती। जिस वाहन से हादसा हुआ है, उसका रजिस्ट्रेशन (RC) 12 महीने के लिए निलंबित या रद्द किया जा सकता है। यानी पूरी एक साल तक वह गाड़ी सड़क पर नहीं उतर सकेगी।

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सबसे बड़ी मार आर्थिक होती है बीमा कंपनियां नाबालिग द्वारा किए गए एक्सीडेंट का क्लेम अक्सर खारिज कर देती हैं। ऐसे में वाहन का नुकसान, इलाज का खर्च और मुआवजा सब मालिक को अपनी जेब से भरना पड़ सकता है। इसका असर नाबालिग के भविष्य पर भी गंभीर पड़ता है। अगर कोई नाबालिग गंभीर दुर्घटना या अपराध में शामिल पाया जाता है,

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तो उसे 25 साल की उम्र तक ड्राइविंग लाइसेंस या लर्नर लाइसेंस पाने से वंचित किया जा सकता है। जहां आमतौर पर 18 साल में लाइसेंस मिल जाता है, वहीं ऐसे मामलों में 7 साल तक कानूनी रूप से गाड़ी चलाने का अधिकार खत्म हो सकता है। आमतौर पर ऐसे मामले जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) में सुनवाई के लिए जाते हैं, जहां सुधारात्मक कदम जैसे काउंसलिंग या सामुदायिक सेवा दिए जाते हैं।

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लेकिन अगर अपराध गंभीर है, जैसे नशे में ड्राइविंग या किसी की मौत, और आरोपी की उम्र 16 से 18 साल के बीच है, तो बोर्ड उसे ‘एडल्ट’ मान सकता है। ऐसे मामलों में सामान्य जेल और गैर-इरादतन हत्या जैसी कड़ी धाराएं भी लग सकती हैं। नाबालिग को वाहन देना सिर्फ नियम तोड़ना नहीं, बल्कि पूरे परिवार के भविष्य को खतरे में डालना है। एक छोटी सी लापरवाही 3 साल की जेल, भारी जुर्माना और सामाजिक बदनामी में बदल सकती है।