PTB News

Latest news
पंजाब : 450 करोड़ की पकड़ी ड्रग्स, 64 किलो हेरोइन के साथ 2 तस्कर किये गिरफ्तार, DGP गौरव यादव, डिप्टी कमिश्नर ने अधिकारियों सहित साइकिलोथान में लिया हिस्सा, जिला वासियों से की नशे के खिलाफ एकजुट ... कैबिनेट ने दी 1000 पुलिस कॉस्टेबल भर्ती को मंजूरी, देश की सबसे बड़ी कंपनी TCS के कर्मचार‍ियों पर लगे गंभीर इल्जाम, दर्ज हुई 9 FIR, जाने पूरा मामला, पी सी एम एस डी कॉलेज फॉर विमेन, जालंधर की छात्रा ने GNDU में पहला स्थान हासिल किया, ਲਾਇਲਪੁਰ ਖ਼ਾਲਸਾ ਕਾਲਜ ਵਿੱਚ ਅੰਬੇਡਕਰ ਜੈਯੰਤੀ ਮੌਕੇ ਵਿਸ਼ੇਸ ਲੈਕਚਰ, सेंट सोल्जर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स की छात्रा सिमरनप्रीत कौर ने ASMITA अंडर-13 नेशनल फुटबॉल लीग सेमी... पंजाब में स्कूल टीचर पर फेंका एड्सग्रस्त भांजे ने तेजाब, चेहरा झुलसा, 2 बच्चे भी आए चपेट में, जालंधर के Swami Sant Dass Public School में छात्रों में हुई खूनी झड़प, तेजधार हथियारों से किया हमला,... NSA हटने के बावजूद! हाईकोर्ट ने दिया जेल में बंद सांसद अमृतपाल को लेकर बड़ा आदेश

आखिर क्या? सिख जत्थों को पाकिस्तान के धार्मिक स्थलों पर जाने से रोकना सही,

what-exactly-is-it-right-to-stop-sikh-groups-from-visiting-religious-sites-in-pakistan

PTB न्यूज़ डेस्क : केंद्र सरकार ने गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के समय सिख जत्थों को पाकिस्तान जाने की इजाज़त नहीं दी। इस फ़ैसले पर राजनीति शुरू हो गई, लेकिन अगर इतिहास और आज की सुरक्षा स्थिति देखी जाए तो यह फैसला न नया है और न ही गलत। इसका मुख्य कारण श्रद्धालुओं की सुरक्षा है।

.

.

इतिहास की रुकावटें:–

1947 के बँटवारे और दंगों के बाद ननकाना साहिब, करतारपुर जैसे कई पवित्र गुरुद्वारे पाकिस्तान में रह गए।

लंबे समय तक सीमा बंद रही और सिख केवल दूर से ही अरदास कर पाते थे।

1965 की जंग के बाद यात्राएँ रुक गईं।

2019 में अटारी पर 150 श्रद्धालुओं को सुरक्षा कारणों से रोका गया।

.

.

2020 से 2021 तक कोविड के कारण करतारपुर लांघा बंद रहा।

मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के बाद जत्थों को वापस लौटना पड़ा।

जून 2025 में गुरु अर्जन देव जी की शहादत पर जाने वाला जत्था भी रोक दिया गया।

यानी जब भी सुरक्षा खतरे में आई, यात्राएँ रोक दी गईं।

.

पाकिस्तान का रवैया:–

पाकिस्तान बाहर से दिखाता है कि वह सिख धरोहर का सम्मान करता है, लेकिन सच्चाई यह है कि वहाँ अल्पसंख्यकों के साथ बुरा बर्ताव होता है। गुरुद्वारे और मंदिर तोड़े गए, ज़बरदस्ती धर्म परिवर्तन करवाए गए। वहाँ जाने वाले जत्थों को कई बार खालिस्तान से जुड़ा प्रचार सुनाया जाता है।

आज की स्थिति:–

पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद माहौल तनावपूर्ण है। ऐसे समय में जत्थों को पाकिस्तान भेजना बहुत बड़ा जोखिम है। कुछ लोग इसे क्रिकेट से तुलना करते हैं, लेकिन क्रिकेट खिलाड़ी सरकारी सुरक्षा में जाते हैं, जबकि यात्री खुले और असुरक्षित रहते हैं।

.

.

निष्कर्ष:–

सिख हमेशा देश के साथ खड़े रहे हैं और जानते हैं कि सरकार का पहला कर्तव्य नागरिकों की सुरक्षा है। बँटवारे, जंग और आतंक ने पहले भी यात्राएँ रोकी थीं। आज की रोक भी उसी तरह है। यह धर्म विरोधी नहीं, बल्कि सुरक्षा के लिए ज़रूरी कदम है। गुरुद्वारे पवित्र हैं, लेकिन नागरिकों की जान और देश की एकता सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

Latest News