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एचएमवी में तीन दिवसीय एफडीपी का समापन : ज्ञान और मूल्यों का संगम

A Confluence of Knowledge and Human Values: Three-Day FDP Concludes at

PTB News “शिक्षा” : हंसराज महिला महाविद्यालय, जालंधर में तीन दिवसीय ‘सार्वभौमिक मानव मूल्य’ विषय पर आयोजित फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का तृतीय दिवस एवम समापन समारोह अत्यंत ज्ञानवर्धक एवम गरिमामय रहा। यह कार्यक्रम प्राचार्या डॉ. एकता खोसला के मार्गदर्शन में तथा ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (्रढ्ढष्टञ्जश्व) के अनुमोदन से सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। इस शुभावसर पर मुख्यातिथि स्वरूप डॉ. सतीश शर्मा (प्रख्यात चिकित्सक एवं समाजसेवी) ने अपने संबोधन में सभी गणमान्य सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया एवं कहा कि इस मंच पर आकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है, जहाँ मानव मूल्यों पर सार्थक चर्चा हो रही है।

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उन्होंने बताया कि सच्चा स्वास्थ्य केवल शरीर का नहीं, बल्कि मन और संबंधों का भी होता है। शिक्षा में मूल्य, संवेदनशीलता और सही समझ का समावेश आवश्यक है। उन्होंने सभी को अपने विचार, व्यवहार और संबंधों में सामंजस्य लाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति का सबसे पहले इंसान बनना जरूरी है। दान, तप, ज्ञान, करूणा विहीन मनुष्य पशु तुल्य है। स्वयं के निर्णायक स्वयं बने एवं ऊंचता प्राप्त करने के लिए समय को समर्पित करना अति आवश्यक है।

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महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. एकता खोसला ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, संवेदनशीलता एवं जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है। उन्होंने इस प्रकार के कार्यक्रमों को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि ऐसे प्रयास शिक्षकों को एक नई दिशा देते हैं, जिससे वे विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने विचारों में सकारात्मकता लाने का संदेश दिया जिससे न केवल समाज बल्कि सम्पूर्ण देश विकास के पथ पर अग्रसर हो।

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कार्यक्रम के तीसरे दिन के सत्र में मुख्य वक्ता श्री जतिंदर नरूला ने मानवीय जीवन की आंतरिक प्रक्रियाओं—जैसे इच्छा , विचार, अपेक्षा , कल्पना, व्यवहार , कार्य , संवेदना, उद्देश्य , कार्यक्रम, क्षमता और दक्षता -पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि ये सभी तत्व मानव के निर्णय और जीवन शैली को प्रभावित करते हैं तथा इनका सही समझ होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से यह स्पष्ट किया कि इच्छाएँ और विचार हमारी दिशा तय करते हैं, जबकि अपेक्षाएँ और कल्पनाएँ हमारे व्यवहार को प्रभावित करती हैं।

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यदि इन सभी में संतुलन और स्पष्टता हो, तो व्यक्ति अपने कार्य को सही दिशा में कर सकता है और जीवन में संतुष्टि प्राप्त कर सकता है। उन्होंने बताया कि सही उद्देश्य के साथ बना कार्यक्रम ही व्यक्ति की क्षमता और दक्षता को विकसित करता है। इसके साथ ही उन्होंने संबंधों में भावनाओं की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विश्वास, सम्मान, स्नेह और सहयोग जैसे भाव मजबूत और स्वस्थ संबंधों की नींव होते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रेरित किया कि वे आत्मनिरीक्षण के माध्यम से अपनी इच्छाओं, विचारों और व्यवहार को समझें तथा उन्हें सकारात्मक दिशा में विकसित करें, जिससे व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में समरसता स्थापित की जा सके।

मुख्य वक्ता श्री जतिंदर नरूला ने तीनों दिनों की गतिविधियों का सार प्रस्तुत करते हुए मानव मूल्यों, सही समझ, संबंधों की समृद्धि तथा समग्र विकास के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों को शिक्षा प्रणाली में इन मूल्यों को अपनाने और आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। विभिन्न महाविद्यालयों से आए प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए। सेंट सोल्जर कॉलेज से सुश्री सीमा, एनआईटी से डॉ. एनी, डेवियट कॉलेज से डॉ. भूपिंदर, पीटीयू से श्री वकार तथा एचएमवी से सुश्री प्रोतिमा ने तीन दिवसीय एफडीपी के प्रति अपने अनुभव सांझा किए और एफडीपी को अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायक बताया।

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उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला ने उनके दृष्टिकोण में सकारात्मक परिवर्तन लाया है और वे अपने शिक्षण कार्य में इन मूल्यों को शामिल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. रमनीता शारदा ने सभी अतिथियों, संसाधन व्यक्तियों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि प्रतिभागी यहां से प्राप्त ज्ञान को अपने-अपने संस्थानों में प्रभावी रूप से लागू करेंगे।

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समापन के समय प्राचार्या डॉ. एकता खोसला द्वारा मुख्यातिथि डॉ. सतीश कुमार को ओम ध्वज एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। मुख्य वक्ता जतिंदर नरूला एवं रजनीत कौर को ग्रीन प्लांटर एवं स्मृति चिन्ह से प्रदान किया गया। अंत में सह-समन्वयक श्री सुमित शर्मा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए सभी के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया और कार्यक्रम के सफल आयोजन में योगदान देने वाले प्रत्येक व्यक्ति की सराहना की। यह तीन दिवसीय कार्यक्रम प्रतिभागियों के लिए एक समृद्ध अनुभव साबित हुआ, जिसने उन्हें व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक जीवन में नई दिशा प्रदान की।

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