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बदलाव शेयर बाजार में, प्री-ओपनिंग सेशन के नियम में, ट्रेड्स पर क्या और कैसे होगा असर?

NSE Updates Stock Pre-Open Auction Rules

PTB Business न्यूज़ मुंबई : भारतीय शेयर बाजार में आज से प्री-ओपन ऑक्शन सेशन के नियमों में बड़ा बदलाव लागू हो गया है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) द्वारा शुरू किए गए इस नए सिस्टम का मुख्य उद्देश्य शुरुआती कीमतों के निर्धारण (प्राइस डिस्कवरी) को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है। इसके साथ ही, अंतिम क्षणों में होने वाले भारी उतार-चढ़ाव को भी कम किया जा सकेगा।

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यह बदलाव उन सभी निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए बेहद महत्वपूर्ण है जो बाजार खुलने के तुरंत बाद बड़ी चाल का फायदा उठाना चाहते हैं। एसबीआई सिक्योरिटीज के टेक्निकल एंड डेरिवेटिव्स रिसर्च हेड सुदीप शाह के अनुसार, “संशोधित प्री-ओपन सेशन का मुख्य लक्ष्य प्राइस डिस्कवरी को अधिक संरचित और कुशल बनाना है, साथ ही आखिरी मिनट में होने वाली मार्केट-ऑर्डर गतिविधियों के प्रभाव को कम करना है।

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यह नया नियम इक्विटी कैश मार्केट के सभी शेयरों (SME, InvITs/REITs और डेरिवेटिव्स सहित) पर लागू होगा। प्री-ओपन का कुल समय पहले की तरह सुबह 09:00 से 09:15 बजे तक ही रहेगा, लेकिन इसके भीतर ऑर्डर डालने, संशोधन और मैचिंग की समय-सीमा में बदलाव किया गया है।

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इस 15 मिनट के समय को चार अलग-अलग स्लॉट में बांटा गया है:–

पहले यह 8 मिनट का था। अब इस 5 मिनट में निवेशक लिमिट या मार्केट ऑर्डर डाल, संशोधित या कैंसिल कर सकते हैं।
इसमें केवल लिमिट ऑर्डर ही डाले या बदले जा सकेंगे। मार्केट ऑर्डर में बदलाव की अनुमति नहीं होगी। यह स्लॉट आखिरी दो मिनट में रैंडमली बंद हो सकता है।

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इस 2 मिनट में ओपनिंग प्राइस तय होगी। सबसे पहले मार्केट ऑर्डर्स को टाइम प्रायोरिटी पर मैच किया जाएगा, फिर बाकी मार्केट ऑर्डर्स को लिमिट ऑर्डर्स के साथ और अंत में बाकी लिमिट ऑर्डर्स को आपस में प्राइस-टाइम प्रायोरिटी पर मैच किया जाएगा। इस बीच कोई बदलाव नहीं होगा।
यह पहले की तरह सामान्य ट्रेडिंग में सुचारू रूप से जाने का बफर समय है।

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इस फैसले से बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी। एसबीआई सिक्योरिटीज के सुदीप शाह का कहना है कि अब ट्रेडर्स के लिए सुबह के पहले 5 मिनट बेहद अहम हो जाएंगे, विशेष रूप से तब जब रातभर में कोई बड़ी खबर आई हो या बाजार बड़े गैप के साथ खुलने जा रहा हो। वहीं एचडीएफसी सिक्योरिटीज के सीनियर डेरिवेटिव एंड टेक्निकल एनालिस्ट नंदिश शाह के अनुसार, नए नियम का पूरा फोकस ऑर्डर एंट्री टाइमिंग में बदलाव और टाइम-प्राइस प्रायोरिटी के आधार पर मैचिंग सुनिश्चित करने पर है।

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ओपनिंग प्राइस का निर्धारण मांग और आपूर्ति के सिद्धांत (इक्विलिब्रियम प्राइस) के आधार पर होगा। यह वह कीमत होती है जिस पर सबसे अधिक वॉल्यूम एग्जीक्यूट हो सकता है। यदि एक से अधिक कीमतें इस मानदंड पर खरी उतरती हैं, तो न्यूनतम ऑर्डर असंतुलन (मिनिमम ऑर्डर इमबैलेंस) वाली कीमत को चुना जाएगा। यदि फिर भी स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तो पिछले दिन के क्लोजिंग प्राइस के सबसे करीब वाली कीमत को ओपनिंग प्राइस माना जाएगा।