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लालू परिवार को कोर्ट से मिला बड़ा झटका…लैंड फॉर जॉब केस से जुड़ा है मामला,

Court proceedings in the land-for-jobs case

PTB Big News नई दिल्ली : लैंड फॉर जॉब केस में लालू परिवार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कोर्ट ने लालू परिवार पर आरोप तय किए गए हैं। 40 लोगों पर आरोप तय हुए हैं। इन लोगों पर अब मुकदमा चलेगा। कोर्ट ने 52 लोगों को बरी किया गया है। सुनवाई को लेकर आज शुक्रवार को लालू यादव की बड़ी बेटी मीसा भारती और बेटे तेजप्रताप दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट पहुंचे। यह मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज किया गया है।

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कोर्ट ने लालू यादव पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं, साथ ही IPC के तहत अन्य अपराधों का भी आरोप है। उनके परिवार के सदस्यों पर धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का आरोप लगाया गया है। कोर्ट ने सबूत के आधार पर ये स्वीकार कर लिया है कि लालू यादव के ख़िलाफ लगाए गए आरोप सही हैं। इसके आधार पर अब उनके ख़िलाफ इस केस का ट्रायल चलेगा। ट्रायल में बहस होगी इसके बाद इस पर अंतिम फैसला सुनाया जाएगा।

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राजद सुप्रीमो लालू यादव लोअर कोर्ट के फैसले के खिलाफ हायर कोर्ट में अपील कर सकते हैं। पिछली सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत में एक सत्यापन रिपोर्ट पेश की, जिसमें बताया गया कि चार्जशीट में नामजद 103 आरोपियों में से पांच की मौत हो चुकी है। जांच एजेंसी ने लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके बेटे और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव समेत अन्य लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है।

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CBI का कहना है कि ‘यह पूरी साजिश 2004 से 2009 के बीच रची गई जब लालू प्रसाद यादव देश के रेल मंत्री थे। जांच एजेंसी ने कहा कि इस दौरान लगभग सभी मामलों में नौकरी देने से पहले ही जमीनें ट्रांसफर की गईं और अधिकांश में गिफ्ट डीड तैयार कर ली गई थी। CBI ने आरोप पत्र में यह भी दावा किया है कि ‘जब लालू यादव रेल मंत्री थे, तब उनके करीबी भोला यादव ने गांव में जाकर कहा था कि अपने परिजनों को नौकरी दिलाने के एवज में

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अपनी-अपनी जमीन लालू परिवार के नाम कर दीजिए। लालू परिवार के नाम जमीन लिखने वाले सभी आरोपियों ने दावा किया है कि उन्हें लालू परिवार से नकद में भुगतान किया गया था। सीबीआई ने इस मामले में सिर्फ लालू और उनके बेटों को ही नहीं, बल्कि उनकी बेटियों को भी आरोपी बनाया है। खासकर सांसद मीसा भारती और हेमा यादव के खिलाफ भी चार्जशीट में आरोप दर्ज हैं कि उन्हें भी नाम मात्र की कीमत पर ज़मीन ट्रांसफर की गई थी।

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