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खालिस्तान समर्थकों पर कसा शिकंजा, संघीय अदालतों ने 30 से ज्यादा अपीलों को किया गया खारिज, जाने मामला,

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PTB Big न्यूज़ चंडीगढ़ : कनाडा की संघीय अदालतों ने खालिस्तान समर्थक शरणार्थियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इस वर्ष अब तक खालिस्तान समर्थक गतिविधियों से जुड़े कम से कम 30 लोगों की शरण संबंधी अपीलों को खारिज किया गया है। इन मामलों में कई आवेदकों ने दावा किया कि उनकी सिख फार जस्टिस (एसएफजे) से संबद्धता या कथित खालिस्तान जनमत संग्रह में वोटर कार्ड रखने के कारण उन्हें भारत लौटने पर उत्पीड़न का डर है।

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संघीय अदालत ने इन तर्कों को पर्याप्त नहीं माना है। केवल चार आवेदकों की अपीलों को अदालत ने स्वीकार किया। ये अपीलें उन व्यक्तियों की ओर से की गई थीं जिन्हें या तो शरण देने से मना कर दिया गया था या जिन्हें देश से निष्कासन का सामना करना पड़ रहा था। अदालत के रिकार्ड से यह जानकारी सामने आई है। स्पष्ट है कि कनाडा की अदालतें अब खालिस्तान समर्थक गतिविधियों के आधार पर किए शरण दावों को गंभीरता से परख रही हैं

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और ठोस एवं विश्वसनीय साक्ष्यों पर ही राहत दे रही हैं। सबसे ताजा मामला प्रदीप सिंह बनाम पब्लिक सेफ्टी एंड इमरजेंसी प्रिपेयर्डनेस मंत्री से संबंधित था। प्रदीप सिंह ने अदालत में निष्कासन आदेश के खिलाफ न्यायिक समीक्षा की मांग की थी। उनके पक्ष में माता-पिता के शपथपत्र और इंटरनेट मीडिया पोस्ट को साक्ष्य के तौर पर पेश किया गया, जिनमें कनाडा में खालिस्तान आंदोलन के समर्थन की झलक मिलती थी। छह सितंबर को टोरंटो की संघीय अदालत की जज ऐवी याओ-याओ गो ने उनकी

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अपील खारिज कर दी। इसी तरह, 27 अगस्त को ब्रिटिश कोलंबिया के वैंकूवर में जज गाय रेगिम्बाल्ड ने कनाडा में रह रही भारतीय नागरिक कंवलजीत कौर की दलीलों को भी अस्वीकार कर दिया। कौर ने दावा किया था कि वह एसएफजे से जुड़ी हैं और भारत लौटने पर उत्पीड़न का सामना करेंगी। अदालत ने कहा कि उनके दावे अनुमान पर आधारित हैं और मात्र जनमत संग्रह के वोटर कार्ड से यह साबित नहीं होता कि वह भारतीय एजेंसियों के लिए कोई उच्च प्रोफाइल वाली शख्सियत हैं।

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कौर 2018 में कनाडा पहुंची थीं और एक साल से अधिक समय बाद 2019 में शरण की मांग की थी। उन्होंने खालिस्तान समर्थक गतिविधियों का हवाला देना शुरू किया। 25 अगस्त को एक अन्य मामले में संघीय अदालत ने भारतीय दंपती की अपील भी खारिज कर दी। दंपती ने दावा किया था कि कनाडा में रहते हुए वे खालिस्तान समर्थक बन गए हैं और भारत लौटने पर उन्हें प्रताड़ित किया जाएगा। अदालत ने इसे भ्रामक और अविश्वसनीय करार दिया।