PTB Big न्यूज़ जालंधर : महानगर के पॉश इलाके मॉडल टाउन स्थित प्रसिद्ध जेनेसिस फर्टिलिटी एंड सर्जिकल सेंटर (Genesis Fertility and Surgical Center Jalandhar) में उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब एक नवजात बच्ची के जन्म के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों का सीधा आरोप है कि अस्पताल के डॉ. लखविंदर पाल सिंह ने उन्हें पहले ‘लड़के’ (बेबी बॉय) के जन्म की बात कही थी, लेकिन डिलीवरी के बाद उन्हें ‘लड़की’ (बेबी गर्ल) थमा दी गई। इसके बाद परिवार ने अस्पताल पर बच्चा बदलने तक के संगीन आरोप लगा दिए हैं।
.परिजनों का दावा : “6 महीने पहले ही कहा था- बेटा होगा”
वहीं अस्पताल में हंगामा कर रहे पीड़ित परिवार के एक सदस्य ने मीडिया के सामने आरोप लगाते हुए कहा कि यह परिवार विशेष रूप से लंदन (इंग्लैंड) से यहां इलाज के लिए आया था। व्यक्ति का दावा है कि करीब 6 महीने पहले ही डॉक्टर द्वारा उन्हें यह भरोसा दिया गया था कि महिला के गर्भ में बेटा है और उन्हें लड़का ही होगा। इस बात की जानकारी बच्चे के पिता को भी थी, जो इस समय इंग्लैंड में हैं, जबकि मां को इस बारे में पूरी जानकारी नहीं थी। डिलीवरी के बाद लड़की होने पर परिवार का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने डॉक्टर पर धोखाधड़ी और ‘यार मार’ (विश्वासघात) करने के आरोप लगाए।
. .डॉक्टर का पलटवार : “हिंदुस्तान में किसी को लड़की नहीं चाहिए”
वहीं इस सारे विवाद के बाद दूसरी ओर, इन गंभीर आरोपों पर अस्पताल के डॉ. लखविंदर पाल सिंह ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। डॉक्टर का कहना था कि ”कानूनी रूप से डिलीवरी से पहले कोई भी यह नहीं बताता कि लड़का होगा या लड़की। इस परिवार को पिछले 5 साल से कोई संतान नहीं थी। अब इलाज के बाद इनके घर लक्ष्मी (लड़की) ने जन्म लिया है, लेकिन ये लोग खुश होने के बजाय हंगामा कर रहे हैं।”
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वहीं डॉ लखविंदर पाल सिंह डॉक्टर ने परिवार को खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनके पास ऐसा कोई भी लिखित या मौखिक सबूत है, जिसमें अस्पताल ने लड़का होने का दावा किया हो, तो वे उसे मीडिया और प्रशासन के सामने पेश करें। उन्होंने कहा कि उन्होंने आज तक किसी भी मरीज को जेंडर (लिंग) के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। डॉक्टर ने तंज कसते हुए कहा कि “परिवार के घर लड़की हुई है, सिर्फ इसीलिए यह शोर मचाया जा रहा है।
.वहीं इस पूरे विवाद के बीच अस्पताल के स्टाफ और डॉक्टर के एक साथी का वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में डॉक्टर के सहयोगी परिजनों से बकायदा लिखित दस्तावेजों पर बात कर रहे हैं। उनके मुताबिक, डिलीवरी से पहले परिवार ने सहमति पत्र (Consent Form) पर न सिर्फ हस्ताक्षर किए थे, बल्कि खुद अपने हाथ से लिखा था कि “उन्हें लड़का हो या लड़की, इससे कोई ऐतराज नहीं है।” ऐसे में अब लड़की होने पर हंगामा करना पूरी तरह अनुचित है। डॉक्टर ने परिजनों को शांत रहने और घर जाकर खुशियां मनाने की सलाह दी है।
.क्या प्रशासन करेगा इस पुरे मामले की उचित जांच?
जालंधर में हुए इस हाई-प्रोफाइल ड्रामे और दोनों पक्षों के दावों-प्रतिदावों के बाद अब गेंद प्रशासन के पाले में है। भारत में प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण (Pre-Natal Sex Determination) कानूनन अपराध है। ऐसे में परिजनों द्वारा “6 महीने पहले बेटा होने की बात बताने” के लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं। जिसको लेकर कई संस्थाएं अब उक्त अस्पताल व अस्पताल में जाकर हंगामा करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कभी भी कोई उचित कदम उठा सकती हैं। अब देखना यह होगा कि क्या पंजाब महिला आयोग, पुलिस प्रशासन और जालंधर के जिलाधीश (DC) इस संवेदनशील मामले का संज्ञान लेते हुए इसकी निष्पक्ष और उचित जांच के आदेश देते हैं, ताकि सच सबके सामने आ सके।
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