PTB News

Latest news
जालंधर में दिनदिहाड़े फिर चली गोलियां, पुलिस जांच में जुटी Iran-America में समझौते की खबरों से चढ़ी शेयर मार्केट, निवेशकों ने ली राहत की सांस एचएमवी की छात्राओं ने यूनिवर्सिटी में सबसे ज़्यादा एसजीपीए हासिल किए, ਲਾਇਲਪੁਰ ਖ਼ਾਲਸਾ ਕਾਲਜ ਦੇ ਐਮ.ਐਸ.ਸੀ. ਆਈ.ਟੀ. ਸਮੈਸਟਰ ਤੀਜਾ ਦਾ ਨਤੀਜਾ ਰਿਹਾ ਸ਼ਾਨਦਾਰ, अब सरकार ने शुरू की बेसहारा बच्चों के लिए Bal Sangopan Yojana, मिलेंगे 2500 रूपये महीना अमेरिकी हमले में मृत आदित्य के शव का परिवार व गांव वाले कर रहे इंतजार, फूट-फूट कर मीडिया के सामने रो... निशानेबाजी के 'गोल्डन बॉय' जसपाल राणा ने दुनिया को कहा अलविदा, खेल जगत में शोक गोल्डन टेंपल परिसर में बेअदबी की युवक ने की कोशिश, SGPC अध्यक्ष ने लिया संज्ञान पेपर लीक और परीक्षा विवाद पर कॉकरोच पर ने किया बड़े आंदोलन का ऐलान Iran US War, Oman के निकट अमेरिकी मिसाइल हमले में हिमाचल प्रदेश के युवक की हुई मौत, क्षेत्र में शोक ...

महाशिवरात्रि पर शिव के भक्तों के लिए अच्छी खबर, इस तारीख से खुलेंगे केदारनाथ के कपाट

good news for devotees on mahashivratri the doors of kedarnath will open on this date

PTB धार्मिक News देहरादून : हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं पर उत्तराखण्ड के रुद्रप्रयाग जनपद में विराजमान भगवान शिव के पांचवें ज्योतिर्लिंग केदारनाथ धाम के कपाट इस बार ग्रीष्मकालीन दर्शनों के लिये आगामी 06 मई को सुबह 06 बजकर 25 मिनट पर खोले जाएंगे। मंगलवार को महा शिवरात्रि के अवसर पर, बाबा केदारनाथ के शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ में 12वें ज्योर्तिलिंग में शामिल भगवान केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि तय की गई।

ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में पौराणिक परंपराओं के अनुसार शिवरात्रि के पर्व पर केदारनाथ के कपाट खुलने की तिथि वैदिक पूजा अर्चना के साथ ही पारंपरिक रीति रिवाज के तहत घोषित की गई। हक हकूकधारी, वेदपाठी, मंदिर समिति के पदाधिकारी, तीर्थ पुरोहित की मौजूदगी में पंचांग गणना के अनुसार तिथि की घोषणा की गई।

अब 02 मई को बाबा केदारनाथ की डोली केदार धाम के लिए रवाना होगी। 02 मई सायं को डोली गुप्तकाशी, 03 मई को फाटा, 04 मई को गौरीकुंड में रात्रि विश्राम के बाद 05 मई को केदारनाथ धाम पहुंचेगी। 06 मई को सुबह 06 बजकर 25 मिनट पर कपाट आम भक्तों के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे। यह तिथियां केदारनाथ के रावल भीमाशंकर लिंग, धर्माधिकारी ओमकारेश्वर शुक्ला, पुजारी व वेदपाठीगणों द्वारा पंचांग गणना के बाद निश्चित की गई।