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अमेरिका जाने के चक्कर में एजेंटों के हत्थे चढ़ा युवक, फिर बनाया बंधक, MP की मदद से लौटा भारत,

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PTB Big न्यूज़ कपूरथला : कपूरथला के बाज़ गांव का बलविंदर सिंह अमेरिका जाने के सपने में जुलाई 2024 में भारत से निकला था। इस दौरान कोलंबिया में डोकरों ने बलविंदर को बंधक बना लिया। एक साथी के शरीर पर ब्लेड से वार किए। दूसरे को नग्न करके उस पर पिघली हुई प्लास्टिक और गर्म रॉड से प्रताड़ित किया। डोकरों ने इन यातनाओं की वीडियो बनाकर फिरौती के लिए पीड़ितों के परिवारों को भेजी। बलविंदर सिंह ने बताया कि एजेंटों ने उसे दिल्ली से मुंबई और

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फिर नीदरलैंड, सिएरा लियोन, घाना होते हुए अमेजन के जंगलों के रास्ते ब्राजील पहुंचाया। कोलंबिया में डोकरों ने उसे बंधक बना लिया। एक रात डोकर ने बलविंदर को गोली मारने की धमकी दी। उसने सोचा कि मरना तो तय है, तो क्यों न भागने की कोशिश की जाए। वह रात को डोकरों की चुंगल से भाग निकला। जंगल से भागते हुए एक मुख्य मार्ग तक पहुंचा, जहां एक बाइक सवार ने उसे सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल के प्रयासों से बलविंदर को वतन

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वापस लाया गया। गुरुवार को वह अपने परिवार के साथ निर्मल कुटिया, सुलतानपुर लोधी पहुंचा। पांच महीनों तक जंगलों में लकड़ियों और घास खाकर गुजारा करने वाले बलविंदर ने अपनी आपबीती सुनाई। बलविंदर सिंह ने बताया कि एजेंटों ने बोलिविया, पेरू और इक्वाडोर होते हुए अंत में कोलंबिया के जंगलों में डोकरों के हवाले कर दिया गया। वहां पहुंचते ही उसका पासपोर्ट और फोन छीन लिया गया और उसे एक कमरे में बंद कर दिया गया। वहां पंजाब, हरियाणा और अन्य देशों से युवकों को

भी समूहों में बंदी बनाकर रखा गया था। उसने दावा किया कि डोकरों ने पास के ही इलाके में नेपाल की लड़कियों को भी बंदी बना कर रखा हुआ था। बलविंदर ने बताया कि डोकरों से भागकर जब वह किसी तरह एक सुरक्षित जगह पहुंचा तो करीब पांच महीने बाद अपने परिवार से संपर्क कर पाया और उन्हें अपनी पूरी कहानी सुनाई। इस दौरान उसकी मां और बहन राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल के कार्यालय पहुंचीं। उस समय संत सीचेवाल कनाडा में थे,

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लेकिन वहीं से उन्होंने विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास से संपर्क कर बलविंदर की वापसी के लिए जरूरी कदम उठवाए। निर्मल कुटिया सुल्तानपुर लोधी पहुंची बलविंदर की माता शिंदर कौर ने संत सीचेवाल का धन्यवाद करते हुए कहा कि “यह मेरे बेटे का दूसरा जन्म है।” उन्होंने बताया कि एजेंटों ने पहले ही उनकी ज़मीन और मकान बिकवा दिया था। ऐसे हालात में अगर संत सीचेवाल बलविंदर की टिकट न करवाते, तो उनके पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वे अपने बेटे को वापस बुला पाते।

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