PTB News

Latest news
जालंधर में दिनदिहाड़े फिर चली गोलियां, पुलिस जांच में जुटी Iran-America में समझौते की खबरों से चढ़ी शेयर मार्केट, निवेशकों ने ली राहत की सांस एचएमवी की छात्राओं ने यूनिवर्सिटी में सबसे ज़्यादा एसजीपीए हासिल किए, ਲਾਇਲਪੁਰ ਖ਼ਾਲਸਾ ਕਾਲਜ ਦੇ ਐਮ.ਐਸ.ਸੀ. ਆਈ.ਟੀ. ਸਮੈਸਟਰ ਤੀਜਾ ਦਾ ਨਤੀਜਾ ਰਿਹਾ ਸ਼ਾਨਦਾਰ, अब सरकार ने शुरू की बेसहारा बच्चों के लिए Bal Sangopan Yojana, मिलेंगे 2500 रूपये महीना अमेरिकी हमले में मृत आदित्य के शव का परिवार व गांव वाले कर रहे इंतजार, फूट-फूट कर मीडिया के सामने रो... निशानेबाजी के 'गोल्डन बॉय' जसपाल राणा ने दुनिया को कहा अलविदा, खेल जगत में शोक गोल्डन टेंपल परिसर में बेअदबी की युवक ने की कोशिश, SGPC अध्यक्ष ने लिया संज्ञान पेपर लीक और परीक्षा विवाद पर कॉकरोच पर ने किया बड़े आंदोलन का ऐलान Iran US War, Oman के निकट अमेरिकी मिसाइल हमले में हिमाचल प्रदेश के युवक की हुई मौत, क्षेत्र में शोक ...

चिट्ठी लिखकर! महात्मा गांधी के सत्याग्रह के रास्ते पर चलने का लिया अरविंद केजरीवाल ने फैसला, जाने मामला,

Arvind Kejriwal Excise Policy Case Justice Swarana Kanta Sharma Delhi High Court Neutrality

PTB Big Political नई दिल्ली : दिल्ली की सियासत में एक बार फिर बड़ा मोड़ आ गया है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्ण कांता को चिट्ठी लिखकर साफ कर दिया है कि वह उनके सामने न तो खुद पेश होंगे और न ही किसी वकील के जरिए अपनी पैरवी करवाएंगे। केजरीवाल ने पत्र में लिखा कि उन्हें जस्टिस स्वर्ण कांता से न्याय मिलने की उम्मीद अब टूट चुकी है।

.

.

इसी कारण उन्होंने महात्मा गांधी के सत्याग्रह के रास्ते पर चलने का फैसला किया है। उनका कहना है कि यह निर्णय उन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनकर लिया है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जस्टिस स्वर्ण कांता के किसी भी फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार अपने पास सुरक्षित रखेंगे। इस कदम को राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टिकोण से अहम माना जा रहा है,

.

.

क्योंकि आम तौर पर ऐसे मामलों में नेता अदालत में पेश होकर अपनी दलील रखते हैं। केजरीवाल का यह रुख आने वाले दिनों में पूरे मामले को और गरमा सकता है। यह पूरा मामला दिल्ली शराब नीति से जुड़ा है। अरविंद केजरीवाल और अन्य आरोपियों ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से मामले की सुनवाई से खुद को अलग (recusal) करने की मांग की थी। उनका तर्क था कि जज पक्षपाती हो सकते हैं, और उन्होंने इसके समर्थन में कई कारण भी दिए,

.

यह भी पढ़ें : AAP पार्टी के 7 सांसदों की बगावत के बीच ‘डटे’ रहे सांसद बलबीर सीचेवाल, आखिर क्यों ठुकराया ऑफर?

.

जिनमें जज के बच्चों का सरकारी वकीलों के साथ संबंध भी शामिल था। हालांकि, जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने हाल ही में इस याचिका को स्पष्ट शब्दों में खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उनका शपथ संविधान से है और वे किसी दबाव में नहीं आएंगी। जज ने केजरीवाल की याचिका को ‘बिना प्रमाण के आरोप’ बताया और कहा कि ऐसे आवेदन न्यायिक प्रक्रिया पर हमला हैं।

.

यह भी पढ़ें : महान शिक्षक, मार्ग दर्शक, दयावान, समाज सेवक सेंट सोल्जर एवं पी पी आर ग्रुप के चेयरमैन स्वर्गीय श्री अनिल चोपड़ा जी को श्रद्धा सुमन अर्पित किये गए,

.

उन्होंने अपने फैसले में जोर देकर कहा, “अगर मैं हट जाऊंगी तो संदेश जाएगा कि दबाव डालकर जज को हटाया जा सकता है। केजरीवाल की इस चिट्ठी और उनके फैसले ने शराब नीति मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दिल्ली हाईकोर्ट इस नई स्थिति पर क्या रुख अपनाता है और केजरीवाल का सत्याग्रह का रास्ता कानूनी दृष्टि से कितना असरदार साबित होता है।