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एलपीयू ने 5वें वार्षिक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन और ग्लोबल समिट 2026 में 20 से अधिक देशों के 65 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों की मेजबानी की,

LPU Hosted 65+ International Delegates from 20+ Countries at the 5th Annual International Conference and Global Summit 2026

एकेडमिक सहयोग और आउटकम ड्रिवन साझेदारियों को आगे बढ़ाने के लिए एलपीयू में जुटे वैश्विक विश्वविद्यालय प्रमुखों के बीच 8 अंतर्राष्ट्रीय एमओयू (समझौता ज्ञापनों) पर हस्ताक्षर किए गए,

PTB News “शिक्षा” : दुनिया के प्रमुख शिक्षाविदों को एक साथ लाते हुए, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) ने ‘वार्षिक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन और ग्लोबल समिट’ (AICGS 2026) के पांचवें संस्करण की मेजबानी की। इसमें 20 से अधिक देशों की यूनिवर्सिटी प्रमुखों और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों का स्वागत किया गया। तीन दिवसीय इस सम्मेलन का विषय “कनेक्टेड फ्यूचर्स: वेयर ग्लोबल यूनिवर्सिटी पार्टनरशिप्स डिलीवर रियल इम्पैक्ट” (जुड़ा हुआ भविष्य: जहाँ वैश्विक विश्वविद्यालय साझेदारियाँ वास्तविक प्रभाव डालती हैं) था। इसका मुख्य फोकस उच्च शिक्षा, अनुसंधान और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक अवसरों को आगे बढ़ाने में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की भूमिका पर था।

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इस समिट के दौरान 7 देशों – स्विट्जरलैंड, अमेरिका, एस्टोनिया, साइप्रस, जर्मनी, रूस और यूएई – के प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के साथ 8 नए समझौता ज्ञापनों (एम ओ यू) पर हस्ताक्षर किए गए। इन साझेदार संस्थानों में स्विस स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, सैमुअल मेरिट यूनिवर्सिटी, एस्टोनियन एंटरप्रेन्योरशिप यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेज, यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट्रल मिसौरी, यूरोपियन यूनिवर्सिटी साइप्रस, जर्मन वार्सिटी, सेंट पीटर्सबर्ग स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनॉमिक्स और सिटी यूनिवर्सिटी अजमान शामिल हैं। ये समझौते संयुक्त रिसर्च, एकेडमिक आदान-प्रदान और सहयोगात्मक कार्यक्रमों के रास्ते खोलते हैं, जिससे एलपीयू के छात्र और फैकल्टी वैश्विक शैक्षणिक समुदाय से और बेहतर तरीके से जुड़ सकेंगे।

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भव्य उद्घाटन समारोह में एलपीयू की प्रो-चांसलर कर्नल डॉ. रश्मि मित्तल, एलपीयू के वाइस-प्रेसिडेंट डॉ. अमन मित्तल, एलपीयू के प्रो-वाइस चांसलर डॉ. लोवी राज गुप्ता के साथ-साथ दुनिया भर से आए प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधि और पार्टनर यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधि शामिल हुए। यह पांचवां संस्करण (एआईसीजीएस) की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ, जिसने इस समिट को वैश्विक शैक्षणिक संवाद, संस्थागत जुड़ाव और सहयोगात्मक अवसरों के एक मंच के रूप में और अधिक स्थापित किया है।

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उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए, एलपीयू की प्रो-चांसलर कर्नल डॉ. रश्मि मित्तल ने ऐसी इंटरनेश्नल पार्टनरशिप बनाने के महत्व पर जोर दिया, जो केवल औपचारिक समझौतों तक सीमित न रहें, बल्कि छात्रों और फैकल्टी के लिए दीर्घकालिक अवसर पैदा करें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अंतर्राष्ट्रीयकरण का असली मूल्य उन लोगों में निहित है, जो आपसी सीख, शैक्षणिक आदान-प्रदान और निरंतर जुड़ाव के माध्यम से साझेदारियों को जीवंत बनाते हैं। उन्होंने प्रतिनिधियों को एलपीयू के छात्रों के साथ बातचीत करने, यहाँ के शैक्षणिक माहौल को जानने और भारत की सांस्कृतिक विविधता का अनुभव करने के लिए प्रोत्साहित किया।

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एलपीयू के वाइस प्रेजिडेंट डॉ. अमन मित्तल ने यूनिवर्सिटी के अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क के विस्तार पर प्रकाश डाला। 2022 में यहाँ 260 अंतर्राष्ट्रीय एमओयू (समझौता ज्ञापन) थे, जो आज बढ़कर 600 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय एमओयू और पार्टनरशिप हो गए हैं। डॉ. अमन मित्तल ने जोर देकर कहा कि सफल इंटरनेश्नलाजेशन को केवल हस्ताक्षरित समझौतों की संख्या से नहीं, बल्कि उनके द्वारा पैदा किए गए अवसरों से पता चलता है। डॉ. अमन ने बताया कि छात्र आदान-प्रदान, फैकल्टी की आवाजाही, संयुक्त शोध, सह-लेखन वाले प्रकाशन, डॉक्टरेट का को-सुपरविजन और सहयोगात्मक एकेडमिक कार्यक्रम, ग्लोबल पार्टनरशिप बनाने की एलपीयू की रणनीति के मुख्य आधार हैं।

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इस शिखर सम्मेलन में अंतर्राष्ट्रीय उच्च शिक्षा के सामने मौजूद एक महत्वपूर्ण सवाल पर भी ध्यान केंद्रित किया गया: यूनिवर्सिटी यह कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं कि वैश्विक साझेदारियों से ठोस परिणाम मिलें? “एमओयू से परे: यूनिवर्सिटी की साझेदारियाँ वास्तव में क्या परिणाम देती हैं” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि केवल औपचारिक समझौतों तक सीमित रहने के बजाय सक्रिय सहयोग की ओर बढ़ना जरूरी है। इसमें सार्थक शैक्षणिक जुड़ाव, छात्रों और फैकल्टी की भागीदारी, और संस्थागत परिणामों को मापने पर विशेष ध्यान दिया गया। अपनी यात्रा के 25 वर्ष पूरे करने के अवसर पर, एलपीयू के डिविजन ऑफ इंटरनेश्नल अफेर्यस ने 600 से अधिक एमओयू और साझेदारियों का एक अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क स्थापित किया है, जो वैश्विक उच्च शिक्षा समुदाय के साथ इसके निरंतर जुड़ाव को दर्शाता है।

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