PTB Political न्यूज़ चंडीगढ़ : केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पंजाब के कार्यवाहक डीजीपी की नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं। मंत्रालय ने पंजाब सरकार से सवाल किया है कि वह आठ महीने से अधिक समय से राज्य पुलिस बल के कार्यवाहक डीजीपी को क्यों जारी रखे हुए है। मंत्रालय का कहना है कि राज्य सरकार ने डीजीपी की नियमित नियुक्ति के लिए अभी तक योग्य अधिकारियों का पैनल नहीं भेजा है।
मानदंडों के अनुसार राज्य केवल छह महीने की अधिकतम अवधि के लिए एक कार्यवाहक डीजीपी को तैनात कर सकता है। वर्तमान डीजीपी गौरव यादव को पिछले साल 5 जुलाई को कार्यवाहक डीजीपी के रूप में तैनात किया गया था और उन्होंने 5 जनवरी को इस पद पर छह महीने पूरे किए हैं। छह महीने पूरे होने पर राज्य सरकार को नियमित डीजीपी की नियुक्ति के लिए कार्यवाही करनी थी।
गृह मंत्रालय द्वारा पुलिस मामलों पर राज्य सरकार को यह दूसरा पत्र है, पिछले हफ्ते इसने खालिस्तान समर्थक कार्यकर्ताओं द्वारा अजनाला पुलिस थाने पर धावा बोलने पर सवाल उठाया था। गौरतलब है कि स्वयंभू सिख उपदेशक और खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह के समर्थकों की भीड़ ने तलवारों, बंदूकों और धारदार हथियारों से लैस होकर अमृतसर के अजनाला थाने में हमला कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने अपने साथी लवप्रीत सिंह उर्फ तूफान सिंह को रिहा करवा लिया था।
इस मामले में विपक्ष लगातार राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि राज्य सरकार ने डीजीपी की नियुक्ति मामले में पत्र का तुरंत जवाब नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार को जल्द ही पात्र अधिकारियों का एक केंद्र को पैनल भेजना पड़ सकता है क्योंकि डीजीपी के चयन के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा मानदंड निर्धारित किए गए हैं। मानदंडों के मुताबिक राज्य को तीन सीनियर अधिकारियों का एक पैनल भेजना होता है। बताया जा रहा है कि राज्य के सीनियर आईपीएस अधिकारी केंद्रीय एजेंसियों में स्थानांतरित किए जा चुके हैं, जिसकी वजह से सरकार द्वारा पैनल भेजने में देरी की गई है।








































