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पेट्रोल से लेकर LPG ही नहीं, पानी तक पहुंची ईरान युद्ध की आग, जानें कारण?

Increase in the prices of packaged water in India amidst the Iran-Israel war

PTB Big न्यूज़ नई दिल्ली : ईरान युद्ध के चलते क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत फिर से प्रति बैरल 100 डॉलर के पार पहुंच गई। इस बढ़ती कीमत का असर भारत समेत दुनियाभर के कई उद्योगों पर पड़ रहा है, और अब इसका प्रभाव भारत की पैकेज्ड वाटर इंडस्ट्री तक दिखने लगा है। भारत का बोतलबंद पानी का बाजार करीब 5 अरब डॉलर का है।

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गर्मियों के सीजन से ठीक पहले कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ गई है। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, युद्ध के कारण आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने से प्लास्टिक बोतल, कैप, लेबल और कार्डबोर्ड बॉक्स जैसी पैकेजिंग सामग्री महंगी हो गई है, जिसका असर छोटे निर्माताओं पर सबसे अधिक पड़ रहा है। 

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क्यों महंगी हो रही है बोतलबंद पानी की बोतल?
कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से पॉलिमर महंगा हो गया है, जो प्लास्टिक बोतल बनाने का मुख्य कच्चा माल है।
प्लास्टिक बोतल की सामग्री की कीमत 50% बढ़कर 170 रुपये प्रति किलो हो गई है।
बोतल के ढक्कन (कैप) की कीमत दोगुने से अधिक बढ़कर 0.45 रुपये प्रति पीस हो गई है।
गत्ते के बॉक्स, लेबल और चिपकने वाली टेप भी काफी महंगे हो गए हैं।

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करीब 2000 छोटे बोतलबंद पानी निर्माताओं ने डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए प्रति बोतल लगभग 1 रुपये (करीब 5%) की बढ़ोतरी कर दी है। उद्योग संगठन का कहना है कि आने वाले दिनों में यह बढ़ोतरी 10% तक जा सकती है। आमतौर पर उपभोक्ता एक लीटर पानी की बोतल के लिए 20 रुपये से कम कीमत चुकाते हैं। फिलहाल खुदरा कीमतों पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है, क्योंकि बड़ी कंपनियां जैसे बिस्लेरी,

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किनले, एक्वाफिना और रिलायंस बढ़ती लागत का भार खुद उठा रही हैं। लेकिन छोटे प्लेयर्स के लिए यह संभव नहीं है। अगर युद्ध की स्थिति लंबे समय तक रही, तो आने वाले दिनों में बोतलबंद पानी की कीमतों में और वृद्धि हो सकती है। भारत में प्रीमियम मिनरल वाटर का बाजार करीब 400 मिलियन डॉलर का है और यह तेजी से बढ़ रहा है। पिछले साल प्रीमियम पानी का हिस्सा कुल बाजार का 8% था,

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जबकि साल 2021 में यह सिर्फ 1% था। मिनरल वाटर ब्रांड Aava के सीईओ शिरॉय मेहता के अनुसार, कंपनी ने अपने रिसेलर्स के लिए बोतलों की कीमत 18% तक बढ़ा दी है। शिरॉय मेहता ने बताया कि अधिकांश कंपनियां अभी भी 40-50% अतिरिक्त लागत खुद वहन कर रही हैं, ताकि ग्राहकों को प्रभावित न किया जाए। लेकिन गर्मियों के पीक सीजन से पहले यह स्थिति पेय उद्योग के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।