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यही नहीं कमिश्नरेट में जिन पुलिस अधिकारीयों ने जालंधर शहर में छोटी मछलियों को आईपीएल के सट्टेबाजी में गिरफ़्तारी दिखाकर पहले वाह वाही लूटी और बाद में उनकी ही वजह से पुलिस को कोर्ट से फटकार खानी पड़ी थी यह दरअसल अधिकारीयों की एक सोची समझी साजिश का हिस्सा थी शायद इसीलिए पुलिस पकड़े गए सट्टेबाजी की इन छोटी मछलियों को ज्यादा दिन तक अंदर नहीं रख पाई और इन्हें मिल गई कोर्ट से बेल….?
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लेकिन, इनको क्यों मिली बेल किस आधार पर मिली बेल, क्या पुलिस अधिकारीयों को सट्टेबाजी की पर्याप्त धाराओं के बारे में कोई जानकारी नहीं थी जो हाथ लगी छोटी मछलियों के सहारे जालंधर में चल रहे सट्टेबाजी के किंग कोबराओं तक पुलिस पहुंचकर इस पुरे जल का पर्दाफर्श कर पाती. लेकिन शायद नहीं… इनको या तो पुलिस पकड़ कर गलती कर बैठी थी या फिर राजनीती की सत्ता में बैठे सफेद पोशों के प्रभाव के सहारे पहले मीडिया को और बाद में जनता को आईपीसी की धारा 420 में उलझाकर इन पकड़ी गई छोटी मछलियों को बेल तक पहुंचाया /
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लेकिन, जालंधर के शहर वासियों पीटीबी न्यूज़ जल्द ही शहर में चलने वाले 150 से ज्यादा सट्टे के किंग कोबराओं का खुलासा करेगा ताकि कमिश्नरेट जल्द से जल्द इस ट्रैलर के बाद की पूरी फिल्म जनता को गेम्ब्लिंग एक्ट की धाराओं के साथ दिखा सके /
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इस संदर्भ में किसी अधिकारी का कोई बयान नहीं लिया जरा है ना ही किसी सफेद पोश नेता का क्योंकि पिछली बार भी एक जब पुलिस के सीनियर अधिकरियों ने इन छोटी मछलियों को पकड़कर वाह वाही लूटी थी तो एक अधिकारी ने कुछ दिन बाद बयान दिया था की इन लोगों गतिविधियों पर पूरी नजर रखी जा रही है जल्द ही इन पर कारवाही की जाएगी लेकिन…………?
देखते रहिये पीटीबी न्यूज़



















