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lenskart ने ड्रेस कोड के बढ़ते विवाद के बाद मांगी माफी, बिंदी-तिलक और कलावा पहनने पर लगाई थी रोक,

Lenskart employee policy religious symbols style guide

PTB Big न्यूज़ नई दिल्ली : Eyewear Retailer Lenskart ने सोशल मीडिया पर भारी विरोध के बाद पब्लिकली माफी मांगी है। इसके अलावा कंपनी ने अब एक नई और पारदर्शी ‘इन-स्टोर स्टाइल गाइड’ जारी की है, जिसमें कर्मचारियों को कार्यस्थल पर अपने धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों को पहनने की पूरी अनुमति दी गई है। लेंसकार्ट की नई पॉलिसी में अब बिंदी, तिलक, सिंदूर, कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा, हिजाब और पगड़ी जैसे आस्था के प्रतीकों को शामिल किया गया है।

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कंपनी ने X पर बयान जारी कर कहा कि वे अपनी गाइडलाइंस को सार्वजनिक और पारदर्शी बना रहे हैं ताकि ग्राहकों और समुदाय की चिंताओं को दूर किया जा सके। आपको बता दें कि यह सारा विवाद इस हफ्ते की शुरुआत में तब शुरू हुआ जब Lenskart की ‘एम्प्लॉई ग्रूमिंग पॉलिसी’ का एक डॉक्युमेंट सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। जिसमें कर्मचारियों को बिंदी और तिलक जैसे धार्मिक प्रतीकों को पहनने से रोका गया था। इसके बाद इंटरनेट पर कंपनी के बहिष्कार की मांग उठने लगी थी।

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Lenskart employee policy religious symbols style guide

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वहीं इसके बाद विवाद बढ़ता देख कंपनी के फाउंडर पीयूष बंसल {Founder Piyush Bansal} ने दखल देते हुए स्पष्ट किया कि वायरल हुआ डॉक्युमेंट एक पुराना था और यह कंपनी के वर्तमान रुख को नहीं दर्शाता। बंसल ने कहा कि हमारी पॉलिसी में धार्मिक अभिव्यक्ति के किसी भी रूप पर कोई पाबंदी नहीं है। उन्होंने इस भ्रम की स्थिति के लिए माफी भी मांगी है। Lenskart कंपनी ने अपने नए बयान में कहा कि लेंसकार्ट भारत में, भारतीयों द्वारा और भारतीयों के लिए बना है।

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2,400 से ज्यादा स्टोर्स ऐसे लोगों द्वारा चलाए जाते हैं जो अपनी परंपराओं को साथ लेकर आते हैं। कंपनी ने वादा किया है कि ट्रेनिंग और पॉलिसी में सभी की वैल्यूज का ध्यान रखा जाएगा। Lenskart कॉर्पोरेट जगत में कंपनियां अपने कर्मचारियों के ड्रेस कोड और व्यवहार के लिए कुछ नियम बनाती हैं, जिसे ग्रूमिंग पॉलिसी कहा जाता है। इसका उद्देश्य ब्रांड की एक समान पहचान बनाना होता है, लेकिन भारत जैसे विविधता वाले देश में भावनाओं का सम्मान करना अनिवार्य माना जाता है।

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