PTB News “हेल्थ” : आज पूरे देश में बड़े हर्ष के साथ विश्व होम्योपैथी दिवस मनाया जाता है। विश्व होम्योपैथी दिवस के बारे में जागरूकता बढ़ाने और होम्योपैथी की पहुंच में सुधार करने के लिए मनाया जाता है। होम्योपैथी को बड़े पैमाने पर विकसित करने के लिए आवश्यक भविष्य की रणनीतियों और इसकी चुनौतियों को समझना भी महत्वपूर्ण है।
दुनियाभर में किसी भी तरह के इलाज के लिए एलोपैथी, होम्योपैथी, आयुर्वेद, नेचुरोपैथी चिकित्सा पद्धति ही अपनाई जाती है। मौजूदा समय में लोग एलोपैथी यानी आधुनिक चिकित्सा पद्धति के जरिए ही बीमारी का इलाज कराते हैं। इसका मुख्य कारण है इनका जल्दी असर करना। हालांकि अब लोगों का होम्योपैथी के प्रति विश्वास बढ़ा है और भरोसा कर इलाज भी करा रहे हैं। आइए जानते है कि क्यों ये दिन मनाया जाता है और क्या इसका महत्व ?
‘वर्ल्ड होम्योपैथी डे’ होम्योपैथी के संस्थापक जर्मन चिकित्सक डॉ.क्रिश्चियन फ्रेडरिक सैमुअल हैनिमैन (Dr.Christian Friedrich Samuel Hahnemann) की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। इन्हें ही होम्योपैथी के उपयोग के जरिए स्वस्थ होने का तरीका खोजने का श्रेय जाता है। प्रत्येक वर्ष इस दिवस को एक खास थीम के तहत सेलिब्रेट किया जाता है।
होम्योपैथी दवाओं और सर्जरी का उपयोग नहीं करती है। यह इस विश्वास पर आधारित है कि हर कोई एक व्यक्ति है, उसके अलग-अलग लक्षण होते हैं और उसी के अनुसार इलाज किया जाना चाहिए। जर्मन चिकित्सक और केमिस्ट सैमुअल हैनीमैन (Samuel Hahnemann 1755-1843) द्वारा व्यापक रूप से सफलता पाने के बाद 19वीं शताब्दी में होम्योपैथी को पहली बार प्रमुखता मिली। लेकिन इसकी उत्पत्ति 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व की है, जब ‘चिकित्सा के जनक’ हिप्पोक्रेट्स ने अपनी दवा की पेटी में होम्योपैथी उपचार पेश किया था।
विश्व होम्योपैथी दिवस होम्योपैथी को बढ़ावा देने में शामिल चुनौतियों और अवसरों को स्वीकार करने का एक अवसर है। इस दिन का उद्देश्य एक चिकित्सा प्रणाली के रूप में होम्योपैथी के बारे में जागरूकता पैदा करना और इसकी सफलता दर में सुधार की दिशा में प्रयास करना है। होम्योपैथी वैकल्पिक चिकित्सा का एक रूप है जो रोगी में शरीर की जन्मजात उपचार प्रक्रियाओं को उत्तेजित करके काम करता है।
यह इस सिद्धांत पर काम करता है कि लक्षणों की नकल करने वाले प्राकृतिक पदार्थों की छोटी खुराक देकर बीमारी के लक्षणों का इलाज किया जा सकता है। होम्योपैथी ने कई बीमारियों में बेहतर काम किया है। होम्योपैथी से बच्चों से जुड़ी बीमारियां, प्रसूति और स्त्री रोग, मानसिक स्वास्थ्य और जोड़ों का दर्द आदि से संबंधित परेशानी, लिवर से संबंधित परेशानी, एसिडिटी की समस्या, संक्रामक रोगों में इलाज संभव है। इसके साथ ही कोविड काल में इसका इलाज रामवाण बनकर उभरा था।








































