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बिश्नोई समाज के लोग जिन्होंने सलमान ख़ान को घुटनों पर ला दिया, अब मीडिया की है बारी, किसने और क्यों कहा?

People of Bishnoi society who brought Salman Khan to his knees Now it is the turn of the media who said and why?

PTB Big न्यूज़ राजस्थान (एडिटर-इन-चीफ) राणा हिमाचल : पहले आपको बताते हैं आखिर बिश्नोई समाज है कौन दरसअल यह वह समाज है जो बियाबान रेगिस्तान में वन्य प्राणियों और पेड़ पौधों के सबसे ज्यादा रक्षा करने वाली जाति मानी जाति है / बिश्नोई समाज के लोग जंगली जानवर और पेड़ों के लिए अपनी जान का नज़राना पेश करने को भी तैयार रहते हैं / यह वही समाज है जिन्होंने फ़िल्म स्टार सलमान खान के हाथों काले हिरणों के शिकार का मामला सामने आया तो वे सड़कों पर आ गए थे /

यही नहीं बिश्नोई समाज के लोग अपने आराध्य गुरु जम्भेश्वर के बताए 29 नियमों का पालन करते हैं / इनमें एक नियम वन्य जीवों की रक्षा और वृक्षों की हिफाजत से जुड़ा हुआ है / बिश्नोई समाज के लोग सिर्फ रेगिस्तान तक ही महदूद नहीं है / वह राजस्थान के अलावा हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में भी आबाद हैं / बिश्नोई समाज के बलिदानियों की याद में हर साल राजस्थान के खेजड़ली गांव में मेला आयोजित किया जाता है /

इस समाज के लोग दरख्तों और वन्य प्राणियों के लिए रियासत काल में भी हुकूमत से लड़ते रहे हैं / बिश्नोई समाज के पर्यावरण कार्यकर्ता हनुमान बिश्नोई कहते हैं, “जोधपुर रियासत में जब सरकार ने पेड़ काटने का आदेश दिया था तो बिश्नोई समाज के लोग विरोध में आ खड़े हुए थे / वह 1787 की बात है, उस वक्त राजा अभय सिंह का शासन था.”

People of Bishnoi society who brought Salman Khan to his knees Now it is the turn of the media who said and why?

जोधपुर के पूर्व सांसद और पूर्व मंत्री बिश्नोई कहते हैं, “उस वक्त ये नारा दिया गया था, ‘सर साठे रूंख रहे तो भी सस्तो जान.’ इसका मतलब था, अगर सिर कटाकर भी पेड़ बच जाएं तो भी सस्ता है / बिश्नोई समाज के लोग बताते हैं कि जब रियासत के लोग पेड़ काटने के लिए आए तो जोधपुर के खेजड़ली और आस-पास के लोगों ने विरोध किया / “उस वक्त बिश्नोई समाज की अमृता देवी ने पहल की और पेड़ के बदले खुद को पेश किया /

“इसी कड़ी में बिश्नोई समाज के 363 लोगों ने दरख्तों के लिए अपने प्राणों का बलिदान कर दिया / इनमें 111 महिलाएं थीं.” “इन्हीं बलिदानियों की याद में हर साल खेजड़ली में मेला आयोजित किया जाता है और लोग अपने पुरखों की क़ुर्बानी को श्रदा सुमन अर्पित करते हैं / “ये आयोजन न केवल अपने संकल्प को दोहराने के लिए है बल्कि नई पीढ़ी को वन्य जीवों की रक्षा और वृक्षों की हिफाजत की प्रेरणा देने का काम करता है /

अब आप यह सोच रहे होंगे की हम यह बात आखिर आज कर ही क्यों रहे हैं / तो सुनिए ट्विटर हेंडल पर मंजू बिश्नोई की महिला ने एक मेसेज डाला है जिसमें उसने लिखा है कि “देश की मीडिया पर्यावरण संरक्षण व जल जमीन जंगल के रक्षक बिश्नोई जाति को बार-बार बिश्नोई गैंग शब्द का प्रयोग करके भावना आहत करे रहे है अपराधी हर समाज में है पूरी जाति नही, बाज आये नहीं तो कानूनी कार्यवाही के लिए तैयार रहें,” इस दौरान कुछ मीडिया समूहों को टैग करते हुए लिखा है कि “जो भी है अपनी जबान का ख्याल रखें”