PTB Big न्यूज़ मोहाली : पंजाब के मोहाली में पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ सस्ते प्लाट दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी हो जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मिली जानकारी के अनुसार साल 2009 में पंजाब पुलिस प्राइमरी कंज्यूमर को-ऑपरेटिव सोसाइटी ने बिल्डर के साथ मिलकर प्लाट देने के नाम पर 700 लोगों के करीब 313 करोड़ हड़प लिए।
सोसाइटी के मौजूदा पदाधिकारी न्यू चंडीगढ़ में इकट्ठे हुए। उन्होंने कहा कि सभी ने 500-500 रुपए देकर सोसाइटी की सदस्यता ली थी। 2010 में सोसाइटी के कुछ पदाधिकारियों ने तय किया था कि राशन के साथ-साथ पुलिस कर्मचारियों को सस्ते दाम पर प्लाट देने का प्रोजेक्ट शुरू किया जाए। कुछ सदस्यों ने एक निजी बिल्डर के साथ कांट्रेक्ट कर लिया।
जिसके तय हुआ कि प्रति सदस्य को 6200 रुपए प्रति गज के हिसाब से प्लाट दिए जाएंगे। बिल्डर सोसाइटी के नाम पर 60 एकड़ जमीन खरीद कर देगा। इसके लिए सोसाइटी उसे 73.16 करोड रुपए अदा करेगी। बिल्डर इस जमीन के बिजनेस पार्ट काे विकसित कर बेचेगा। इसके बदले में सोसाइटी के सदस्यों को गमाडा के नियमानुसार बचे हुए भाग में प्लाट उपलब्ध कराएगा।
बिजनेस पार्ट बेचने से बिल्डर को जो मुनाफा होगा, उसमें से 1400 रुपए प्रति गज के हिसाब से सदस्यों को वापस करेगा। 2010 में बिल्डर ने 58 एकड़ जमीन न्यू चंडीगढ़ के गांव त्योगा और गांव तीड़ा में खरीद ली थी, जिसके बाद सोसाइटी के पदाधिकारियों ने तत्कालीन पंजाब पुलिस के अधिकारियों के साथ मिलीभगत करते हुए बिल्डर के साथ धोखाधड़ी की और उन्हें प्लाट नहीं मिल पाए।
सोसाइटी के वर्तमान प्रधान गुरमीत सिंह रिटायर्ड SSP ने बताया कि सदस्यों को प्लाट देने का प्रोजेक्ट बिल्डर ने गमाड़ा से 2014 में मंजूर करवाया था, कुछ पदाधिकारियों की मिलीभगत के कारण उसे इसने विकसित नहीं किया। वह प्रोजेक्ट का एक्सटेंशन लेता गया। 2022 में पदाधिकारी रिटायर हो गए तो उन्होंने दोनों के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी। इसके अगस्त 2022 में दोबारा चुनाव हुए और नई कार्यकारिणी बनी।
उपप्रधान एनपी ढिल्लो रिटायर्ड IG ने बताया की पदाधिकारियों ने बिल्डर के साथ मिलकर सोसाइटी के नियमों का उल्लंघन किया। पहले प्रोजेक्ट को शुरू किए बिना ही गांव रानी माजरा और गांव भरत माजरा में दूसरा प्रोजेक्ट शुरू करने का प्रस्ताव लाया गया, जिसके 175 नए सदस्य बनाए गए।जमीन के रेट बढ़ने की बात कहकर इस बार 11500 प्रति गज जमीन की कीमत रखी गई। इसके अलावा 3500 रुपए प्रति गज डेवलपमेंट चार्ज भी लगा दिया।
जिन सदस्यों ने पहले पैसे लगाए थे, उनसे भी 1600 रुपए प्रति गज के हिसाब से अतिरिक्त चार्ज लिया गया। दूसरे प्रोजेक्टर के नाम पर बिल्डर ने 35 करोड़ रुपए इकट्ठे किए।जनरल सेक्रेटरी दिलबाग सिंह ने बताया कि उस जमीन को बिल्डर ने 45 करोड़ में बेच दिया। पहले प्रोजेक्ट के नाम पर जो जमीन खरीदी गई थी, उसमें से भी 10 एकड़ जमीन दूसरे बिल्डर को बेच दी। बीच में जो सड़क निकाली गई, उसका मुआवजा भी सोसाइटी को देने के बजाय बिल्डर कुछ सदस्यों के साथ मिलकर खुद ले गया। पदाधिकारियों और बिल्डर की मिलीभगत के कारण 700 लोगों से 313 करोड़ की धोखाधड़ी की गई है।








































