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एमवी कॉलेज में विज्ञान सर्वत्र पूज्यते समारोह का द्वितीय दिवस,

2nd day of Celebration of National Science Week – Vigyan Sarvatra Pujyata at HMV

PTB News “शिक्षा” : हंस राज महिला महाविद्यालय, जालंधर के परिसर में नोडल एजेंसी पंजाब स्टेट कौंसिल साइंस एवं टेक्नालोजी के अधीन विज्ञान सर्वत्र पूज्यते शीर्षक अधीन द्वितीय दिवस का आयोजन किया गया। द्वितीय दिवस के मुख्य विषय – ‘एनल्स ऑफ हिस्ट्री’ रहा। इस अवसर पर मुख्यातिथि स्वरूप डॉ. गुरविंदर सिंह सैमी कन्डक्टर लैबोरटरी डिपार्टमैंट ऑफ रिसर्च फेज मोहाली चंडीगढ़ रहे जिनका डॉ. नीलम शर्मा द्वारा प्लांटर भेंट कर हार्दिक अभिनंदन किया गया। तत्पश्चात् मुख्य वक्ता डॉ. गुरविन्दर सिंह ने वर्चुअल प्लेटफार्म पर फेसबुक के माध्यम से लाइव रह कर ‘इसरो की आर्य भट्ट उपग्रह से चन्द्रयान तक की यात्रा’ पर विचारात्मक विचार सांझा करते हुए कहा कि इसरो की शुरूआत विक्रम साराभाई द्वारा की गई जिन्हें इसरो का पितामह भी माना जाता है। उन्होंने छात्राओं को जीवन के विषय में बताते हुए कहा कि उपग्रह किस प्रकार मनुष्य के लिए आवश्यक है एवं इसरो की यात्रा को छात्राओं के समक्ष एक लघु फिल्म के माध्यम से प्रस्तुत किया।

उन्होंने अपने विषय को पावर प्वाइंट प्रेजेनटेशन के माध्यम से छात्राओं को ज्ञान देते हुए कहा कि इसरो की तरफ से अब तक 53 उपग्रह छोड़े गए जिनमें से 13 अर्थ ओब्जरवेशन करते हैं और भारत का प्रथम उपग्रह आर्यभट्ट था जो कि भारतीय वैज्ञानिक के नाम पर रखा गया। उन्होंने पोलाड़ में छोड़े गए पहले उपग्रह से लेकर तीसरी पीढ़ी तक के सारे उपग्रहों के कार्यों एवं बनावट के विषय में एवं उपग्रहों द्वारा लिए गए चित्रों को भी छात्राओं के साथ सांझा किया। इस अवसर पर भारतीय परमाणु भौतिकी विज्ञान के जनक डॉ. होमी जहाँगीर भाभा के जीवन एवं उनके प्रशंसात्मक कार्यों पर एवं वूमैन पावर इन साइंस विषय पर फिल्म दिखाई गई।

डॉ. होमी जहाँगीर भाभा विज्ञान के चमकते सितारे के रूप में जाने जाते हैं, जिन्होंने भारत को परमाणु शक्ति सम्पन्न तथा वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में अग्रसर होने का मार्ग प्रशस्त किया। उनकी भौतिकी विज्ञान के साथ-साथ गणित में भी विशेष रूचि थी और उनके द्वारा की गई खोजों के विषय में बताया। द्वितीय दिवस के मुख्य आकर्षण पुस्तक मेला, पोस्टरों की प्रदर्शनी एवं नवाचार गैलरी का प्रदर्शन रहा। इस अवसर पर साइंस कला का आयोजन किया जिसके अन्तर्गत वूमैन साइंटिस्ट ऑफ इण्डिया मेड हिस्ट्री एवं पंजाब के महान वैज्ञानिक विषय पर पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें भिन्न-भिन्न स्कूल, कॉलेजों एवं यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं द्वारा उत्साहपूर्वक प्रतिभागिता की, जिसमें छात्राओं ने मन को मोह लेने वाले आकर्षक पोस्टर बनाए।

इस प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका डॉ. सोनिया मागू, भौतिकी विज्ञान विभागाध्यक्षा, स्वामी संत दास पब्लिक स्कूल, जालंधर, डॉ. पवन कुमार, पेटिंग विभागाध्यक्ष एपीजे स्कूल, जालंधर, डॉ. मीना सेठी, बॉटनी विभागाध्यक्षा, एनजेएसए गर्वमेंट कालेज, कपूरथला, डॉ. संगीता ओबराय, एसोसिएट प्रोफेसर नैशनल इंस्टीट्यूट आफ टैक्नालोजी ने सफलतापूर्वक निभाते हुए वर्ग ए के अन्तर्गत जसनीत दहंजल एवं आयुष वैभब गोयल ने पहला, वंशिका एवं प्रीति ने दूसरा, प्रानवी, कुलजीत और रवनूर कौर ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। वर्ग बी के अन्तर्गत नवनीत ने पहला, दिव्यांशी ने दूसरा एवं अशिता ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।

श्रीमती नवरूप, अध्यक्षा पीजी विभाग, पंजाबी , श्रीमती मीनाक्षी स्याल, कनवीनर, कोआर्डिनेटर्स आफ इवेेंट डॉ. नीलम शर्मा, डॉ. सीमा मरवाहा, डॉ. अंजना भाटिया ने जजों को सम्मानित किया। इस अवसर पर 34 स्कूल, कालेज एवं यूनिवर्सिटी के 106 छात्रों ने प्रतिभागिता की। डीईओ श्री हरजिंदर सिंह और डिप्टी डीईओ श्री राजीव जोशी ने साइंस मेले एवं पुस्तक प्रदर्शनी का दौरा किया। दोपहरान्त विशेषज्ञ वार्ता के अन्तर्गत मुख्य वक्ता डॉ. पी.के. आहलूवालिया, रिटायर्ड प्रो. एच.पी. यूनिवर्सिटी शिमला ने फेसबुक के माध्यम से लाइव रहकर क्लाइडस्कपिक वियू आफ इम्पैक्ट आफ साइंस एंड टैक्नालोजी ऑन ह्यूमन डिवेलपमैंट विषय पर विचार पेश करते हुए उन्होंने सीवी रमन के जीवन, उनकी खोजों एवं उनके द्वारा स्थापित खोज केन्द्रों की जानकारी छात्राओं के साथ सांझा की।

उन्होने कहा कि विज्ञान और कुछ नहीं बल्कि व्यवस्थित ज्ञान है। उन्होंने छात्राओं के साथ पैराडे लॉ आफ इलैक्टरोमेगनेटिक इनडक्शन, टिम बरनर ली वल्र्ड वाइड वैब, मनुप्रकाश का फोल्डस्कोप, संजीव धुरन्धर का ग्रैविटेशनल वेवस क्षेत्र में योगदान, नंदन नीलकरणी का आधार कार्ड के क्षेत्र में योगदान, विवेक कृष्णा सूर्या का थ्री-डी प्रिटिंग में योगदान एवं सौर ऊर्जा पर साराभाई एवं भाभा आदि जैसे विज्ञानकों की खोजों के बारे में ज्ञान प्रदान किया। इस मौके पर छात्राओं ने वनस्पति विज्ञान के चमत्कारों और भौतिकी के चमत्कारों के अनुभवात्मक शिक्षण के माध्यम से ज्ञान प्राप्त किया। उन्होंने पौधों के नमूनों से डीएनए और क्लोरोफिल वर्णक भी निकाला।