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क्या! जीत कर भी हार गए Vijay Thalapathy, आखिर क्यों दे सकते हैं 108 विधायक इस्तीफा, गुणा-गणित के गहरे में दावे,

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PTB Big Political तमिलनाडु : तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद से सरकार बनाने को लेकर खींचतान जारी है। चुनाव में विजय की पार्टी टीवीके 108 सीट जीतकर सबसे बड़े राजनीतिक दल के तौर पर सामने आया है। लेकिन इसके बाद भी टीवीके के पास सरकार बनाने के लिए जरूरी आंकड़ा नहीं है। इसके चलते तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने विजय की सरकार बनाने के दावे को मानने से इनकार कर दिया है।

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इसी बीच मीडिया में आ रही खबरें में सामने आ रहा है कि tvk के बहुमत के आंकड़े से दूर होने का फायदा उठाते हुए DMK ने AIADMK से सरकार बनाने को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। इससे नाराज होकर TVK ने कोर्ट में जाने और अपने 108 विधायकों द्वारा इस्तीफा देने की बात कही। आइए आपको 4 आसान सवालों के जरिए बताते हैं कि तमिलनाडु में चुनाव के बाद सरकार बनाने को लेकर क्या नियम हैं? इसमें राज्यपाल की कितनी और क्या भूमिका है?

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अगर TVK अदालत का दरवाजा खटखटाती है तो न्याय मिलने की कितनी संभावना है? और यदि टीवीके के सभी 108 विधायक एक साथ इस्तीफा दे दें तो क्या होगा? भारत के संविधान में चुनावों को लेकर स्पष्ट नियम हैं। इसके तहत जिस भी दल के पास दो-तिहाई से अधिक बहुमत हो, वह राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश कर सकता है। तमिलनाडु में कुल 234 विधानसभा सीटें हैं। इस तरह जिस पार्टी के पास 118 सीटें हों, वह सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती है।

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हालांकि, राज्यपाल खुद भी सबसे बड़े दल को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं। समस्या यह है कि 2026 में हुए विधानसभा चुनाव में किसी भी दल के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है। TVK के पास सबसे अधिक 108, डीएमके 59, एआईएडीएमके 47, कांग्रेस 5, पीएमके 4, आईयूएमएल 2, सीपीआई 2, वीसीके 2, सीपीएम 2, बीजेपी 1, डीएमडीके 1 और अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम के पास एक सीट है। इनमें से कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है।

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इस प्रकार अब टीवीके के पास 113 विधायक हो गए हैं और वह बहुमत से केवल 5 सीट दूर है। टीवीके प्रमुख विजय 113 विधायकों का समर्थन लेकर राज्यपाल के पास सरकार बनाने का दावा करने गए थे। लेकिन राज्यपाल ने उन्हें यह कहकर लौटा दिया कि वे बहुमत के लिए जरूरी 118 विधायकों का समर्थन लेकर आएं। भारत के किसी भी राज्य में चुनाव परिणाम आने के बाद राज्यपाल सबसे पहले उस पार्टी/गठबंधन को राजभवन में बुलाते हैं जिसके पास स्पष्ट बहुमत होता है।

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किसी भी दल के पास पूर्ण बहुमत नहीं होने की स्थिति में राज्यपाल सबसे बड़े दल को सरकार बनाने और बहुमत साबित करने का मौका देते हैं। यदि बहुमत को लेकर संदेह हो, तो सरकार बनने के बाद उस दल को विधानसभा में फ्लोर टेस्ट पास करना होता है। जहां बहुमत साबित होने पर सरकार के गठन को राज्यपाल की स्वीकृति मिल जाती है, और अगर सत्ताधारी पार्टी बहुमत साबित करने में असमर्थ हो तो सरकारअल्पमत के कारण गिर जाती है।

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राज्यपाल सरकार बनाने वाले दल को बहुमत साबित करने के लिए न्यूनतम 48 घंटे और अधिकतम 12 से 14 दिन का समय देते हैं। हालांकि, भारतीय संविधान में राज्यपाल के लिए सरकार बनाने को लेकर कोई सख्त और निश्चित समय-सीमा तय नहीं की गई है। भारतीय राजनीति के इतिहास में दोनों ही तरह के उदाहरण मौजूद हैं, जब पूर्ण बहुमत नहीं होने के बावजूद सरकारों का गठन किया गया और वे फ्लोर टेस्ट में पास भी हुईं।

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वहीं, कई बार राजनीतिक दल सरकार बनने के बाद बहुमत साबित नहीं कर पाए और सरकार गिर गई। इसका सबसे बड़ा उदाहरण 1996 की एनडीए सरकार के गिरने को माना जाता है, जब प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार बहुमत साबित न कर पाने के कारण सिर्फ 13 दिन में गिर गई थी। इसके अलावा 1999 में भी अटल सरकार 13 महीने चलने के बाद सिर्फ एक वोट से बहुमत साबित नहीं कर पाई थी और एनडीए सरकार के हाथों से सत्ता चली गई थी।

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इसी तरह 2019 में देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार शिवसेना के साथ गठबंधन टूटने और एनसीपी द्वारा समर्थन वापस लेने के कारण गिर गई थी। भारतीय संविधान के अनुसार सरकार के गठन को लेकर हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के पास कोई औपचारिक शक्ति नहीं है। इसके अलावा कोर्ट राज्यपाल के कार्य में सीधे हस्तक्षेप करने से भी बचती है। लेकिन अगर अदालत को लगता है कि याचिका दायर करने वाले पक्ष को बहुमत साबित करने का मौका नहीं मिला है,

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तो वह राज्यपाल को विधानसभा में फ्लोर टेस्ट करवाने के लिए कह सकती है। सुप्रीम कोर्ट पहले के मामलों में आदेश दे चुकी है कि फ्लोर टेस्ट विधानसभा में होना चाहिए, न कि राजभवन में। इसलिए अगर टीवीके हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के पास जाती है, तो उसे विधानसभा में फ्लोर टेस्ट देने का मौका मिल सकता है। आमतौर पर किसी विधायक के इस्तीफा देने से उनकी सदस्यता तुरंत नहीं चली जाती।

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विधानसभा अध्यक्ष को देखना होता है कि इस्तीफा स्वेच्छा से दिया गया है या फिर किसी दबाव में। हालांकि, एक साथ 100 विधायकों के इस्तीफे के बाद भी सरकार बनाने के विकल्प मौजूद होते हैं। जैसे अगर टीवीके के 108 विधायक इस्तीफा दे दें, तो सदन में कुल सीटों की संख्या 234 से घटकर 126 रह जाएगी। इसके हिसाब से सरकार बनने के लिए 63 मतों की जरूरत होगी। 

ऐसे में राज्यपाल दूसरे दलों को सरकार बनाने के लिए बुला सकते हैं। लेकिन अगर राज्यपाल को लगता है कि एक संवैधानिक संकट है, तो वह राष्ट्रपति शासन लगाने या दोबारा चुनाव करवाने का प्रस्ताव राष्ट्रपति को भेज सकते हैं। जिसके बाद अंतिम फैसला राष्ट्रपति को लेना होता है। राष्ट्रपति चाहे तो राज्यपाल को सरकार गठन की प्रक्रिया फिर से शुरू करने का आदेश भी दे सकते हैं।

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