PTB Big न्यूज़ शिमला / कुल्लू : बर्फ और पहाड़ों के बीच छुटि्टयां एंजॉय करने के लिए हिमाचल प्रदेश में इस समय लोगों का जन सैलाव देखने को मिल रहा है, इस दौरान हिमाचल पहुंच रहे लोग ज्यादातर टूरिस्ट डेस्टिनेशन पैक हो चुके हैं। होटलों में 90% तक बुकिंग फूल है। शिमला, नारकंडा, कुफरी, मनाली, कसौली और अटल टनल रोहतांग में ज्यादा भीड़ देखने को मिल रही है। शिमला में तो 5 जून तक करीब 4 लाख गाड़ियां आ चुकी हैं। मनाली में भी रोजाना 3200 गाड़ियां पहुंच रही हैं।
.ऐसे में हिमाचल जाने से पहले सबके मन में सवाल है कि यहां ट्रैफिक के हालात क्या हैं, जाम तो नहीं लग रहा, पार्किंग मिलेगी या नहीं, होटलों में बुकिंग कैसे कराएं, सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं तो हैं कैसे। अगर शिमला और मनाली की बात करें तो सुबह शाम ट्रैफिक जाम की समस्या बढ़ती जा रही है। शिमला में ट्रैफिक जाम से बचने के लिए सुबह 8 से 10 बजे और शाम 5 से 8 बजे के बीच शहर में सफर करने से बचे। इस टाइम शिमला में ट्रैफिक जाम ज्यादा रहता है।
.खासकर वीकेंड पर शनिवार और रविवार को जाम ज्यादा परेशान करता है। मनाली में शाम 6 से 9 बजे के बीच हल्का ट्रैफिक जाम परेशान कर रहा है। रोहतांग टॉप पर दिन में वाहनों की संख्या अधिक होने के कारण ट्रैफिक जाम लग सकता है, क्योंकि यहां पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। इसलिए, कुछ टूरिस्ट सड़क किनारे अपने वाहन बेतरतीब पार्किंग कर देते हैं। इससे ट्रैफिक जाम ज्यादा परेशान करता है। इन सभी के बीच एसपी कुल्लू मदन वर्मा ने मीडिया के कुछ बंधुओं को बताया कि
.मनाली से अटल टनल तक लगभग 200 पुलिस व होमगार्ड जवान ट्रैफिक संभालने को तैनात कर दिए गए है। एक और फोर्स जल्द तैनात की जाएगी। इसलिए, टूरिस्ट को ट्रैफिक जाम परेशान नहीं करेगा। चंबा के डलहौजी, नारकंडा, कसौली और कसोल में ज्यादा ट्रैफिक जाम नहीं रहता। कुफरी में दिन के समय हल्का ट्रैफिक जाम लगता है, क्योंकि यहां पार्किंग की सुविधा नहीं है और टूरिस्ट अपने वाहन सड़क किनारे पार्क कर देते है। इससे हल्का ट्रैफिक जाम लग सकता है।
.वहीं शिमला में आने वाले टूरिस्ट सुबह 8 बजे से पहले, या सुबह 11 से दोपहर बाद 4 बजे तक या फिर रात 9 बजे के बाद शिमला आएंगे तो ट्रैफिक ज्यादा परेशान नहीं करेगा। वहीं मनाली में भी टूरिस्ट दोपहर बाद 4 बजे तक आसानी से पहुंच सकते हैं। इसके बाद, बीच बीच में हल्का ट्रैफिक जाम लग सकता है। बर्फ देखने की चाहत में टूरिस्ट रोहतांग और बारालाचा जा रहे हैं। इन जगह जाने के लिए टूरिस्ट को मनाली से सुबह पांच से छह बजे निकलना बेहतर रहेगा,
.ऐसा करने से ट्रैफिक जम नहीं लगेगा और टूरिस्ट समय पर रोहतांग पहुंच सकेंगे। इससे रोहतांग में दिनभर मस्ती करने के बाद टूरिस्ट शाम को समय पर वापस मनाली लौट सकेंगे। इसके साथ ही कुफरी और नारकंडा के लिए भी सुबह 6 से 8 बजे के बीच शिमला से निकलना बेहतर रहेगा। इसके बाद शिमला शहर का जाम परेशान कर सकता है। कुफरी से शिमला लौटते वक्त शाम को ट्रैफिक जाम परेशान कर रहा है। ऐसे में यदि टूरिस्ट को दोपहर तीन से पांच बजे के बीच शिमला लौट जाते है तो
.ट्रैफिक ज्यादा दिक्कत नहीं होगी। वहीं पहाड़ों पर पार्किंग सबसे बड़ी समस्या है। शिमला शहर के ज्यादातर होटल में पार्किंग नहीं है। इसलिए, टूरिस्ट को कई बार सड़क किनारे ही गाड़ियां पार्क करनी पड़ती हैं। शिमला में लिफ्ट के पास नगर निगम की 2 बड़ी पार्किंग हैं। यहां पर 3,000 से ज्यादा गाड़ियां पार्क करने की सुविधा है। शिमला के अलावा संजौली और बालूगंज क्रांसिंग में दोनों जगह लगभग 4500 गाड़ियों की पार्किंग की सुविधा है।
.मनाली में फायर स्टेशन के पास लगभग 800 वाहन, भूतनाथ मंदिर के पास 500 वाहन, मिशन अस्पताल के साथ 300 वाहनों की पार्किंग के अलावा भी शहर में नगर परिषद ने छोटी-छोटी पार्किंग बना रखी हैं। इसी तरह, मनाली के ज्यादातर होटलों ने भी अपनी पार्किंग बना रखी है। लिहाजा यहां पार्किंग की ज्यादा समस्या नहीं है। रोहतांग में पार्किंग नहीं है, यहां सड़क किनारे गाड़ियां पार्क करनी पड़ती है। डलहौजी, कसौली, कसौल और नारकंडा में पार्किंग की ज्यादा समस्या नहीं है।
.यहां के होटलों में पार्किंग की सुविधा उपलब्ध है। इसके साथ ही कुफरी में जरूर पार्किंग की दिक्कत है, लेकिन यहां बाइपास सड़क चौड़ा है। यहां पर 150 से ज्यादा गाड़ियां सड़क किनारे लग जाती है। यही नहीं टूरिस्टों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हिमाचल पुलिस ने राज्य के विभिन्न पर्यटन स्थलों पर टूरिस्ट सीजन को देखते हुए 800 से ज्यादा पुलिस जवान तैनात कर रखे है। हालांकि, मई के आखिरी सप्ताह में राज्य में पंचायत चुनाव के कारण लॉ एंड ऑर्डर और
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ट्रैफिक को लेकर कुछ परेशानी जरूर हुई थी। मगर चुनाव संपन्न होते ही मनाली, शिमला, कुफरी, नारकंडा, डलहौजी, कसौली और रोहतांग इत्यादि पर्यटन स्थलों पर पुलिस जवान तैनात कर दिए हैं। हिमाचल पुलिस का कहना है कि टूरिस्टों की सुरक्षा के पूरे इंतजाम हैं। हिमाचल प्रदेश के अधिकांश पर्यटन स्थलों में 80 से 90 फीसदी ऑक्यूपेंसी हो गई है। शिमला के होटेलियर अश्वनी सूद ने बताया कि शनिवार को 80 से 85 फीसदी ऑक्यूपेंसी हो गई है। रविवार शाम तक इसके 90 फीसदी होने
के आसार है। कसौली के होटेलियर राजेंद्र चोपड़ा ने बताया कि सोमवार से शुक्रवार तक 50 से 60 फीसदी ऑक्यूपेंसी थी, मगर वीकेंड पर 80 से 85 फीसदी हो गई है। इस दौरान मनाली होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष रोशन ठाकुर ने बताया कि पर्यटन नगरी मनाली में 90 फीसदी से अधिक ऑक्यूपेंसी हो गई है। कसोल व डलहौजी में 70 फीसदी, कुफरी और नारकंडा के होटलों में भी 80 से 85 फीसदी ऑक्यूपेंसी हो गई है। इसलिए, लेट नाइट आने वाले टूरिस्ट को ऑनलाइन एडवांस बुकिंग करके
आना चाहिए, ताकि देर रात पहुंचने से कमरों की बुकिंग में परेशानी न हो। उन्होंने आगे यह भी बताया कि समर सीजन में मनाली और शिमला सबसे महंगे टूरिस्ट डेस्टिनेशन है। इन दोनों जगह 1500 से 15 हजार रुपए तक कमरें उपलब्ध है। पर्यटन सीजन पीक पर होने की वजह से इन दिनों कोई डिस्काउंट नहीं है। कुफरी, नारकंडा और कसौली में 1400 से 8000 रुपए में होटलों में कमरें मिल जाते है। इन जगह ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ लोगों ने होम स्टे बना रखे है।
होम स्टे में 1200 से 4500 रुपए के हिसाब से कमरें मिल जाते है। हिमाचल सरकार ने सभी होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट 24 घंटे खुला रखने की छूट दे रखी है। इसलिए, राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर टूरिस्ट को खाने-पीने में कोई परेशानी नहीं होगी। हालांकि, रोहतांग दर्रा में होटल-ढाबे नहीं है। इससे यहां लंच में दिक्कत हो सकती है, लेकिन यहां पर काफी संख्या में लोकल लोग टैम्परेरी शेड में मैगी, बिस्किट, चाय, बंद, ब्रेड इत्यादि रखते है। कुछ लोकल लोग फूड वैन लेकर भी रोहतांग पहुंचते हैं,
ऐसे में कुछ लोगों को फूड वैन से भी खाना मिल सकता है। नारकंडा, कुफरी, डलहौजी, मनाली, शिमला इत्यादि पर्यटन स्थलों में खाने-पीने की कोई समस्या नहीं है। इन जगह पर्याप्त संख्या में होटल, ढाबे, रेस्टोरेंट मौजूद है। मनाली और शिमला में सबसे ज्यादा भीड़ है। मनाली में भीड़ की बड़ी वजह रोहतांग, बारालाचा, अटल टनल जाने वाले टूरिस्ट है, क्योंकि इन तीनों जगह ठहरने की व्यवस्था नहीं है। इसलिए टूरिस्ट नाइट स्टे के लिए मनाली लौटते है। शिमला के कुफरी, महासू पीक और
नारकंडा जाने वाले अधिकांश टूरिस्ट भी रात को वापस शिमला लौटते है और सुबह शिमला से इन पर्यटन स्थलों को जाते है। इस वजह से शिमला में ट्रैफिक जाम की स्थिति भी बनी रहती है। अगर आप पंजाब से डलहौजी, बनीखेती, चंबा, भरमौर, धर्मशाला और कांगड़ा आने वाले टूरिस्ट पठानकोट-चंबा-कांगड़ा नेशनल हाइवे से निकलें तो हिमाचल की तरफ कम ट्रेफिक से बच सकते हैं? मनाली और रोहतांग के लिए कीरतपुर-मनाली फोरलेन से पहुंचा जा सकता है। इसी तरह, चंडीगढ़ से
शिमला, कुफरी, नारकंडा और कसौली के लिए पर्यटक नेशनल हाइवे-5 चंडीगढ़-सोलन-शिमला-रामपुर से आ सकते हैं। कुफरी और नारकंडा जाने वाले टूरिस्ट को शिमला के ट्रैफिक जाम से बचने के लिए शोघी-आनंदपुर-मैहली-भट्टाकुफर सड़क के इस्तेमाल की सलाह दी जाती है। नारकंडा और फागू से जो टूरिस्ट वापस चंडीगढ़ लौट रहे हैं, उन्हें भी शोघी-आनंदपुर-मैहली-भट्टाकुफर सड़क से सफर करना चाहिए। ऐसा करके से शिमला शहर के भीतर ट्रैफिक जाम से नहीं जूझना पड़ेगा।








































