PTB News “शिक्षा” : भारत की विरासत एवं ऑटोनॉमस संस्था, कन्या महाविद्यालय, जालंधर के पोस्टग्रैजुएट डिर्पाटमैंट आफ साइकोलॉजी के द्वारा हैल्थ साइकोलॉजी विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वर्कशाप का आयोजन करवाया गया। के.एम.वी. तथा ईटोवास लोरेंड यूनिवर्सिटी, बुडापेस्ट हंगरी के साथ एम.ओ.यू. के अंतर्गत इसी संस्था से डॉ. रॉबर्ट अर्बन, प्रोफैसर हैल्थ साइकोलॉजी ने इस वर्कशाप के पहले दिन डॉ. रॉबर्ट ने छात्राओं को संबोधित होते हुए विस्तार सेहत हैल्थ साइकोलॉजी की अवधारणा को स्पष्ट किया और साथ ही प्रत्येक व्यकित को दृष्टिकोण के अनुसार सेहत के अर्थ व महत्व को समझाया।
इसके इलावा छात्राओं के साथ साइकोलॉजी विषय के अध्ययन के विभिन्न कारण सांझा करने के इलावा हैल्थ साइकोलॉजिस्ट की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। इसके साथ ही उन्होंने छात्राओं को सेहत सूचक व विभिन्न सेहत माडल्स की ६ मूल अवधारणाओं से भी वाकिफ करवाया। वर्कशाप के दूसरे दिन डॉ. रॉबर्ट ने संबोधित होते हुए तनाव, सेहत एवं प्रतियोगिता जैसे विषयों को छूने के साथ-साथ दो व्यवहारिक गतिविधियां जैसे रेकान मेडिटेशन के आयोजन के साथ-साथ छात्राओं को मानवीय शरीर के उन हिस्सों की पहचान करने के लिए कहा जो चिंता, डर जैसी तनावपूर्ण प्रतिक्रियाएं पैदा करते हैं।
इसके इलावा उन्होंने प्राबलम ओरियंटेशन की बात करते हुए इसके सकारात्मक एवं नकारात्मक पहलुओं पर छात्राओं का ध्यान केंद्रित करते हुए किसी के व्यवहार पर इसके असर के बारे में भी बात की। वर्कशाप की तीसरे व अंतिम दिन डॉ. रॉबर्ट ने हैल्थ साइकोलॉजी के साथ संबंधित महत्वपूर्ण विषय जैसे रिलैकसेशन तकनीक, तनाव को जीवन में से खत्म करने के लिए ध्यान की जरुरत आदि के इलावा किसी भी समस्या के समाधान के लिए उचित तकनीकों के उपयोग के साथ-साथ रोजाना जीवन में चुनौतियों को खत्म करने के संबंध में विस्तार सहित बात की।
विद्यालय प्रिंसीपल प्रो. अतिमा शर्मा द्विवेदी ने इस वर्कशाप के द्वारा छात्राओं को महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करने के लिए डॉ. रॉबर्ट अर्बन के प्रति आभार व्यकत करने के साथ-साथ बताया कि कन्या महाविद्यालय के द्वारा अपनी छात्राओं के सर्वपक्षीय विकास के मद्देनजर उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतर्रष्ट्रीय स्तर का एकसपोकार प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयास किए जाते रहते हैं।आगे बात करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन जहां दोनों संस्थाओं की विद्यार्थियों के विकास के प्रति निष्ठा एवं समर्पण को दर्शाते हैं वहीं साथ ही उनके ज्ञान के घेरे को और अधिक विशाल करने के इलावा उन्हें वैश्विक स्तरीय नागरिक बनाने में भी मददगार साबित होते हैं। इसके साथ ही उन्होंने इस सफल आयोजन के लिए साइकोलॉजी विभाग के समूह प्राध्यापकों के द्वारा किए जा रहे प्रयत्नों की प्रशंसा की।





































