PTB News Live जालंधर : पंजाब में बजट से पहले उद्योगपतियों की राय और सुझाव लेने के लिए पंजाब सरकार आज जालंधर पहुंची है। पंजाब सरकार ने उद्योगपतियों की जहां मांगें मानी हैं, वहीं पर जालंधर शहर के लिए कई सौगातें भी दी हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक एवं दिल्ली के CM अरविंद केजरीवाल ने जालंधर में उद्योगपतियों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं भी सुनी।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि जब वह सत्ता में आए को रिवायती पार्टियों के नेताओं का कहना था कि इनके पास तजुरबा नहीं है। वह बिल्कुल सही कहते थे हमारे पास तजुरबा नहीं था। उनके पास रेत की खड्डों, ट्रांसपोर्ट में हिस्सा कैसे डाला लोगों की ट्रांसपोर्ट को कैसे दबाना है इसका तजुरबा नहीं है।
.मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी का हाईवे पर अच्छा खासा ढाबा चल रहा था तो रिवायती सरकारों के नेता कहते थे कि ढाबा उन्हें बेच दे। यदि ढाबे वाले ने मना किया तो ऊपर से फ्लाई ओवर ब्रिज बना दिया। मुख्यमंत्री के कहा कि उनके पास ऐसा तजुरबा नहीं है। उनके पास तजुरबा है स्कूल बनाने, रोजगार देने, उद्योगों को ऊपर उठाने, पंजाब की किसानी और जवानी को बचाने का।
.मुख्यमंत्री ने कहा कि पुरानी सरकारों के पास कोई विजन नहीं था। उनके पास एक ही विजन था कि पैसा कैसे बनाना है। उन्होंने लूटतंत्र पंजाब में जमकर चलाया। उद्योगपतियों को डराया जाता था। उनसे डराकर वसूली की जाती थी। उन्होंने अपरोक्ष रूप से सुखबीर बादल पर हमला बोलते हुए कहा कि वह कहीं पर शौच के लिए रूके। उद्योगपति उन्हें बता बैठा कि उसे धंधे में प्रॉफिट है। उसे वहीं कह दिया एक रुपया उसका हिस्सा होगा।
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उन्होंने कहा कि पंजाब में एेसे हालात बना दिए गए थे कि लोग सफलता से भी डरने लगे थे। उन्होंने कहा कि 2017 में विधानसभा चुनाव के दौरान वह मोरिंडा में एक ढाबे पर खाना खाने रुके। ढाबे का मालिक भी उन्हें देखकर आ गया। मैंने वैसे ही पूछा बहुत अच्छा ढाबा बना है कैसे चल रहा है। बोला-बस जी दो वक्त की रोटी चल रही है। यदि कह दिया कि अच्छा चल रहा है तो हिस्सा डालने वाले पहुंच जाएंगे।
.भगवंत मान ने कहा कि पिछले सरकारों को समय में हजारों-लाखों घरों को रोशन कर उनके चूल्हे चलाने वाले उद्योगपतियों को चोर कहा जाता था। जितनी भी पाबंदियां होती थी वह उद्योगपतियों के पर थोंप दी जाती थी। बिजली नहीं मिलती थी।। उन्होंने कहा कि अब बिजली उद्योगों को कैसे मिल रही है। पैडी के सीजन में भी कट नहीं लगने दिए। यह इसलिए हुआ क्यों कि हमारी नियत साफ थी।
.उन्होंने कहा कि झारखंड में पंजाब सरकार की अपनी कोल माइन है। यह कोल माइन नेताओं की जेब आसपास की कंपनियों से कमिशन के पैसे जेब में आने के कारण साल 2015 से बंद पड़ी थी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने माइन को चला दिया है। पंजाब के थर्मल प्लांट्स को सप्लाई के बावजूद इतना कोयला है कि अब उसे प्राइवेट सेक्टर में उद्योगों को भी बेचने की प्लानिंग कर रहे हैं।
.मुख्यमंत्री की फाइनेंस इरेगुलैरिटी का खामियाजा पंजाब को भुगतना पड़ रहा है। पूर्व सरकार ने रुरल डेवलपमेंट का फंड जहां पर खर्च करना था वहां पर नहीं लगाया और उसे दूसरे स्थानों पर खर्च कर दिया। जिसकी वजह के केंद्र पास 4 हजार करोड़ रूपया RDF का फंसा हुआ है। उन्होंने कहा कि यह पैसा मंडियों के रखरखाव और मंडियों को जाती सड़कों पर खर्च होना था।
.जालंधर के उद्योगपतियों ने सरकार के मिलनी कार्यक्रम के पहले अपना मिलनी कार्यक्रम आयोजित किया और इंडस्ट्री में जो उन्हें दिक्कतें पेश आ रही हैं उन पर चर्चा की। उद्योगपतियों ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के समक्ष अपनी मांगें रखी।
खेल उद्योग से जुड़े उद्योगपतियों का कहना है कि विधानसभा चुनाव के दौरान भी भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल ने उद्योगपतियों से मुलाकात की और विजन डाक्यूमेंट तैयार करने के लिए उनसे सुझाव मांगे थे। इसी दौरान आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने जालंधर की खेल इंडस्ट्री को बूस्ट करने के लिए यहां पर खेल यूनिवर्सिटी खोलने की गारंटी दी थी। लेकिन वह अभी तक नही खुल पाई है।
उद्योगपतियों का कहना है कि सरकार ने वादा किया था कि राज्य में इंस्पेक्टरी राज खत्म कर दिया जाएगा। लेकिन वह आज भी वैसे ही चल रहा है। जीएसटी की छापेमारी का क्रम लगातार जारी है। वैट का मुद्दा अब भी जस का तस है। वन टाइम सेटलमेंट पॉलिसी का आश्वासन दिया था लेकिन उसमें कोई प्रगति नहीं हुई। अब भी उद्योगपतियों को वैट के पुराने खातों के नोटिस मिल रहे हैं।
उद्योगपतियों का कहना है कि उद्योगों में उन्हें प्रदूषण नियंत्रण विभाग से मंजूरी लेने के लिए बार-बार धक्के खाने पड़ते हैं। उद्यमियों का कहना है कि सरकार प्रदूषण नियंत्रण विभाग में भी वन टाइम सेटलमेंट पॉलिसी लागू करे। इसके अलावा जो रेड कैटेगरी के जो उद्योग हैं उनके लिए अलग से इंडस्ट्रियल एरिया डेवलप करे। हालांकि नकोदर रोड पर जो जमीन देखी गई थी उस पर उद्योगपति सहमत नहीं थे।
उद्योगपतियों का कहना है कि जिस तरह से इंडस्ट्री बढ़ रही है उसके लिए एक नए फोकल पॉइंट की आवश्यकता है। ताकि उद्योगों का विस्तारी करण हो सके। जो उद्योग रिहाइशी इलाकों में हैं उन्हें वहां से बाहर निकाला जा सके। खेल, रबड़, चप्पल, सैनिटरी का सामान बनाने वाले उद्योगों को थ्रस्ट इंडस्ट्री की कैटेगरी में डाला जाए।
उद्योगपतयों का कहना है कि पावरकॉम ने शाम को 6 बजे से लेकर रात को 10 बजे कर पीक ऑवर्स घोषित कर रखे हैं। इस दौरान यदि कोई उद्योग ज्यादा बिजली कन्ज्यूम करता है तो उसे 2 रुपए प्रति यूनिट जुर्माना लगाया जाता है। उद्योगपतियों का कहना है कि इसी दौरान कुछ मशीनरी ऐसी है है जिसे रनिंग में रखना पड़ता है। उद्योगों में ही जो कामगार रहते हैं उनके घरों में बिजली देनी पड़ती है। दफ्तरों में बिजली का उपयोग होता है। उन्होंने कहा कि पावरकॉम के इस नियम को बदलने की जरूरत है।






































