PTB Big न्यूज़ चंडीगढ़ : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरुवार (10 सितंबर) को डीए मामले में आदेश की पालना न करने पर पंजाब सरकार को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि सरकार को फैसले को चुनौती देने का पूरा अधिकार है, लेकिन अपील दायर करने के नाम पर पहले से जारी आदेश की पालना नहीं रोकी जा सकती। इस तरह की सभी रणनीतियों को हम भी समझते हैं, अदालत ने सरकार से कहा कि वह कानूनी प्रक्रिया के साथ खेल खेलना बंद करे और
.अपनी अपील को आगे बढ़ाए। सुनवाई के दौरान बताया गया कि मामले में 95 साल तक की उम्र के बुजुर्ग भी शामिल हैं। सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील की खामियां दूर की जा रही हैं। इस पर हाईकोर्ट ने अपील की प्रक्रिया जल्द पूरी करने और सुनवाई करवाने पर जोर दिया। कोर्ट ने पंजाब सरकार को 10 दिन का समय देते हुए सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील पर सुनवाई करवाने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि 10 दिन में सुनवाई नहीं होती है
. .तो हाईकोर्ट मामले को अपने स्तर पर आगे सुनेगा। मामला हाईकोर्ट के 3 अगस्त के उस आदेश की पालना से जुड़ा है, जिसमें पंजाब सरकार और पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) को केंद्र की दरों के अनुसार डीए की लंबित किस्तों का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट किया कि किसी न्यायिक आदेश को चुनौती देने का उसे पूरा अधिकार है, लेकिन अपील दायर करने के बावजूद पहले से जारी आदेश की पालना को लंबित नहीं रखा
.जा सकता। अदालत ने राज्य सरकार से कहा कि अगर वह 90 दिन की अपील अवधि का हवाला दे रही है, तो उसे यह भी बताना होगा कि इस दौरान अदालत के पहले से जारी निर्देशों का क्या होगा। अपील दायर करने के नाम पर पहले से जारी आदेश की पालना नहीं रोकी जा सकती। वह अदालत के साथ खेल खेलना और कानूनी प्रक्रिया में चालें चलना बंद करे। वहीं सरकार की ओर से बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की जा चुकी है और इसमें बताई गई
. .खामियां दूर करने की प्रक्रिया चल रही है। इस पर कोर्ट ने कहा कि अपील को आगे बढ़ाया जाए, खामियां दूर की जाएं और जल्द सुनवाई सुनिश्चित की जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी भी पक्ष के अपील करने के अधिकार को सीमित नहीं करना चाहती, लेकिन कानून के तहत उपलब्ध उपाय का इस्तेमाल करना जरूरी है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने मामले में पहले से लंबित अवमानना कार्रवाई का भी हवाला दिया। बताया गया कि मूल याचिकाकर्ताओं की ओर
.से अवमानना याचिका दायर की जा चुकी है और उस पर सुनवाई लंबित है। राज्य सरकार ने आशंका जताई कि अलग-अलग कार्रवाई के कारण मामले में अनावश्यक रूप से कई मुकदमे खड़े हो सकते हैं। इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि राज्य सरकार को मूल आदेश पर आपत्ति है तो वह अपनी अपील पर सुनवाई करवाए। अदालत ने कहा कि किसी पक्ष को सिर्फ इसलिए न्यायिक आदेश की पालना से नहीं रोका जा सकता कि उसने उसके खिलाफ अपील दायर
कर दी है। सुनवाई के दौरान आवेदकों की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि मामले में 95 साल तक की उम्र के बुजुर्ग लोग शामिल हैं। ऐसे में मामले की कार्रवाई में अनावश्यक देरी उनके लिए परेशानी का कारण बन सकती है। अदालत ने सभी पक्षों को कानून के मुताबिक आगे बढ़ने और लंबित कार्रवाई को जल्द निपटाने की दिशा में कदम उठाने के लिए कहा। तीखी टिप्पणी करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि यदि सरकार को उसके फैसले से आपत्ति है तो
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वह कानून के तहत उचित मंच पर इसे चुनौती दे। अदालत ने कहा कि ट्वीट के जरिए हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने के बजाय सरकार को ठोस कार्रवाई करके दिखानी चाहिए। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को 10 दिन का समय देते हुए इस अवधि में सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील पर सुनवाई करवाने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि 10 दिन में सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई नहीं होती है तो इसके बाद हाईकोर्ट मामले को अपने स्तर पर आगे सुनेगा।






























