PTB Big न्यूज़ जालंधर : जालंधर में तहसील के अधिकारियों-कर्मचारियों एजेंटों और प्रॉपर्टी डीलर ने आपसी मिलीभगत से एक ही प्लाट को धोखाधड़ी कर आगे 2 बार बेच डाला। प्लाट की 2 बार रजिस्ट्री के बाद राजस्व रिकार्ड में 2 बार इंतकाल भी चढ़ गया, लेकिन असली मालिकों को इसी भनक तक नहीं लगी। इस बात का खुलासा तब हुआ जब मालिक प्लाट की फर्द लेने तहसील में पहुंचा। उन्हें वहां पर जाकर पता चला कि उनका प्लाट तो बिक चुका है। हैरानी और मिलीभगत की हद तो यह है कि बुजुर्ग दंपती ने इसकी एसएसपी जालंधर देहात को शिकायत भी दी थी, लेकिन पुलिस ने भी कोई कार्रवाई नहीं की।
.वहीं बुजुर्ग दंपती एयरफोर्स से रिटायर इंजीनियर सोहन सिंह और उनकी पत्नी सतनाम कौर ने बताया कि उन्होंने 2013 में गांव मुबारकपुर में 18 मरले का एक प्लाट खरीदा था। इसे पम्मा नामक प्रॉपर्टी डीलर के माध्यम से सुदर्शन सिंह निवासी गांव ढडे (पिंड हजारा) से खरीदा था, लेकिन प्रॉपर्टी डीलर पम्मा और सुदर्शन ने तहसील में मिलीभगत कर कोरोना काल में उनका प्लाट धोखाधड़ी से आगे दो लोगों को बेच दिया, पिछले 26 अप्रैल को उन्होंने उनके साथ हुई धोखाधड़ी की शिकायत एसएसपी देहात के दफ्तर में दी थी। एसएसपी ऑफिस से उसे तुरंत कार्रवाई के लिए करतारपुर पुलिस थाने को भेजा गया था, लेकिन डेढ़ साल से आरोपियों को पुलिस नहीं पकड़ पाई है न ही कोई कार्रवाई हुई है।
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वहीं आरोपी शहर में खुलेआम बिना किसी डर के घूम रहे हैं, जबकि वह कई बार थाने में अधिकारियों के पास चक्कर लगा बैठे हैं। यह मिलीभगत नहीं तो और क्या है कि तहसील में रजिस्ट्री के वक्त रजिस्ट्री क्लर्क से लेकर नीचे अर्जी नवीस तक ने रजिस्ट्री लिखने पढ़ने से पहले दस्तावेज बिना चेक किए आगे सरका दिए। वैसे तो तहसील में बिना एनओसी के रजिस्ट्री नहीं होती तो फिर इस जमीन की NOC किस पटवारी ने जारी की, किसने यह जाली तरीके से NOC बनाकर दी। सीनियर सिटीजन की श्रेणी में आती महिला सतनाम कौर ने बताया कि उन्हें जब धोखाधड़ी होने का पता चला तो वह तहसीलदार के ऑफिस में भी गए थे।
.उन्होंने तत्कालीन तहसीलदार को सारी बात भी बताई, लेकिन वहां से उन्हें कहा गया कि आपको कोर्ट जाना पड़ेगा। हैरानी जनक है कि तहसील ऑफिस की गलती के लिए इंसाफ मांगने के लिए अब बुजुर्ग महिला को कोर्ट के चक्कर काटने पड़ेंगे। आपको यह भी बता दें कि कि 3 साल पहले जब कोरोना महामारी आई तो सुदर्शन सिंह ने प्रॉपर्टी डीलर पम्मा के साथ मिलकर बुजुर्ग महिला सतनाम कौर का 18 मरले का प्लाट पहले राजपाल नामक व्यक्ति को बेच दिया। इसके बाद राजपाल ने भी आगे इसे विशाल नामक व्यक्ति को बेच डाला।
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यह पहला मामला नहीं है जब इस तरफ से प्रॉपर्टी डीलर व तहसीलदार व अधिकारीयों की मिली भगत से किसी को मोटा चुना लगा हो, इससे पहले भी कई ऐसे मामले हैं जो आज भी शहर में चर्चा का विषय बने हुए हैं, और आज तक वह पुलिस अधिकारीयों की जाँच में चल रहे हैं। वहीं ऐसे कैसे में कई जालसाजों को बीते दिनों ही विजिलेंस ने उठाया भी था और बाद में उनको जमानत मिल गई थी, वहीं पुलिस अधिकारीयों की जाँच की बात करें तो पुलिस अधिकारीयों को ना तो इस मामले में कोई जानकारी है और ना ही वह ऐसे मामलों में ज्यादा रूचि दिखते हैं जिसकी वजह से उनके नीचे के मुलाजिम इसका भरपूर फायदा उठाते हुए, गुनहगारों को को बचाते रहते हैं और वह शहर में और जालसाजी के धंधे शरेआम करते रहते हैं। फिर उम्मीद भी किस्से रखी जा सकती है।
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