PTB News “शिक्षा” : भारत की विरासत एवं ऑटोनॉमस संस्था, कन्या महाविद्यालय,जालन्धर के संस्कृत विभाग द्वारा महर्षि सान्दीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान, उज्जैन के साथ संयुक्त रूप से वेदों में आदर्श समाज की अवधारणा विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन करवाया गया। ज्योति प्रज्वलन के साथ प्रारंभ हुई इस ऑनलाइन संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में प्रो. शिवानी शर्मा, अध्यक्षा, दर्शनशा विभाग, पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।
इसके साथ ही डॉ. विरुपाक्ष जड्डीपाल, महर्षि सान्दीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान, उज्जैन के साथ-साथ प्रो. राजेश्वर मिश्र, कुरुक्षेत्र ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की। विद्यालय प्रिंसीपल प्रो. अतिमा शर्मा द्विवेदी ने समूह अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि अकादमिक मंचों पर इस प्रकार के विचार मंथन से निश्चित ही भारत विश्व स्तर पर विश्व शांति और वसुदेव कुटुंबकम की अवधारणा का संदेश एक बार फिर से प्रसारित करने के दायित्व को निभाने में सक्षम होगा।
प्रोग्राम में वक्ता के रूप में उपस्थित प्रो. राजेश्वर मिश्र ने अपने वक्तव्य में वेदों के विभिन्न मंत्रों की उदाहरण देते हुए सामाजिक जीवन के लक्ष्य को बनाने के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता के लिए वेदों के परिपेक्ष्य को स्पष्ट किया। इसके साथ ही प्रो. शिवानी ने अपने संबोधन में कहा कि निश्चित ही भारत ने एक समृद्ध वैदिक सामाजिक संस्कृति का अनुपालन हजारों वर्षों तक किया और आज भी उसके जीवन्त तन्तु हमारे समाज और संबंधों में मिल जाते हैं परंतु वर्तमान भौतिक और पूंजीवादी जीवन दृष्टि से अभिभूत वर्तमान समाज के समक्ष अनेक चुनौतियां और संगट है जिन्हें समझने और सुलझाने की जिम्मेदारी संस्कृति विशेषज्ञों पर है।
महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान उज्जैन से सम्मिलित हुए प्रो. विरुपाक्ष ने इस संस्था द्वारा वैदिक साहित्य के प्रचार एवं प्रसार के लिए किए जा रहे कार्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पूरे विश्व के महापुरुषों, बुद्धिजीवियों और महान प्रतिभाओं ने वेदों से भौतिक जगत और उसके पार मानव जीवन को उच्चतर आयामों की ओर ले जाने की दिशा दृष्टि पाई है। आधुनिक युग में भारतीयों और समस्त संस्कृत विशेषज्ञों का यह दायित्व है कि वह वेदों के तर्क और मानवीय मूल्यों को विश्व में प्रसारित करने में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
इस प्रोग्राम में मौजूद प्रो. लेखराम, पूर्व अध्यक्ष संस्कृत विभाग, गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर ने अपने संबोधन को पूर्ण रोचक ढंग से पेश करते हुए वेदों की सामान्य जीवन में प्रासंगिकता पर विचार सांझे किए। उल्लेखनीय है कि इस संगोष्ठी में सारा दिन चले 3 तकनीकी सत्रों में संगोष्ठी के विषय के विभिन्न पहलुओं को शोध वक्ताओं के द्वारा प्रस्तुत किया गया तकनीकी सत्रों के पश्चात रिसर्च पेपर प्रेजेंटेशन में 80 शोध पत्र पढ़े गए। विद्यालय प्रिंसीपल प्रो. अतिमा शर्मा द्विवेदी ने संगोष्ठी के पहले दिन के सफल आयोजन के लिए डॉ. नीरज शर्मा, अध्यक्षा, संस्कृत विभाग एवं समूह आयोजक मंडल के द्वारा किए गए प्रयासों की प्रशंसा की।





































