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15 अगस्त के पास आते ही फिर से एक्टिव हुए खालिस्तानी समर्थक, लगाए ‘किल इंडिया’ के नारे,

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PTB Big न्यूज़ कनाडा / अमृतसर : 15 अगस्त के पास आते ही कनाडा की धरती में एक बार फिर से खालिस्तान समर्थन में आवाजें उठनी शुरू हो गई है। अमेरिका में बैठ भारत में आतंक फैलाने वाले सिख फॉर जस्टिस के आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने बीते दिन कनाडा के कैलगरी में रेफरेंडम-2020 को आयोजन करवाया, जिसमें खालिस्तानी समर्थकों ने पहुंचकर भारत को तोड़ने के लिए वोटिंग की और कनाडा में किल इंडिया व दिल्ली बनेगा खालिस्तान के नारे भी लगाए।

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कनाडा में ये रेफरेंडम सरकारी बिल्डिंग म्यूनिसिपल प्लाजा में किया गया। कनाडा में इसका विरोध भी किया गया, लेकिन कनाडाई अथॉरिटी ने इसमें हस्ताक्षेप करने से मना कर दिया । कनाडा मीडिया द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार स्थानीय मेयर गोंडेक ने कहा कि वह जनमत संग्रह को एक वैध लोकतांत्रिक अभ्यास के रूप में देखती हैं, जिसे मंजूरी देने या प्रतिबंधित करने का उनके कार्यालय के पास कोई अधिकार नहीं है। जनता किसी भी समय म्यूनिसिपल प्लाजा में इकट्ठा हो सकती है। वे जो चाहें कर सकते हैं।

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कनाडा में करवाए गए रेफरेंडम में भारत विरोधी नारे भी लगे। ये पूरा कार्यक्रम कनाडाई पुलिस की देख रेख में हुआ। लेकिन भारत विरोधी नारों को भी रोका नहीं गया। यहां वोट डालने के लिए पहुंचे खालिस्तानी समर्थकों ने खुल कर किल इंडिया और दिल्ली बनेगा खालिस्तान के नारे लगाए। सिख फॉर जस्टिस यानी SFJ सिखों के लिए अलग खालिस्तान की मांग करने वाला एक संगठन है। 2007 में अमेरिका में इसकी स्थापना की गई थी। गुरपतवंत सिंह पन्नू SFJ के संस्थापकों में से एक है। SFJ अपने अलगाववादी अभियान

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‘रेफरेंडम 2020’ के तहत पंजाब को भारतीय से मुक्त कराने की बात करता है। SFJ ने अपने अगस्त 2018 में लंदन डिक्लेरेशन में भारत से अलग होने और पंजाब को एक स्वतंत्र देश के रूप में फिर से स्थापित करने के सवाल पर दुनिया भर में रहने वाले सिख समुदाय के बीच पहला जनमत संग्रह कराने की घोषणा की थी। SFJ ने नवंबर 2020 में जनमत संग्रह के लिए वोटिंग कराने की बात कही थी।

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पंजाब के साथ-साथ नॉर्थ अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, केन्या और मध्य-पूर्वी देशों के प्रमुख शहरों में इसे आयोजित करने की योजना बनाई थी। ‘रेफरेंडम 2020’ नाम से बाकायदा एक वेबसाइट बनाई गई थी। इसमें लिखा था- एक बार जब भारत से आजादी को लेकर पंजाबी लोगों के भीतर आम सहमति बन जाएगी तो हम पंजाब को एक देश के रूप में एस्टैब्लिश करने के लक्ष्य के साथ संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय निकायों से संपर्क करेंगे।

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