PTB Big News चंडीगढ़ : चंडीगढ़ में बिजली संकट के बादल छंटने लगे हैं। हड़ताल से पूरे चंडीगढ़ में ब्लैकआउट हो गया था। प्रशासन ने हरियाणा-पंजाब और हिमाचल प्रदेश से भी मदद मांगी थी। वहीं सेना को भी तैयार रहने को कहा गया था। हालांकि बुधवार की सुबह कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई है। जल्द ही अन्य स्थानों पर बिजली आएगी। उधर, कर्मचारियों की प्रशासन से बातचीत चल रही है। शहर में बिजली जोड़ी जा रही है। शहर में बिजली के साथ-साथ पानी का भी संकट गहरा गया था। आनन-फानन मंगलवार को चंडीगढ़ प्रशासन ने शहर में 30 साल बाद एस्मा लगा दिया।
चंडीगढ़ में बिजली कर्मचारी विभाग के निजीकरण का विरोध कर रहे हैं। बिजलीकर्मियों की ये हड़ताल केंद्र सरकार द्वारा चंडीगढ़ के बिजली विभाग के निजीकरण की फाइल को क्लीयर कर बिजली का काम निजी कंपनी एमीनेंट को देने के खिलाफ है। यूनियन का आरोप है कि प्रशासन ने हाईकोर्ट के आदेशों की अनदेखी कर बिजली विभाग का निजीकरण किया है। कर्मचारी इस फैसले को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। यूनियन की तरफ से गोपाल दत्त जोशी का एक वीडियो जारी किया गया है। जिसमें सुरेश लांबा को प्रशासन ने आश्वस्त किया है। इसलिए जीएमसीएच-32 व जीएमसीएच-16 की बिजली तत्काल और शहर के अन्य क्षेत्रों में आपूर्ति बहाल करने की अपील की। इसके अलावा कर्मचारियों से काम पर लौटने को कहा है। तमाम इलाकों में सोमवार रात 12 बजे गई बिजली मंगलवार देर रात तक नहीं आई थी।
बता दें कि प्रशासन और बिजली विभाग स्थिति संभालने में पूरी तरह से नाकाम रहा। न तो बिजली कर्मचारियों को मना सका और न ही कोई बैकअप प्लान तैयार किया था। इसका खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ा। मंगलवार की रात शहर में एस्मा लागू करने के बाद चंडीगढ़ प्रशासन ने सेना की मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस (एमईएस) की मदद लेने का फैसला लिया। हालांकि कुछ स्थानों पर बिजली बहाल हुई तो लोगों ने राहत की सांस ली। बिजली संकट से उबरने के लिए प्रशासन ने पंजाब और हरियाणा से प्रशिक्षित कर्मचारियों की मांग की थी। पंजाब ने मदद करने में असमर्थता जाहिर कर दी, जबकि हरियाणा की तरफ से प्रशासन को कोई जवाब नहीं मिला है। चंडीगढ़ के बिजली विभाग में कर्मचारी संघ की हड़ताल के कारण शहर के कुछ हिस्सों में बिजली गुल हो गई है। इसने दूरसंचार टावरों को प्रभावित किया है, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी में बाधा आ रही है।
टेलीकॉम ऑपरेटर और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदाता कुछ क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति के अभाव में वैकल्पिक स्रोतों की बैटरी, डीजी, सोलर पैनल आदि का उपयोग कर अपनी साइटों, एक्सचेंजों आदि को बिजली प्रदान कर रहे हैं। बिजली कर्मचारियों की हड़ताल को जबरन खत्म कराने के लिए प्रशासन ने चंडीगढ़ में छह महीने के लिए आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (एस्मा) लगा दिया है। प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने इस संबंध में आदेश जारी किया। आदेश में लिखा कि जनहित में हड़ताल पर प्रतिबंध लगाना जरूरी है। उधर, बिजली कर्मचारियों की हड़ताल की जानकारी होते हुए भी वैकल्पिक व्यवस्था करने में नाकाम रहा चंडीगढ़ प्रशासन मंगलवार देर शाम हरकत में आया। इसकी वजह भी हाईकोर्ट का हड़ताल को लेकर लिया गया स्वत: संज्ञान रहा।
प्रशासन ने पूर्वी पंजाब के आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (एस्मा) 1968 के उप धारा-3 के तहत इंजीनियरिंग विभाग के इलेक्ट्रिसिटी विंग के कर्मचारियों के अगले छह माह तक हड़ताल करने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। प्रशासन के गृह विभाग की ओर से सलाहकार धर्मपाल ने देर शाम एक आदेश जारी किया। इसमें कहा गया कि बिजली विभाग की हड़ताल से वितरण, हस्तांतरण (ट्रांसमिशन), संचालन और रखरखाव पर असर पड़ा है। बिजली एक अनिवार्य सेवा है, लिहाजा लोगों को इससे परेशानियां झेलनी पड़ी हैं, इसलिए हड़ताल पर रोक जरूरी है और ये जनहित में है। अगले छह माह तक बिजली विभाग के कर्मचारी कोई हड़ताल नहीं कर सकते।





































