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जालंधर वेस्ट में इस बार चुनावी दंगल होगा दिलचस्प, एक बार फिर से आमने सामने हुए आप और भाजपा प्रत्याशी,

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PTB Political न्यूज़ जालंधर (एडिटर-इन-चीफ) राणा हिमाचल : जालंधर वेस्ट विधानसभा क्षेत्र से बीते दिन जहां आप पार्टी ने अपना उम्मीदवार मोहिंदर भगत को घोषित कर दिया वहीं आप के पूर्व विधायक शीतल अंगुराल जोकि अब बीजेपी में जा चुके हैं और आम आदमी पार्टी को अलविदा कहने और विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद खाली हुई सीट पर बीजेपी द्वारा उम्मीदवार घोषित होने पर एक बार फिर से चुनावी दंगल में कूद पड़े हैं के बीच में 2022 के बाद एक बार फिर से लड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।

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आपको यह भी बता दें कि शीतल अंगुराल पहले बीजेपी से जुड़े थे, लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले वह आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए। आप ने शीतल अंगुराल को वेस्ट विधानसभा क्षेत्र से अपना उम्मीदवार बनाया गया। उस समय शीतल अंगुराल ने आम आदमी पार्टी, महेंद्र भगत ने बीजेपी और सुशील रिंकू ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में शीतल अंगुराल ने 39,213 वोट हासिल कर जीत हासिल की और विधायक बने।

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2024 के लोकसभा चुनाव से पहले विधायक शीतल अंगुराल ने आम आदमी पार्टी ही छोड़ दी और विधायक पद से अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष को भेज दिया। जब शीतल अंगुराल ने 31 मई को अपना इस्तीफा वापस लेना चाहा तो उन्हें बताया गया कि उनका इस्तीफा 30 मई को स्वीकार कर लिया गया है। इस मामले में शीतल अंगुराल ने कोर्ट जाने की बात भी उस समय मीडिया से कही थी, लेकिन इसी बीच चुनाव आयोग ने उपचुनाव की घोषणा कर दी गई।

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अब ऐसे में वेस्ट हल्के में एक बार फिर से विधानसभा चुनाव के ठीक 2 साल बाद स्थिति एक बार फिर पलट गई है। अब शीतल अंगुराल बीजेपी से और महेंद्र भगत आप से चुनाव लड़ने जा रहे हैं। फिलहाल कांग्रेस और अकाली दल ने अभी तक अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं किये हैं। माना जा रहा है लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने वेस्ट हल्के में अपनी पूरी ताकत दिखाई थी। शीतल अंगुराल सहित बीजेपी लीडरशिप और कार्यकर्ताओं ने बीजेपी उम्मीदवार सुशील रिंकू को जिताने के लिए खूब मेहनत की लेकिन बीजेपी करीब 1550 वोटों से पिछड़ गई। अब विधानसभा उपचुनाव जीतना सभी राजनीतिक दलों के लिए सम्मान का सवाल बन गया है।

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वहीं अगर राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो विधायक शीतल अंगुराल इस्तीफा देने की जल्दी में थे, जबकि उनका करीब 3 साल का कार्यकाल बाकी था। जब शीतल अंगुराल को इस बात का एहसास हुआ, तब तक उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया था। खैर, अब बीजेपी इस सीट को जीतने के लिए पूरा जोर लगाएगी। वहीं अगर आप उम्मीदवार मोहिंदर भगत के पीछे मौजूदा सरकार के सभी नेता कैबिनेट मंत्री ओर तो ओर खुद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान जालंधर पहुंचकर इस पुरे चुनावी कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगे जिसके लिए उन्होंने जालंधर के दीप नगर में घर भी किराये पर ले लिया है।

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माना जा रहा है कि इस बार वेस्ट हल्के में होने वाला चुनावी दंगल बहुत ही दिलचस्प होगा ओर अपने उम्मीदवार को जीत दिलाने के लिए जहां बीजेपी वहीं आप पार्टी भी अपनी पूरी ताकत लगाएगी। वहीं जिला प्रशासन से लेकर जिला पुलिस तक के साथ पंजाब के मुख्यमंत्री अभी तक कई बार मीटिंग कर चुके हैं माना जा रहा है। इसके लिए खुद मुख्यमंत्री ने एक टीम का गठन किया है ताकि लोगों को आने वाले समय में किसी प्रकार की समस्या से ना जूझना पड़े अगर ऐसा होता है

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तो उसके लिए जिला प्रशासन ओर पुलिस अधिकारी जिम्मेदार होंगे। ऐसे सख्त नियमों के लागू होने से अगर लोगों को सहूलत मिलती है तो मोहिंदर भगत का जितना बहुत आसान हो सकता है, लेकिन यह देखना होगा की अब इन दो चुने गए चेहरों के बाद कांग्रेस ओर अकाली दल अपना उम्मीदवार किसे चुनती है जिसे लोग प्रत्याशी के तौर पर देखना पसंद करते हैं हालाँकि इससे पहले मोहिंदर सिंह केपी के दोबारा कांग्रेस पार्टी में शामिल होने के भी चर्चे हैं, वहीं अकाली दल को अभी तक कोई टक्कर का उम्मीदवार नहीं मिल पाया है।

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वहीं अगर जनता के नजरिए से देखा जाये तो उनका मानना यह है कि पांच साल के चुने गए विधायक अगर बिना जनता की परवाह किये ही दल बदलते रहेंगे तो हमारा क्या होगा। जनता तो ऐसे नेताओं की पुतली बन चुकी है कभी इनके इशारे पर इस पार्टी को वोट करो की राजनीति तो कभी इसको, मतलब साफ है की वोटर अब किसी के इशारे पर भी बहकावे में नहीं आने वाली और इस बार जो लोगों के लिए दिन रात करेगा उसको ही जनता चुनेगी लेकिन वह होगा कौन? इसका पता तो अब नतीजे आने के बाद ही लगेगा। तब तक जुड़े रहिये PTB News के साथ।

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