PTB Big न्यूज़ ग्रेटर नोएडा : ग्रेटर नोएडा सेक्टर-137 की पारस टियरा सोसायटी के डे केयर में 15 माह की बच्ची से क्रूरता सामने आया है। आरोप है कि डे केयर की सहायिका ने पहले बच्ची को बुरी तरह पीटा फिर उसकी जांघों में दांत से काट लिया। बच्ची की मां की शिकायत पर सेक्टर-142 कोतवाली में संचालिका चारु और नाबालिग सहायिका के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। सोसायटी में रहने वाली मोनिका देवी का आरोप है कि
.वह अपनी बेटी वेदांशी पटेल को रोजाना ब्लिपी डे केयर में दो घंटे भेजती हैं। 4 अगस्त को जब उसे घर लेकर आईं तो वह जोर-जोर से रो रही थी। कपड़े बदलने के दौरान उसकी दोनों जांघों पर दांत के निशान दिखे। इसके बाद वह बच्ची तो लेकर डॉक्टर के पास पहुंचीं। डॉक्टर ने उन्हें बताया कि ये चोट बाइट (दांत से काटने) के हैं। सोसाइटी निवासी शेखर झा का कहना है कि सोसाइटी में भूतल पर किराये के फ्लैट में चल रहे डे केयर में प्रति बच्चे के प्रतिमाह साढ़े तीन हजार रुपये लिए जाते हैं।
. .आरोप है कि सहायिका की मानसिक हालत सही नहीं रहती है। ऐसी शिकायतें पहले भी सामने आ चुकी हैं। मोनिका ने बताया कि उन्होंने मामले की शिकायत डे केयर चलाने वाली चारु और सहायिका से की। इस पर दोनों ने उसके साथ अभद्रता करते हुए धमकी दी। पहले संचालिका ने सीसीटीवी दिखाने से मना कर दिया लेकिन बाद में विरोध पर फुटेज दिखाई। फुटेज में सहायिका पहले बच्ची को थप्पड़ मारते हुए दिख रही है फिर उसे पटकते और प्लास्टिक के बैट से पीटते नजर आ रही है।
.उसके बाद वह बच्ची की जांघों पर दांत से काट लेती है। इस पर बच्ची चीखने लगती है। यह सब होने के बावजूद संचालिका मौके पर नहीं पहुंची। मामले के जांच अधिकारी और कोतवाली प्रभारी विनोद कुमार मिश्र का कहना है कि प्राथमिक जांच में पता चला है कि सहायिका नाबालिग है। संचालिका ने बच्चों की देखभाल के लिए खुद लापरवाही दिखाई। करीब 12 छोटे बच्चे इस डे केयर में आते हैं। एक नाबालिग को यह संवेदनशील जिम्मेदारी सौंप दी गई।
.इन सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है। जांच के बाद नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा-115 (2) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाने), धारा-352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करने) धारा-351 (2) आपराधिक धमकी की धाराओं में सहायिका और संचालिका के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
.डे केयर में होनी चाहिए ये सुविधाएं:–
ग्रेनो वेस्ट में डे केयर चलाने वाले सुधीर कुमार ने बताया कि डे केयर का परिसर साफ-सुथरा और सुरक्षित होना चाहिए। फर्श, दीवारें, और फर्नीचर बच्चों के अनुकूल होने चाहिए। हर 20 बच्चों पर कम से कम एक प्रशिक्षित स्टॉफ होना चाहिए।
-सुरक्षित प्रवेश और निकास की व्यवस्था
-गेट पर सुरक्षा गार्ड और विजिटर रजिस्टर
-प्राथमिक उपचार किट के अलावा पास के अस्पताल से टाईअप होना चाहिए।
-सीसीटीवी कैमरे लगे हों।
-लाइसेंस और पंजीकरण अनिवार्य है।
-राज्य बाल कल्याण विभाग या स्थानीय प्रशासन से अनुमति जरूरी होती है।
-बच्चों के हेल्थ रिकॉर्ड, इमरजेंसी संपर्क नंबर आदि होना चाहिए।
इन बातों का रखें ध्यान:–
-बच्चे को डे केयर में भेजने से पहले उसका लाइसेंस चेक करें।
-डे केयर के कर्मचारी और संचालक की योग्यता के बारे में पता करें। जिनके बच्चे पहले से जा रहे हैं उनसे कर्मचारी के व्यवहार के बारे में पता करें।
-बच्चे के व्यवहार में होने वाले बदलावों पर ध्यान दें। रोज की एक्टिविटी के बारे में पूछें।










































