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अंतर–सदन हिन्दी कविता वाचन प्रतियोगिता : हास्य रस और वीरता रस का शानदार संगम,

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PTB News “शिक्षा” : विद्यालय का वातावरण आज साहित्यिक उल्लास, भाव–प्रवाह और विद्यार्थियों के उत्साह से पूरी तरह सराबोर रहा, जब बहुप्रतीक्षित अंतर–सदन हिन्दी कविता वाचन प्रतियोगिता का भव्य और सुचारु आयोजन किया गया। इस वर्ष प्रतियोगिता में विशेष रूप से दो प्रमुख रसों—हास्य रस तथा वीर रस—को केंद्र में रखा गया, जिससे विद्यार्थियों को हिन्दी साहित्य के विविध रंगों और अभिव्यक्तियों को समझने और मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिला।

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विद्यार्थियों ने हास्य रस की मनमोहक और चुटीली कविताओं के माध्यम से दर्शकों को ठहाकों से भर दिया, जिनमें कक्षा 7 में से प्रथम स्थान प्राप्त रॉनित गिल्ल तथा द्वितीय स्थान प्राप्त गुंतेज सिंह की ,कक्षा 8 में से प्रथम स्थान प्राप्त सुख साँझ कौर तथा द्वितीय स्थान पर मिष्ठी की प्रस्तुति रही ,कक्षा 9 में से प्रथम स्थान प्राप्त अयान गोयल तथा द्वितीय स्थान अनीश पठानिया तथा 11 कक्षा में से प्रथम स्थान अर्शदीप सिंह तथा द्वितीय स्थान पर पनव तनेजा जी रहे।

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छात्रों क बाल–सुलभ सरलता, मनोरंजक संवाद, स्वाभाविक विनोद और नटखट अभिव्यक्ति ने सभागार में एक हँसमुख वातावरण बना दिया। प्रतिभाओं ने वीर रस से ओत–प्रोत कविताओं द्वारा जन–जन में जोश, साहस और देशभक्ति की भावना को प्रज्ज्वलित कर दिया, जिनमें प्रथम स्थान विजेता _ और द्वितीय स्थान विजेता _ की जोशीली प्रस्तुतियाँ सभागार में उपस्थित सभी लोगों के हृदय को गहराई तक छू गईं। पूरे प्रतियोगिता–स्थल पर अनुशासन, उत्साह और साहित्यिक गरिमा का सुंदर संगम देखने को मिला।

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विद्यार्थियों ने न केवल अपनी वाणी और अभिव्यक्ति के कौशल का परिचय दिया, बल्कि हिन्दी भाषा की समृद्धता और संस्कृति के गौरवपूर्ण आयामों को भी मंच पर उकेरा। निर्णायक मंडल ने प्रतिभागियों की कविताओं के चयन, उच्चारण, लय–ताल, मनोवैज्ञानिक अभिव्यक्ति, मंच–संयम और दर्शकों से संवाद बनाने की क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों की छिपी प्रतिभा को निखारने का बेहतरीन अवसर प्रदान किया है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में साहित्य–प्रेम, अभिव्यक्ति–कौशल और हिन्दी भाषा के प्रति गर्व की भावना को विकसित करना था।

हास्य रस विद्यार्थियों में सहजता, विनोद और परिस्थितिजन्य समझ विकसित करता है, जिससे वे सामाजिक मुद्दों को मनोरंजक ढंग से समझना सीखते हैं; जबकि वीर रस जैसी ऊर्जावान विधा उन्हें इतिहास, देशभक्ति, साहस, कर्तव्य और नैतिकता जैसी महत्वपूर्ण भावनाओं से जोड़ती है। प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों में स्पष्ट वाणी, आत्मविश्वास, प्रस्तुति–कला, स्मरण–शक्ति, रचनात्मकता, नेतृत्व–क्षमता और परिस्थिति–अनुकूल अभिव्यक्ति जैसी कई महत्त्वपूर्ण क्षमताओं का विकास हुआ। मंच के सामने खड़े होकर कविता प्रस्तुत करना बच्चों में साहस, आत्म–नियंत्रण और सकारात्मक सार्वजनिक व्यक्तित्व के निर्माण में अत्यंत सहायक होता है।

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वासल एजुकेशन के अध्यक्ष श्री के. के. वासल, चेयरमैन श्री संजीव कुमार वासल, उपाध्यक्ष श्रीमती ईना वासल, सीईओ श्री राघव वासल और डायरेक्टर श्रीमती अदिति वासल जी ने सभी विजेताओं और प्रतिभागियों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन और उत्साही भागीदारी के लिए हार्दिक बधाई दी तथा कहा कि ऐसी साहित्यिक प्रतियोगिताएँ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उनका कहना था कि हास्य और वीर रस जैसे दो विपरीत लेकिन प्रभावशाली रसों के माध्यम से छात्रों का मानसिक और भावनात्मक विकास संतुलित रूप से होता है—जहाँ एक ओर हास्य उनकी ऊर्जा और खुशी को बढ़ाता है, वहीं वीर रस उनकी राष्ट्रभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा को सशक्त करता है।

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समग्र रूप से देखा जाए तो अंतर–गृह हिन्दी कविता वाचन प्रतियोगिता केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि साहित्य, संस्कृति, भाषा–प्रेम और विद्यार्थियों के कौशल–विकास का एक उत्सव साबित हुई। हँसी की खनक और वीरता की ध्वनि से सजा यह आयोजन पूरी तरह सफल, प्रभावशाली और स्मरणीय रहा। विद्यार्थियों की प्रतिभा, शिक्षकों का मार्गदर्शन और प्रबंधन का समर्थन—इन तीनों ने मिलकर इस प्रतियोगिता को एक अनोखा और प्रेरणादायी साहित्यिक अनुभव बना दिया, जो सभी के हृदय में लंबे समय तक गुंजायमान रहेगा।

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