PTB Big न्यूज़ ऑस्ट्रेलिया : ऑस्ट्रेलिया में हजारों भारतीय युवाओं को बसाने का दावा करने वाली पंजाबी मूल की इमिग्रेशन एजेंट वनीत कौर चड्ढा का रजिस्ट्रेशन रद्द कर उन पर 5 साल का बैन लगा दिया गया है। वनीत कौर रॉयल माइग्रेशन एंड एजुकेशन कंसल्टेंट्स नाम की कंपनी के जरिए पंजाब समेत भारत के युवाओं को ऑस्ट्रेलिया में वीजा दिलाती थीं। वनीत कौर चड्ढा पर वीजा धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं।
आरोप है कि उन्होंने फर्जी दस्तावेज पेश कर रजिस्ट्रेशन कराया और भ्रामक विज्ञापन से लोगों को फंसा रही हैं। ऑस्ट्रेलिया में ऑफिस ऑफ द माइग्रेशन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी (OMARA) ने अपनी जांच में पाया कि वनीत ने न केवल नियमों को तोड़ा, बल्कि ऑस्ट्रेलियाई इमिग्रेशन सिस्टम के साथ भी धोखा किया है। अब वनीत चड्ढा अगले 5 साल तक किसी भी व्यक्ति को ऑस्ट्रेलिया के लिए कानूनी सलाह या वीजा सहायता नहीं दे पाएंगी।
.अथॉरिटी ने उन्हें इस पेशे के लिए ईमानदार और उपयुक्त नहीं माना है। वनीत कौर चड्ढा करीब 10 साल से इस पेशे में थीं। अब उन लोगों के दस्तावेजों की भी जांच हो सकती है जो वनीत चड्ढा के जरिए ऑस्ट्रेलिया पहुंचे हैं। वनीत कौर चड्ढा साल 2016 से रजिस्टर्ड माइग्रेशन एजेंट के रूप में काम कर रही थीं। उनकी जांच तब शुरू हुई जब ऑस्ट्रेलिया के गृह विभाग ने उनकी ओर से भेजे गए वीजा एप्लीकेशन में कोई गड़बड़ी पाई गई।
विभाग को शक हुआ कि आवेदनों में दी गई जानकारी और वास्तविकता में अंतर है। इसके बाद मामला OMARA को सौंपा गया, जिसने माइग्रेशन एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत वनीत के पूरे करियर की फाइलों को खंगालना शुरू कर दिया। OMARA की जांच में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि वनीत चड्ढा ने कई वीजा आवेदकों को पर्दे के पीछे रहकर इमिग्रेशन सहायता दी, लेकिन आधिकारिक तौर पर इसकी जानकारी विभाग को नहीं दी।
.माइग्रेशन एक्ट के नियमों के मुताबिक, यदि कोई एजेंट किसी क्लाइंट की मदद करता है, तो उसे फॉर्म 956 के जरिए अपनी भूमिका स्पष्ट करनी होती है। वनीत ने जानबूझकर इस प्रक्रिया को दरकिनार किया, ताकि वह विभाग की सीधी निगरानी से बच सकें। इस गोपनीयता का मकसद अक्सर उन मामलों को प्रोसेस करना होता है जो कानूनी रूप से कमजोर होते हैं। उनकी यह हरकत पारदर्शिता के सिद्धांत के खिलाफ थी और कानून की धारा 312A का सीधा उल्लंघन पाई गई।
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अथॉरिटी ने पाया कि वनीत ने वीजा आवेदनों में ऐसी जानकारी और दस्तावेज अटैच किए, जिनके बारे में उन्हें अच्छी तरह पता था कि वे गलत या भ्रामक हैं। एक रजिस्टर्ड एजेंट का यह कानूनी दायित्व है कि वह केवल अटेस्टेड और सही तथ्य ही पेश करे। वनीत ने अपने क्लाइंट्स की प्रोफाइल को कागजों पर मजबूत दिखाने या वीजा मिलने की संभावना बढ़ाने के लिए गलत बयानबाजी का सहारा लिया। उनकी इस कार्यशैली ने न केवल ऑस्ट्रेलियाई सरकार को गुमराह किया,
.बल्कि उन ईमानदार आवेदकों का हक भी छीना, जो सही तरीके से वीजा पाना चाहते थे। इसी आचरण के कारण उन्हें इस पेशे के लिए अयोग्य माना गया। सोशल मीडिया के दौर में वनीत चड्ढा ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का सहारा लेकर जनता को गुमराह किया। उन्होंने अपने विज्ञापनों में ऐसे संकेत दिए जिससे लोगों को लगे कि ऑस्ट्रेलिया के डिपार्टमेंट ऑफ होम अफेयर्स के साथ उनके खास संबंध या सीधी पहुंच हैं।
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प्रोफेशनल कोड ऑफ कंडक्ट के तहत कोई भी एजेंट सरकार के साथ अपनी निकटता का झूठा प्रदर्शन नहीं कर सकता। इस तरह के भ्रामक दावों ने प्रवासियों के मन में यह झूठी उम्मीद जगाई कि वनीत के पास जाने से उनका काम सेटिंग से हो जाएगा। जांच के दौरान वनीत के ऑफिस प्रबंधन में भी भारी खामियां मिलीं। यह पाया गया कि वह अपने स्टाफ की सही तरीके से निगरानी नहीं कर रही थीं। उनके मार्गदर्शन में ऐसे लोग भी क्लाइंट्स को कानूनी सलाह दे रहे थे,
.जिनके पास कोई लाइसेंस या विशेषज्ञता नहीं थी। उन्होंने अपने व्यवसाय से जुड़े गैर-रजिस्टर्ड व्यक्तियों के माध्यम से अवैध इमिग्रेशन सहायता दिलवाई और उनकी ओर से की गई गलतियों की जिम्मेदारी लेने से बचती रहीं। ऑस्ट्रेलिया में बिना लाइसेंस के माइग्रेशन सलाह देना अपराध है, और वनीत ने ऐसे लोगों को अपने ऑफिस में काम करने की छूट देकर कानून की धज्जियां उड़ाईं। सबसे गंभीर आरोप यह था कि वनीत ने माइग्रेशन कानून के मूल उद्देश्यों को ही कमजोर करने का प्रयास किया।
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उन्होंने कानूनी पेचीदगियों और खामियों का फायदा उठाकर व्यवस्था को चकमा देने की कोशिश की, ताकि अपात्र लोगों को वीजा दिलाया जा सके। एक एजेंट का काम कानून का पालन करवाना होता है, न कि उससे बचने के रास्ते ढूंढना। वनीत ने माइग्रेशन प्रोफेशन की साख बनाए रखने के बजाय ऐसे अनैतिक रास्तों का चुनाव किया जो पूरी तरह से अवैध थे। अथॉरिटी ने निष्कर्ष निकाला कि उनका आचरण एक पेशेवर एजेंट के मानकों के बिल्कुल विपरीत था और व्यवस्था के लिए खतरा बन गई थीं।
.अथॉरिटी ने वनीत कौर चड्ढा का माइग्रेशन एजेंट लाइसेंस तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया। अथॉरिटी का तर्क है कि जो नियमों का पालन नहीं करता है, वह दूसरों के काम कैसे नियमों में रहकर कर सकता है? इसी वजह से अथॉरिटी ने रजिस्ट्रेशन रद्द करने का फैसला लिया। वहीं कानून की धारा 292 के तहत, एक बार रजिस्ट्रेशन रद्द होने पर वह अगले 5 साल तक दोबारा पंजीकरण के लिए आवेदन नहीं कर सकती हैं।
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अथॉरिटी ने अपने आदेशों में कहा कि वह पांच साल तक ऑस्ट्रेलिया में बतौर माइग्रेशन एजेंट काम नहीं कर सकती हैं। वहीं अथॉरिटी ने स्पष्ट किया कि उनमें ईमानदारी और सत्यनिष्ठा की कमी है, जो एक इमिग्रेशन एडवाइजर के लिए जरूरी गुण हैं। उन पर जो आरोप लगे थे, उनके वह सटीक जवाब नहीं दे पाईं। वह जवाब देने में सक्षम नहीं थीं। अथॉरिटी ने वनीत कौर के खिलाफ जांच शुरू कर दी है।
.अब अथॉरिटी इस जांच को आगे बढ़ाना चाहती है, ताकि यह पता चल सके कि वनीत कौर ने जिन्हें वीजा दिलाया है, उनके दस्तावेज असली थे या नहीं। ऐसे में फर्जी दस्तावेजों के जरिए ऑस्ट्रेलिया पहुंचने वालों पर भी गाज गिर सकती है। जांच में दस्तावेज फर्जी पाए गए तो वनीत कौर के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
फर्जी दस्तावेजों से पहुंचे लोगों का वीजा रद्द हो सकता है
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अथॉरिटी की इस कार्रवाई के बाद उन हजारों प्रवासियों की धड़कनें बढ़ गई हैं, जिन्होंने वनीत कौर के जरिए वीजा लगवाया है। नियम यह है कि यदि किसी एजेंट के खिलाफ धोखाधड़ी साबित होती है, तो उसकी ओर से प्रोसेस किए गए पुराने केसों की भी फिर से जांच (स्क्रूटनी) हो सकती है। यदि किसी आवेदक के पुराने दस्तावेजों में गड़बड़ी पाई गई, तो ऑस्ट्रेलियाई सरकार उनका वीजा रद्द कर सकती है और उन्हें भारत वापस भेजा जा सकता है।
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