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‘सतलुज’ फिल्म को OTT से हटाया, पंजाब में हुए फेक एनकाउंटर में 25 हजार हत्याओं का फिल्म में किया गया दावा

film satluj released two days ago has been removed from ott platforms the movie claims that people killed in fake encounters punjab

PTB News मनोरंजन / चंडीगढ़ : पंजाबी अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को रिलीज के दो दिन बाद ही OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 से हटा दिया गया है। यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है। इससे पहले फिल्म का नाम ‘पंजाब 95’ था, जिसे लंबे समय तक रिलीज की अनुमति नहीं मिली थी। बाद में संशोधित रूप में ‘सतलुज’ नाम से इसे OTT पर रिलीज किया गया।

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फिल्म हटाए जाने के बाद दिलजीत दोसांझ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें फिल्म हटाए जाने का उतना दुख नहीं है, क्योंकि यह पहले ही दर्शकों तक पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि एक बार कोई फिल्म इंटरनेट पर आ जाए तो उसे पूरी तरह हटाना आसान नहीं होता। साथ ही उन्होंने टिप्पणी की कि “इस फिल्म के साथ वही हुआ, जो खालड़ा जी के साथ हुआ था। फिल्म हटाए जाने को लेकर ZEE5 ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि “मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए

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अगले आदेश तक ‘सतलुज’ प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं रहेगी।” कंपनी ने यह भी कहा कि वह कानूनी प्रक्रिया के तहत सभी उपलब्ध विकल्पों पर विचार कर रही है ताकि फिल्म को जल्द दोबारा दर्शकों के लिए उपलब्ध कराया जा सके। हालांकि, फिल्म हटाने के पीछे किस एजेंसी या प्राधिकरण की भूमिका रही, इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। फिल्म में जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और उनके मानवाधिकार संबंधी कार्यों को केंद्र में रखा गया है।

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कहानी में 1990 के दशक के पंजाब की पृष्ठभूमि दिखाई गई है। फिल्म में तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की 31 अगस्त 1995 को हुए बम विस्फोट में हत्या की घटना और उसके बाद 6 सितंबर 1995 को जसवंत सिंह खालड़ा के कथित अपहरण को भी कथानक का हिस्सा बनाया गया है। मुख्यमंत्री की मौत के बाद जब राजनीतिक माहौल बदला, तो पुलिस को डर था कि खालड़ा उनके इस 25 हजार अवैध दाह-संस्कार के काले राज को दुनिया के सामने न ले आएं,

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इसलिए वे खालड़ा का अपहरण करने का कदम उठाते हैं। खालड़ा ने अमृतसर, तरनतारन और आसपास के श्मशान घाटों के रिकॉर्ड, नगर निगम के दस्तावेज और अंतिम संस्कार रजिस्टर खंगाले। उनकी जांच में सामने आया कि बड़ी संख्या में ‘लावारिस’ बताकर शवों का अंतिम संस्कार किया गया, जबकि कई शव कथित रूप से उन लोगों के थे जो पुलिस हिरासत के बाद लापता हो गए थे। उन्होंने दावा किया कि पूरे पंजाब में 25,000 लोगों की अवैध हत्या और गुप्त अंतिम संस्कार किए गए।

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केंद्र सरकार से जुड़े सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि फिल्म के कुछ हिस्सों के दुरुपयोग की आशंका जताई गई है। सूत्रों के अनुसार, चिंता यह है कि फिल्म की कुछ सामग्री का इस्तेमाल भारत विरोधी या खालिस्तान समर्थक तत्व अपने प्रचार के लिए कर सकते हैं, विशेष रूप से राजनीतिक रूप से संवेदनशील समय में। हालांकि, इस संबंध में सरकार की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।