PTB Big Political न्यूज़ चंडीगढ़ : पंजाब की पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्ठल के एक बयान ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। भट्ठल ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री रहते हुए उन्हें कुछ अधिकारियों ने सत्ता दोबारा हासिल करने के लिए बेहद आपत्तिजनक और खतरनाक सुझाव दिया था, जिसे उन्होंने तुरंत खारिज कर दिया। भट्ठल के अनुसार, संबंधित अधिकारियों ने चुनाव से पहले बाजारों और
.ट्रेनों में धमाके कर दहशत का माहौल बनाने और लोगों को डराकर मनचाहे ढंग से वोट डलवाने का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने कहा कि जैसे ही यह सुझाव उनके सामने रखा गया, उन्होंने अधिकारियों को सख्त शब्दों में रोक दिया और साफ कह दिया कि वह लाशों पर राजनीति नहीं करेंगी। पूर्व सीएम ने बताया कि उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि चुनाव से पहले कोई भी अप्रिय घटना होती है तो
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.उसकी पूरी जिम्मेदारी तय की जाएगी और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। भट्ठल ने कहा कि अधिकारी मुख्यमंत्री को अलग-अलग तरह की सलाह देते हैं, लेकिन उन्हें मानना या न मानना मुख्यमंत्री का अधिकार होता है। उन्होंने इस तरह की सलाह देने वाले अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई थी। राजिंदर कौर भट्ठल 21 नवंबर 1996 को मुख्यमंत्री बनी थीं और 11 फरवरी 1997 तक इस पद पर रहीं।
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.हरचरण सिंह बराड़ के इस्तीफे के बाद उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया था। वह पंजाब की अब तक की एकमात्र महिला मुख्यमंत्री रही हैं। भट्ठल के दावे के सामने आते ही राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पुनरसुरजीत अकाली दल के अध्यक्ष और पूर्व जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इस बयान से स्पष्ट होता है कि कांग्रेस ने किस तरह सत्ता हासिल की। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकारों के दौरान अफसरों के जरिए
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.दहशत का माहौल बनाया गया और मांग की कि उस समय के अधिकारियों की जांच होनी चाहिए। वहीं कांग्रेस प्रवक्ता दुर्लभ सिद्धू ने कहा कि इस मामले में उन अधिकारियों के नाम सार्वजनिक होने चाहिए, जिन्होंने ऐसा सुझाव दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विषय कांग्रेस पार्टी की किसी बैठक में नहीं उठा था और इसका पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है। सिद्धू ने कहा कि जनता को यह जानने का हक है कि देशविरोधी मानसिकता रखने वाले वे अधिकारी कौन थे।
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