PTB Big न्यूज़ नई दिल्ली : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को सीमा पार लेनदेन में भारतीय रुपये के व्यापक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए नए उपायों का एलान किया। ये उपाय भारतीय रुपये को वैश्विक स्तर पर धीरे-धीरे स्वीकार्य बनाने की केंद्रीय बैंक की रणनीति का एक हिस्सा हैं। सरकार कई महीनों से रुपये के अंतरराष्ट्रीयकरण के लिए कदम उठा रही है। रुपये के अंतरराष्ट्रीयकरण मतलब है कि वैश्विक व्यापार, वित्त और
. .निवेश के लिए भारतीय मुद्रा को व्यापक रूप से स्वीकार्य बनाना और उपयोग में लाने की प्रक्रिया। RBI की मौद्रिक नीति समिति के बाद संजय मल्होत्रा ने कहा, “हम इस संबंध में लगातार प्रगति कर रहे हैं। नई घोषणा करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने रुपये के वैश्वीकरण के लिए तीन उपायों का प्रस्ताव रखा है। ये उपाय ऐसे समय पर आए हैं जब भारत रुपये को एक स्थिर मुद्रा के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। आइए इन उपायों के बारे में विस्तार से जानें।
. .शीर्ष बैंक ने कहा कि अधिकृत डीलर (AD) बैंकों को अब भूटान, नेपाल और श्रीलंका के अनिवासियों को व्यापार संबंधी लेनदेन के लिए भारतीय रुपये में ऋण देने की अनुमति होगी। इससे पड़ोसी अर्थव्यवस्थाओं के साथ भारतीय रुपये में व्यापार समझौते और मजबूत होने की उम्मीद है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में दक्षिण एशिया में भारत का 90% निर्यात इन चार देशों को होगा। इसकी कुल राशि करीब 25 अरब डॉलर हो सकती है।
. .दूसरे कदम के रूप में RBI ने भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों की मुद्राओं के लिए पारदर्शी संदर्भ दरें स्थापित करने की योजना बनाई है। इस कदम का उद्देश्य मूल्य निर्धारण को अधिक अनुमानित बनाना और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के चालान और निपटान में रुपये के उपयोग को मजबूत करना है। आरबीआई का तीसरा प्रस्ताव विशेष रुपया वास्ट्रो खातों (SRVA) में शेष राशि के उपयोग को व्यापक बनाने से जुड़ा है। ये शेष राशि, जो वर्तमान में स्थानीय मुद्रा में व्यापार निपटान की सुविधा प्रदान करती है, अब कॉर्पोरेट बॉन्ड और वाणिज्यिक पत्रों में निवेश के लिए पात्र बनाई जाएगी।
. .अगस्त में RBI ने विदेशी निवेशकों को अपने अधिशेष वास्ट्रो शेष को केंद्र सरकार की प्रतिभूतियों में निवेश करने की अनुमति दी थी। रुपये को वैश्विक बाजार में मान्यता दिलाने के लिए पूर्व में भी आरबीआई ने कई कदम उठाए हैं। इनमें व्यापार निपटान के लिए द्विपक्षीय समझौते, सीमा पार लेनदेन के लिए यूपीआई जैसी भारतीय भुगतान प्रणालियों को प्रोत्साहित करना और रुपए की अस्थिरता को कम करने जैसे उपाय शामिल हैं। इन उपायों से भारतीय मुद्रा के अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और व्यवसायों के लिए अधिक स्थिर और आकर्षक बनाने पर जोर दिया गया है।










































