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अमेरिकी अदालत ने Deport किए गए भारतीय को लेकर सुनाया बड़ा फैसला,

US court orders return of deported Indian national

PTB Big न्यूज़ वाशिंगटन : अमेरिका की एक संघीय अदालत ने अपने तरह का एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने अमेरिकी आव्रजन अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे एक भारतीय नागरिक को फिर से अमेरिका वापस लाने की व्यवस्था करें, जिसे अदालत के साफ आदेश के बावजूद भारत भेज दिया गया था। जज ने फैसला सुनाया कि डिपोर्टेशन गैर-कानूनी था और न्यायिक अधिकार का उल्लंघन था।

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9 जनवरी को जारी आदेश में टेक्सास के दक्षिणी जिले की अमेरिकी जिला अदालत ने बताया कि फ्रांसिस्को डी’कोस्टा को 20 दिसंबर 2025 को अमेरिका से निकाला गया, जबकि उसे न हटाने का अदालत का आदेश इससे तीन घंटे पहले ही जारी हो चुका था। अदालत ने कहा कि उसी सुबह उसने डी’कोस्टा की याचिका पर सुनवाई अपने हाथ में ली थी और सरकार को साफ निर्देश दिया था कि अदालत की अनुमति के बिना उसे अमेरिका से बाहर न भेजा जाए।

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कोर्ट ने कहा कि उस आदेश के बावजूद, डी’कोस्टा को तुर्किश एयरलाइंस की फ्लाइट में बिठा दिया गया, जो उसी दिन दोपहर 2:55 बजे ह्यूस्टन से रवाना हुई। इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट द्वारा जमा किए गए एक मेमोरेंडम के अनुसार, अमेरिकी अटॉर्नी के कार्यालय, आईसीई अधिकारियों और हिरासत सुविधा को फ्लाइट के रवाना होने से पहले स्टे की सूचना थी। अदालत ने सरकार की इस दलील को खारिज कर दिया कि यह गलती से हुआ।

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अदालत ने कहा कि हटाने का इरादा चाहे जो भी रहा हो, निर्वासन गैरकानूनी था और यही सबसे अहम बात है। फ्रांसिस्को डी’कोस्टा भारत के मूल निवासी हैं और साल 2009 से अमेरिका में रह रहे थे। अक्टूबर 2025 में एक आव्रजन न्यायाधीश ने उन्हें स्वेच्छा से देश छोड़ने की अनुमति दी थी। बाद में उन्होंने वकील की मदद ली और अपने मामले को फिर से खोलने की अर्जी दी।

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इसमें उन्होंने कहा कि भारत की परिस्थितियां बदल चुकी हैं और ईसाई धर्म अपनाने के कारण उन्हें वहां उत्पीड़न का खतरा है। उस याचिका को दायर करने से फेडरल नियमों के तहत उनका स्वेच्छा से देश छोड़ना अपने आप एक अंतिम निष्कासन आदेश में बदल गया। कोर्ट ने कहा कि इमिग्रेशन जज ने स्टे के अनुरोध को खारिज कर दिया था, लेकिन डी’कोस्टा को हटाए जाने के समय मामले को फिर से खोलने की याचिका पर फैसला नहीं सुनाया था।

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अदालत ने कहा कि इस स्थिति में डी’कोस्टा को हटाने से उनके कानूनी अधिकार छिन सकते थे और यह न्याय की प्रक्रिया के खिलाफ था। सरकार ने अदालत में तर्क दिया कि डी’कोस्टा को वापस लाने की जरूरत नहीं है और वह भारत से ही आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं। अदालत ने इस दलील को भी ठुकरा दिया और कहा कि उन्हें वापस लाना जरूरी है, ताकि मामले की सुनवाई वैसे ही हो सके, जैसे गलत तरीके से हटाए जाने से पहले होनी चाहिए थी।

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अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के एक सर्वसम्मत फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अगर किसी विदेशी नागरिक को अदालत के आदेश के खिलाफ गैरकानूनी तरीके से हटाया जाता है, तो उसे वापस बुलाना सही और जरूरी उपाय है। अंत में अदालत ने सरकार को आदेश दिया कि डी’कोस्टा की जल्द से जल्द अमेरिका वापसी की व्यवस्था की जाए। साथ ही पांच दिनों के भीतर यह बताने को कहा कि इसके लिए क्या-क्या कदम उठाए जाएंगे।