PTB News

Latest news
ਲਾਇਲਪੁਰ ਖ਼ਾਲਸਾ ਕਾਲਜ ਦੇ ਐਮ.ਏ. (ਭੂਗੋਲ) ਦੇ ਵਿਦਿਆਰਥੀਆਂ ਨੇ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਪ੍ਰੀਖਿਆਵਾਂ ਵਿੱਚ ਪਹਿਲੀਆਂ ਚਾਰੇ ਪੁਜੀਸ਼ਨਾ... सेंट सोल्जर कॉलेज की छात्राओं ने विश्वविद्यालय परीक्षाओं में लहराया परचम, रायत बाहरा प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी होशियारपुर में 'इग्नाइट 2026' का भव्य आगाज़; विद्यार्थियों में दिखा... जालंधर के युवराज भाटिया ने 10 साल की उम्र में रचा IGU मेन टूर की सी कैटेगरी में बनाई खास जालंधर की राजनितिक के चाणक्य कहे जाने वाले आम आदमी पार्टी के सीनियर नेता का पार्टी ने बढ़ाया कद अमरावती अस्पताल अग्निकांड को लेकर CM फडणवीस ने किया बड़ा ऐलान, जांच के भी दिए आदेश Jalandhar : बाबा मुराद शाह दरगाह से लौट रहे दंपति सहित मासूम बेटी की हुई सड़क हादसे में दर्द/नाक मौ/त बड़ा फैसला : जज बनने के लिए, 3 नहीं अब 1 साल की होगी वकालत जरूरी Punjab बंद के बीच चली गो/लियां, कारोबारी के ऑफिस के बाहर, ₹5 करोड़ न देने पर मारने की मिल रही थीं धम... पंजाब बंद : मोहाली-चंडीगढ़ के बाॅर्डर पूरी तरह से सील, राज्य के कई शहरों में दुकानें बंद, भारी पुलिस...

ED की बड़ी कार्रवाई, अनिल अंबानी ग्रुप के CFO को किया गिरफ्तार,

maharashtra-mumbai-ed-action-reliance-cfo-ashok-kumar-arrested-in-17000-crore-money-laundering-case

.

PTB Big न्यूज़ मुंबई : प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में कार्रवाई करते हुए अनिल अंबानी समूह की कंपनी रिलायंस पावर लिमिटेड के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) और कार्यकारी निदेशक अशोक कुमार पाल को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी रिलायंस समूह की विभिन्न कंपनियों द्वारा ₹17,000 करोड़ से अधिक के कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी और धन के ‘डायवर्जन’ (दुरुपयोग) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के सिलसिले में की गई है।

.

.

अशोक कुमार पाल, जो अनिल अंबानी के करीबी सहयोगी माने जाते हैं, पिछले सात वर्षों से अधिक समय से रिलायंस पावर में CFO के रूप में कार्यरत थे और कंपनी की वेबसाइट के अनुसार उनके पास 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है। ईडी की यह कार्रवाई अनिल अंबानी समूह के लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही है, जो पहले से ही वित्तीय संकट से जूझ रहा है। मनी लॉन्ड्रिंग का यह पूरा मामला कथित वित्तीय अनियमितताओं और रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर (आर इन्फ्रा) सहित समूह की

.

.

कई कंपनियों द्वारा लिए गए ₹17,000 करोड़ से अधिक के सामूहिक बैंक ऋणों के दुरुपयोग से संबंधित है। ईडी की जांच के केंद्र में दो प्रमुख और बड़े आरोप हैं:- यस बैंक ऋण डायवर्जन (लगभग ₹3,000 करोड़): पहला आरोप यस बैंक द्वारा 2017 और 2019 के बीच अनिल अंबानी समूह की कंपनियों को दिए गए ₹3,000 करोड़ के ‘अवैध’ ऋण डायवर्जन से संबंधित है। आरोप है कि इन ऋणों का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के बजाय अन्यत्र किया गया, जिससे बैंक और निवेशकों को नुकसान हुआ।

.

.

रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) धोखाधड़ी (लगभग ₹14,000 करोड़): दूसरा और अधिक गंभीर आरोप रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) द्वारा की गई इसी तरह की धोखाधड़ी से संबंधित है। यह धोखाधड़ी कथित तौर पर ₹14,000 करोड़ रुपये से अधिक की है। जांच एजेंसी का मानना है कि इन बड़ी रकम के ऋणों को अवैध तरीके से ‘डायवर्ट’ किया गया और

.

मनी लॉन्ड्रिंग के माध्यम से इसे वैध बनाने का प्रयास किया गया। ईडी इस मामले में गहन जांच कर रही है कि किस तरह से इन विशाल ऋणों को समूह की विभिन्न कंपनियों के बीच घुमाया गया और अंततः उनका दुरुपयोग किया गया। ईडी इस मामले में पहले भी रिलायंस समूह के चेयरमैन अनिल अंबानी को पूछताछ के लिए बुला चुकी है। यह दर्शाता है कि जांच का दायरा समूह के शीर्ष नेतृत्व तक फैला हुआ है।

अपनी जांच को मजबूत करने के लिए, ईडी ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 12 से 13 बैंकों से विस्तृत जानकारी मांगी है। एजेंसी ने बैंकों से यह ब्योरा मांगा है कि जब रिलायंस हाउसिंग फाइनेंस, रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस जैसी समूह की कंपनियों को बड़े ऋण दिए गए थे, तब किस तरह की ‘ड्यू डिलिजेंस’ (ड्यू डिलिजेंस यानी उचित जांच पड़ताल) की गई थी।