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पंजाब के उद्योगों और उद्योगपतियों को दी सरकार ने बड़ी राहत,

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PTB Big न्यूज़ चंडीगढ़ : पंजाब के उद्योगों और उद्योगपतियों को राहत देते हुए सरकार ने सेवाओं को तेज, प्रक्रियाओं को सरल और प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत फास्ट सर्विस, विकेंद्रीकरण और ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस (ओ एंड एम) नीति के जरिए उद्योगों से जुड़ी लंबित समस्याओं को दूर करने की कोशिश की गई है। यह जानकारी उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा और उद्योग विभाग की निदेशक सुरभि मलिक ने दी।

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संजीव अरोड़ा ने बताया कि पॉलिसी इंटरप्रिटेशन से जुड़े मुद्दों के कारण सेवाएं धीमी हो रही थीं और उद्योगपतियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। अब इन सभी पहलुओं को स्पष्ट करते हुए फास्ट सर्विस को लागू किया गया है, जिससे प्रक्रियाओं को तेज किया जा सके। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के तहत जहां पहले सेवाओं के लिए 15 दिन का समय निर्धारित था, उसे घटाकर 10 दिन कर दिया गया है।

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इसके अलावा फ्रीहोल्ड प्लांट्स को अतिरिक्त लाभ देते हुए कम समय में सेवाएं देने का प्रावधान किया गया है। लक्ष्य यह रखा गया है कि सभी प्रक्रियाएं चार हफ्तों के भीतर पूरी हो जाएं। अरोड़ा ने बताया कि डेलीगेशन ऑफ पावर्स के तहत विकेंद्रीकरण को बढ़ावा दिया गया है, जिससे एक ही अधिकारी को अधिक जिम्मेदारी दी जा सके और उसे अलग-अलग स्तरों पर अप्रूवल लेने की जरूरत न पड़े। इससे काम में तेजी आएगी और देरी कम होगी।

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ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस (ओ एंड एम) नीति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य तकनीकी अधिकारियों और इंजीनियरों को अपने स्तर पर अपग्रेडेशन से जुड़े फैसले लेने का अधिकार देना है। पहले फंड कलेक्शन को लेकर दिक्कत आती थी, लेकिन अब यह जिम्मेदारी पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड को दी गई है। उन्होंने कहा कि अब बिजली बिलों के साथ ही चार्जेज वसूले जाएंगे, जिससे शत-प्रतिशत कलेक्शन सुनिश्चित होगा।

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इसके बाद यह राशि संबंधित स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) को ट्रांसफर की जाएगी, जो यह तय करेगी कि खर्च कहां और कितना करना है। सरकार के सदस्य इसमें मार्गदर्शन और रिपोर्टिंग के लिए होंगे, जबकि निर्णय लेने का अधिकार स्थानीय स्तर पर रहेगा। सुरभि मलिक ने बताया कि यदि किसी प्रकार की समस्या आती है तो उसे डिप्टी कमिश्नर की अगुवाई वाली संबंधित अथॉरिटी के पास उठाया जा सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एसपीवी को अतिरिक्त आय के स्रोत विकसित करने

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की अनुमति दी गई है, जैसे पार्किंग, छोटी जगहों को कमर्शियल किराये पर देना या विज्ञापन के जरिए आय बढ़ाना, बशर्ते यह सभी कार्य कॉरपोरेशन के नियमों के तहत हों। उन्होंने कहा कि पहले उद्योगों से लिया गया टैक्स लोकल गवर्नमेंट को जाता था, लेकिन वहां उद्योगिक क्षेत्रों में अपेक्षित काम नहीं हो पाता था। अब यह सुनिश्चित किया गया है कि उद्योगों से आने वाला पैसा उसी क्षेत्र में खर्च हो, जिससे बुनियादी सुविधाओं में सुधार होगा और उद्योगपतियों को सीधा लाभ मिलेगा।

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