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Punjab Police के ASI की एक हरकत से शर्मसार हुआ पुलिस विभाग, अदालत ने सुनाई 5 साल की सजा,

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PTB Big न्यूज़ लुधियाना : अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अजीत अत्री की अदालत ने थाना शिमलापुरी के ए.एस.आई. कुलविंदर सिंह निवासी गांव रामपुर पत्ती होशियारा दोराहा को रिश्वत मांगने के आरोप में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 13(2) दोनों के तहत 5 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उपरोक्त दोनों धाराओं के तहत 20,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

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अभियोजन पक्ष के अनुसार 12 अक्तूबर, 2016 को विजिलेंस ब्यूरो द्वारा पुलिस स्टेशन शिमला पुरी के ए.एस.आई. कुलविंदर सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 13 (2) के तहत मामला दर्ज किया गया था। शिकायतकर्त्ता मलिक कपूर के अनुसार वर्ष 2016 में उनका अपनी कंपनी के साथ विवाद हो गया था और उन्होंने उक्त कंपनी के खिलाफ पुलिस कमिश्नर लुधियाना के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी, जिसे पी.एस. के एस.एच.ओ. को पूछताछ के लिए शिमलापुरी मार्क किया गया था।

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उक्त शिकायत को एस.एच.ओ. द्वारा शिमलापुरी के ए.एस.आई. कुलविंदर सिंह को पूछताछ के लिए भेजा गया। शिकायतकर्त्ता ने पूछताछ कार्रवाई के सिलसिले में ए.एस.आई. कुलविंदर सिंह से मुलाकात की और उस समय ए.एस.आई. कुलविंदर सिंह ने शिकायतकर्त्ता से कहा कि उसे अपने आवेदन के साथ ”व्हील” लगाना होगा। इस पर, शिकायतकर्त्ता ने ए.एस.आई. कुलविंदर सिंह से ”पहिया स्थापित करने” का अर्थ पूछा, जिस पर ए.एस.आई. कुलविंदर सिंह ने जवाब दिया कि अवैध रिश्वत के बिना काम नहीं होगा और उसने रिश्वत के रूप में 20,000 रुपए की मांग की।

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इतना ही नहीं ए.एस.आई. कुलविंदर सिंह ने शिकायतकर्त्ता को धमकी भी दी कि अगर वह रिश्वत नहीं देगा तो वह उसके खिलाफ जांच की कार्रवाई खत्म कर देगा। शिकायतकर्त्ता के अनुरोध के बावजूद ए.एस.आई. कुलविंदर सिंह रिश्वत के रूप में 20,000 रुपए की मांग पर अड़े रहे। शिकायतकर्त्ता ने इस मामले पर अपने दोस्त वैभव जैन से चर्चा की थी, जिसने शिकायतकर्त्ता से कहा था कि ऐसे भ्रष्ट अधिकारी को सतर्कता ब्यूरो द्वारा पकड़ा जाना चाहिए। 

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इसलिए शिकायतकर्त्ता मलिक कपूर, वैभव जैन के साथ 12.10.2016 को विजिलेंस ब्यूरो लुधियाना गए और ए.एस.आई. कुलविंदर सिंह के खिलाफ शिकायत की। ए.एस.आई. कुलविंदर सिंह को विजिलेंस ब्यूरो की टीम ने रंगे हाथ पकड़ लिया और बाद में गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि मुकद्दमे के दौरान आरोपी ने खुद को निर्दोष बताया, लेकिन अभियोजन साक्ष्य से संतुष्ट होकर अदालत ने उसे दोषी पाया और उपरोक्त सजा सुनाई।

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