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Income Tax भरने वाले एक करोड़ करदाताओं को होगा बड़ा फायदा, जाने कैसे?

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PTB Big न्यूज़ नई दिल्ली : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण 2024 के दौरान टैक्सेशन से जुड़ा कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है। इसके बावजूद एक करोड़ लोगों को टैक्स से जुड़ा लाभ मिलेगा क्योंकि वित्त मंत्री ने पुराने टैक्सेशन से जुड़े पुराने विवादों के समाधान की दिशा में एक बड़ा एलान किया है। वित्त मंत्री ने वर्षों से लंबित बकाया प्रत्यक्ष कर मांगों को वापस लेने का फैसला किया है। वित्त मंत्री ने बजट भाषण में कहा है कि उन्होंने परंपरा को निभाते हुए अंतरिम बजट 2024 के दौरान टैक्स दरों को अपरिवर्तित रखा है।

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वित्त मंत्री के अनुसार सरकार की ओर से पुराने विवादों को सुलझाने का कदम उठाने से कम से कम एक करोड़ करदाताओं को फायदा होगा। उन्होंने कहा है कि इससे ईमानदार करदाताओं को लाभ मिलेगा। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों के साथ-साथ इंपोर्ट ड्यूटी के लिए भी समान दरों को बरकरार रखा गया है। स्टार्टअप्स और सॉवरेन वेल्थ व पेंशन फंड्स में निवेश करने वालों को टैक्स सुविधाएं मुहैया कराई जाएगी।

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हां, वित्त मंत्री की ओर से पुराने विवादों के समाधान के एलान से टैक्स रिफंड की प्रक्रिया में सुगमता आएगी। वित्त मंत्री ने बजट भाषण के दौरान जीवन की सुगमता और व्यापारिक सुगमता में सुधार करने की सरकार की परिकल्पना के तहत करदाताओं की सुविधा के लिए बड़ी घोषणा की है। उन्होंने कहा, “बड़ी संख्या में कई छोटी-छोटी, गैर-सत्यापित, गैर-समायोजित या विवादित प्रत्यक्ष कर मांग बही खातों में लंबित हैं। इनमें से कई मांग तो वर्ष 1962 तक के भी पुराने समय से मौजूद हैं।

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इनके कारण ईमानदार करदाताओं को परेशानी होती है तथा बाद के वर्षों में रिफंड जारी करने की प्रक्रिया में भी बाधा आती है। मैं वित्तीय वर्ष 2009-10 तक की अवधि से संबंधित पच्चीस हजार रुपए (25,000) तक तथा वित्तीय वर्ष 2010-11 से वर्ष 2014-15 से संबंधित दस हजार रुपए (10,000) तक की ऐसी बकाया प्रत्यक्ष कर मांगों को वापस लेने का प्रस्ताव करती हूं। इससे लगभग एक करोड़ करदाताओं के लाभान्वित होने की अपेक्षा है।”

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वित्त मंत्रालय ने अपनी नवीनतम मासिक आर्थिक समीक्षा में कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था अगले तीन वर्षों में मौजूदा 3,700 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 5,000 अरब डॉलर के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के साथ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगी। इसमें कहा गया कि भारत अगले छह से सात वर्षों में (2030 तक) 7,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की आकांक्षा रख सकता है।

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