PTB Big न्यूज़ दिल्ली : यूरोपीय संघ (EU) ने वीज़ा प्रक्रिया को और तेज़, सुरक्षित और तकनीकी रूप से आसान बनाने के लिए शेंगेन वीज़ा को पूरी तरह डिजिटल करने की योजना बनाई है। अब Visa पासपोर्ट में स्टिकर की जगह डिजिटल 2D बारकोड के रूप में मिलेगा। यह नई प्रणाली 2028 तक पूरी तरह लागू हो जाएगी।
. .कैसे काम करेगा नया डिजिटल वीज़ा सिस्टम? :–
अब शेंगेन वीज़ा के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन किया जाएगा। यात्री दस्तावेज़ अपलोड कर सकेंगे, फीस ऑनलाइन भर सकेंगे और अपने आवेदन की स्थिति को ट्रैक कर सकेंगे। अगर वीज़ा मंज़ूर हो जाता है, तो यात्रियों को डिजिटली साइन किया गया एक बारकोड वीज़ा मिलेगा।
वहीं पासपोर्ट में स्टिकर की ज़रूरत नहीं होगी। पहली बार आवेदन करने वालों को या जिनका बायोमेट्रिक डेटा 5 साल पुराना है, उन्हें फिंगरप्रिंट और फोटो देने के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ेगा। फ्रांस ने 2024 के पेरिस ओलंपिक के दौरान इस नई प्रणाली का ट्रायल किया था और 70,000 से ज्यादा डिजिटल वीज़ा जारी किए थे, जिन्हें बॉर्डर पर स्कैन किया गया था।
.नई एंट्री/एग्ज़िट सिस्टम (EES) – अक्टूबर 2025 से शुरू :–
यूरोपीय संघ 12 अक्टूबर 2025 से Entry/Exit System (EES) भी लागू करेगा। अब पासपोर्ट पर मुहर नहीं लगेगी, बल्कि बॉर्डर पर बायोमेट्रिक स्कैनिंग (फेस और फिंगरप्रिंट) से चेकिंग होगी। यह सिस्टम पूरी प्रक्रिया को तेज़, पारदर्शी और सुरक्षित बनाएगा। यूरोपीय आयोग (European Commission) ने कहा कि यह कदम सुरक्षा और तकनीकी नवाचार को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
. .भारतीय यात्रियों के लिए इसका क्या मतलब है?:-
2023 में भारत से 6 लाख से ज्यादा शेंगेन वीज़ा के आवेदन किए गए थे। डिजिटल वीज़ा के आने से भारतीय यात्रियों को कम कागज़ी काम, तेज़ प्रक्रिया, और बेहतर पारदर्शिता मिलेगी। हालांकि, यात्रियों को अब भी वही स्टैंडर्ड डॉक्यूमेंट्स देने होंगे – जैसे कि बैंक स्टेटमेंट, ट्रैवल इंश्योरेंस, टिकट्स, होटल बुकिंग आदि। डिजिटल होने का मतलब यह नहीं कि वीज़ा मिलना आसान हो जाएगा – अधिकारियों द्वारा हर आवेदन की जांच वैसे ही की जाएगी। यही नहीं यदि किसी भारतीय यात्री ने पिछले 3 सालों में दो बार शेंगेन वीज़ा का सही उपयोग किया है, तो वह लंबी अवधि वाले मल्टी-एंट्री वीज़ा के लिए पात्र हो सकता है।






































